
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पुरोला क्षेत्र में सड़क बंद होने के कारण ग्रामीणों को एक बार फिर भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। भूस्खलन और मलबा आने से डेढ़ सप्ताह से बंद सांकरी-फिताड़ी-लिवाड़ी सड़क के कारण एक बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए स्वजन और ग्रामीणों को करीब 5 किलोमीटर तक उसे डंडी-कंडी के सहारे ले जाना पड़ा। कड़ी मशक्कत के बाद महिला को एंबुलेंस तक पहुंचाया गया, जिसके बाद उसका इलाज शुरू हो सका।
जानकारी के अनुसार, पुरोला क्षेत्र के रेक्चा गांव निवासी 26 वर्षीय महिला सपना की गुरुवार को अचानक तबीयत खराब हो गई। बताया गया कि महिला की हालत इतनी बिगड़ गई कि वह बेहोश हो गई। गांव में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने और सड़क मार्ग बंद होने के कारण परिजनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।
सड़क बंद होने के कारण गांव तक कोई वाहन नहीं पहुंच पा रहा था। ऐसे में महिला के स्वजन और ग्रामीणों ने मिलकर उसे डंडी-कंडी के माध्यम से अस्पताल पहुंचाने का फैसला लिया। ग्रामीणों ने महिला को कंधों पर उठाकर करीब 5 किलोमीटर का कठिन रास्ता तय किया और उसे खेड़ा घाटी पुल के पास तक पहुंचाया।
ग्रामीणों के अनुसार, खेड़ा घाटी से फिताड़ी तक सड़क पर लगातार भूस्खलन और मलबा आने के कारण यातायात पूरी तरह बाधित है। पिछले करीब डेढ़ सप्ताह से सड़क बंद होने के चलते क्षेत्र के लोगों को जरूरी कामों के लिए भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत मरीजों और बुजुर्गों को हो रही है, जिन्हें समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
खेड़ा घाटी पुल तक पहुंचने के बाद महिला को हंस फाउंडेशन की एंबुलेंस की मदद मिली। इसके बाद महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी ले जाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि एंबुलेंस मिलने के बाद भी अस्पताल पहुंचने में करीब दो घंटे का समय लग गया। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने महिला का उपचार शुरू किया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी के प्रभारी डॉ. नितेश रावत ने बताया कि महिला का इलाज किया जा रहा है और अब उसकी हालत खतरे से बाहर है। समय पर अस्पताल पहुंचने से महिला को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकी।
ग्रामीण संतोष सिंह ने बताया कि सड़क बंद होने के कारण क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है। गांव तक एंबुलेंस या अन्य वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाती हैं, लेकिन सड़क बंद होने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बंद सड़क को जल्द से जल्द खोला जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इस तरह जोखिम उठाकर अस्पताल न ले जाना पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं जीवन से जुड़ा मुद्दा हैं। आपात स्थिति में समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है।
यह घटना एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में बेहतर सड़क संपर्क और आपदा प्रबंधन व्यवस्था की जरूरत को सामने लाती है। बरसात के दौरान उत्तराखंड के कई इलाकों में भूस्खलन के कारण सड़कें बंद हो जाती हैं, जिससे ग्रामीणों को कई किलोमीटर पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। प्रशासन की ओर से सड़क खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोग जल्द स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।





