उत्तराखंड

ऑनलाइन लोन बना मुसीबत, ITBP जवान को 64 करोड़ का नोटिस

Kavita2
8 July 2026 10:44 AM IST
ऑनलाइन लोन बना मुसीबत, ITBP जवान को 64 करोड़ का नोटिस
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पिथौरागढ़: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ऑनलाइन लोन लेने के लिए एक एप पर आवेदन करना भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के एक जवान के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया। जवान को लोन तो नहीं मिला, लेकिन उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का कथित रूप से दुरुपयोग कर एक फर्जी फर्म खड़ी कर दी गई।

मामला तब सामने आया जब करीब एक साल बाद जवान के घर 64 करोड़ रुपये की GST रिकवरी का नोटिस पहुंचा। नोटिस देखकर जवान और उसका परिवार हैरान रह गया। इसके बाद जवान की पत्नी ने साइबर सेल से संपर्क किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल और फर्जी फर्म बनाए जाने की बात सामने आई।

ऑनलाइन लोन आवेदन बना मुसीबत

जानकारी के अनुसार, ITBP जवान ने कुछ समय पहले आर्थिक जरूरत के चलते ऑनलाइन लोन उपलब्ध कराने वाले एक एप पर आवेदन किया था। आवेदन प्रक्रिया के दौरान उससे आधार कार्ड, पैन कार्ड समेत कई व्यक्तिगत दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई थी।

जवान ने लोन की उम्मीद में दस्तावेज उपलब्ध करा दिए, लेकिन उसे कोई लोन नहीं मिला। उसे यह अंदाजा भी नहीं था कि उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि के लिए किया जा सकता है।

कुछ समय बाद जब उसके घर GST विभाग की ओर से भारी-भरकम रिकवरी नोटिस पहुंचा, तो परिवार के होश उड़ गए। नोटिस में करोड़ों रुपये के टैक्स बकाया का जिक्र था।

64 करोड़ रुपये की रिकवरी से उड़े होश

जवान के परिवार के लिए सबसे बड़ा झटका यह था कि जिस कारोबार या फर्म के नाम पर यह बकाया दिखाया गया था, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी ही नहीं थी। जवान ने न तो कोई फर्म शुरू की थी और न ही किसी व्यापारिक गतिविधि से उसका कोई संबंध था।

GST विभाग के नोटिस में करीब 64 करोड़ रुपये की रिकवरी की बात सामने आने के बाद परिवार ने मामले की जांच कराने का फैसला किया। इसके बाद जवान की पत्नी ने पुलिस की साइबर सेल में शिकायत की।

साइबर सेल ने शुरू की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक नीरज भाकुनी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी। साइबर टीम ने दस्तावेजों और संबंधित जानकारियों की जांच शुरू की।

जांच के दौरान सामने आया कि जवान के आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर एक फर्जी फर्म तैयार की गई और उसके नाम पर व्यापारिक गतिविधियां दिखाई गईं।

दस्तावेजों के दुरुपयोग से बना फर्जी कारोबार

पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि जवान की पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्म का पंजीकरण कराया गया था। फर्जी तरीके से तैयार की गई इस फर्म के नाम पर बड़े स्तर पर लेन-देन और टैक्स संबंधी रिकॉर्ड तैयार किए गए।

हालांकि जवान को इस पूरी प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं थी। वह केवल ऑनलाइन लोन आवेदन के दौरान अपने दस्तावेज साझा करने तक सीमित था।

साइबर अपराधियों के नए तरीके से बढ़ी चिंता

इस मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। साइबर अपराधी अब केवल बैंक खाते या ओटीपी के जरिए ही नहीं, बल्कि लोगों के पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भी धोखाधड़ी कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन लोन, नौकरी, निवेश या अन्य सेवाओं के नाम पर किसी भी एप या वेबसाइट पर दस्तावेज अपलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना बेहद जरूरी है।

पुलिस कर रही है आगे की कार्रवाई

फिलहाल साइबर सेल मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जवान के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी फर्म किसने बनाई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।

जांच एजेंसियां संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेजों के इस्तेमाल और फर्म से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही हैं। पुलिस का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान ऑनलाइन लोन एप या वेबसाइट पर अपने निजी दस्तावेज साझा करने से पहले पूरी जांच करें। आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य पहचान पत्रों का गलत इस्तेमाल गंभीर आर्थिक और कानूनी परेशानी पैदा कर सकता है।

साथ ही लोगों को सलाह दी गई है कि संदिग्ध गतिविधि या दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल की जानकारी मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करें।

एक बड़ी सीख

ITBP जवान के साथ हुई यह घटना बताती है कि ऑनलाइन सुविधाओं का इस्तेमाल करते समय सावधानी बेहद जरूरी है। कुछ मिनटों में साझा किए गए दस्तावेज किसी व्यक्ति को वर्षों तक कानूनी और आर्थिक परेशानियों में डाल सकते हैं।

फिलहाल जवान को उम्मीद है कि पुलिस जांच के जरिए असली आरोपियों तक पहुंचेगी और उसके नाम पर बनाए गए फर्जी कारोबार तथा करोड़ों रुपये की GST देनदारी के मामले से उसे राहत मिलेगी।

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