उत्तराखंड

कार्बेट क्षेत्र में बाघ के हमले से नवविवाहिता की मौत पर आक्रोश

Kavita2
5 Aug 2026 4:30 PM IST
कार्बेट क्षेत्र में बाघ के हमले से नवविवाहिता की मौत पर आक्रोश
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रामनगर। कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) से सटे डभरा सौराल क्षेत्र में बाघ के हमले में नवविवाहिता शालू देवी की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की लगातार बढ़ती घटनाओं और पिछले छह महीनों में चार ग्रामीणों की मौत से नाराज लोगों ने मोहान तिराहे पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बाघ और अन्य वन्यजीवों की बढ़ती सक्रियता के कारण लोगों में भय का माहौल है। जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोग रोजमर्रा के कामों के लिए बाहर निकलने से भी डरने लगे हैं। उनका आरोप है कि लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, डभरा सौराल क्षेत्र में बाघ के हमले में नवविवाहिता शालू देवी की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक के साथ-साथ आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने कहा कि वन्यजीवों के हमले अब आम होते जा रहे हैं और इसका सबसे ज्यादा असर जंगल किनारे रहने वाले परिवारों पर पड़ रहा है।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मोहान तिराहे पर पहुंचे। उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ऐसे इंतजाम किए जाने चाहिए, जिससे लोगों की जान बचाई जा सके।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र में बाघों की आवाजाही बढ़ी है। इसके बावजूद संवेदनशील इलाकों में निगरानी, गश्त और सुरक्षा उपायों को पर्याप्त स्तर पर लागू नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि जंगल और आबादी वाले क्षेत्रों के बीच रहने वाले ग्रामीण लगातार खतरे के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि वन विभाग की टीमें गांवों के आसपास नियमित गश्त करें और हिंसक वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जाए। इसके अलावा, प्रभावित परिवारों को उचित सहायता देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस योजना बनाने की मांग भी उठाई गई।

ग्रामीणों का कहना है कि छह महीनों में चार लोगों की मौत होना गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना है कि मानव जीवन की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए संतुलित व्यवस्था जरूरी है।

वहीं, वन विभाग की ओर से भी क्षेत्र में स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई है। अधिकारियों का कहना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों के आसपास मानव गतिविधियों का बढ़ना और वन्यजीवों के प्राकृतिक क्षेत्र में बदलाव संघर्ष की बड़ी वजहों में शामिल हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय समुदाय, वन विभाग और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होता है।

फिलहाल शालू देवी की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। लोग मांग कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाएं। प्रशासन और वन विभाग की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदमों पर ग्रामीणों की नजर बनी हुई है।

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