उत्तराखंड

उत्तराखंड में तंबाकू युक्त गुटखा और पान मसाला पर एक साल की रोक, जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता

nidhi
14 Oct 2026 8:30 AM IST
उत्तराखंड में तंबाकू युक्त गुटखा और पान मसाला पर एक साल की रोक, जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता
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गुटखा-पान मसाला के प्रतिबंध से करीब 40 करोड़ के कर संग्रह पर असर संभव
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा, पान मसाला तथा अन्य संबंधित खाद्य उत्पादों पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने 13 अक्टूबर को आदेश जारी किया। रोक तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू की गई है। इसके दायरे में संबंधित उत्पादों का निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री शामिल हैं।
इस निर्णय का आर्थिक पहलू भी सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित उत्पादों से सालाना करीब 40 करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह होता है। इसमें लगभग 20 करोड़ रुपये राज्य और शेष 20 करोड़ रुपये केंद्र के हिस्से में बताए गए हैं। हालांकि, इस पूरे आंकड़े को राज्य सरकार का निश्चित नुकसान कहना सही नहीं होगा। वास्तविक राजस्व प्रभाव प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री और आदेश के अनुपालन पर निर्भर करेगा।
प्रतिबंध को केवल दुकानों पर बिक्री रोकने तक सीमित नहीं रखा गया है। संबंधित खाद्य उत्पादों को बनाना, गोदामों में रखना और वितरण करना भी आदेश के दायरे में आता है। यह व्यवस्था आदेश जारी होने की तारीख से अगले एक वर्ष तक प्रभावी रहेगी। ऐसे उत्पाद किसी दूसरे नाम से बाजार में उपलब्ध हों, तब भी उनमें तंबाकू या निकोटीन होने पर प्रतिबंध लागू होगा।
आदेश को समझते समय उत्पादों की सामग्री पर ध्यान देना जरूरी है। रोक का घोषित दायरा तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा, पान मसाला तथा अन्य खाद्य पदार्थ हैं। इसे हर प्रकार के पान मसाले या सभी तंबाकू उत्पादों पर एक समान प्रतिबंध बताना आदेश की सीमा को व्यापक करके पेश करना होगा। जारी निर्देश मुख्य रूप से खाद्य उत्पादों में इन पदार्थों के इस्तेमाल से संबंधित हैं।
यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक संबंधी 2011 के विनियमों के तहत की गई है। अधिनियम की धारा 30(2)(ए) जनस्वास्थ्य के हित में राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त को किसी खाद्य पदार्थ के निर्माण, भंडारण, वितरण या बिक्री पर अधिकतम एक वर्ष की रोक लगाने का अधिकार देती है। संबंधित विनियम खाद्य पदार्थों में तंबाकू और निकोटीन को सामग्री के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाते हैं।
विभागीय आदेश की प्रतियां स्वास्थ्य विभाग, जिलाधिकारियों, मुख्य चिकित्साधिकारियों और संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भेजी गई हैं। गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है। स्थानीय स्तर पर आदेश का पालन सुनिश्चित कराने में इन विभागों और अधिकारियों की भूमिका रहेगी। प्रतिबंध पूरे राज्य के लिए है, इसलिए इसकी व्यवस्था किसी एक जिले या शहर तक सीमित नहीं होगी।
कारोबार के स्तर पर संबंधित निर्माताओं, थोक विक्रेताओं, वितरकों और खुदरा दुकानदारों पर असर पड़ सकता है। पहले से मौजूद स्टॉक के संबंध में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया विभागीय निर्देशों और लागू प्रावधानों पर निर्भर करेगी। लगभग 100 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान भी सामने आया है, लेकिन यह कर संग्रह और अनुमानित प्रभावी कर दर पर आधारित गणना है, स्वतंत्र रूप से सत्यापित कारोबार का आंकड़ा नहीं है। फिलहाल जारी आदेश में बाजार और गोदामों की जांच के अभियान, पुराने स्टॉक के निस्तारण तथा कार्रवाई की विस्तृत प्रक्रिया स्पष्ट नहीं की गई है। इसलिए कारोबारियों के लिए संबंधित विभाग के निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। सरकार ने जनस्वास्थ्य के आधार पर रोक लगाई है, जबकि इसके वास्तविक आर्थिक असर और जमीनी अनुपालन की स्थिति आगे सामने आएगी।
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