उत्तराखंड

5.5 किलो की विशाल मूली देखकर हैरान रह गए अधिकारी

Kavita2
7 Nov 2026 12:26 PM IST
5.5 किलो की विशाल मूली देखकर हैरान रह गए अधिकारी
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दूनागिरि। राजकीय उद्यान दूनागिरि में औद्यानिक विकास और कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में संयुक्त निदेशक उद्यान (नर्सरी प्रबंधन) डॉ. नरेंद्र कुमार ने उद्यान का स्थलीय निरीक्षण कर विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उद्यान में 5.500 किलोग्राम वजन की विशाल मूली देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। मूली के असाधारण आकार और वजन को देखते हुए डॉ. नरेंद्र कुमार ने उसकी जड़ का रोपण कर बीज उत्पादन की प्रक्रिया शुरू कराई। इस पहल को उद्यान में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और औद्यानिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने उद्यान में संचालित विभिन्न उत्पादन गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की। इसमें मूली के बीज उत्पादन के लिए जड़ तैयार करने, प्याज के पौध उत्पादन और फलदार पौधों की नर्सरी से संबंधित कार्यों की स्थिति देखी गई। इसके अलावा पहले रोपित किए गए फलदार पौधों की वृद्धि और उनकी वर्तमान स्थिति का भी जायजा लिया गया।

5.5 किलो की मूली बनी आकर्षण का केंद्र

दूनागिरि राजकीय उद्यान के निरीक्षण के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा 5.500 किलोग्राम वजन वाली विशाल मूली की रही। सामान्य आकार की मूली की तुलना में इसका वजन काफी अधिक होने के कारण यह अधिकारियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गई।

संयुक्त निदेशक उद्यान डॉ. नरेंद्र कुमार ने मूली की जड़ का रोपण कर बीज उत्पादन की प्रक्रिया शुरू कराई। इस प्रक्रिया के तहत मूली की जड़ से आगे बीज तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।

मूली की जड़ का चयन बीज उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिए उपयुक्त जड़ों का चयन कर उनका रोपण किया जाता है, ताकि आगे पौधे विकसित हों और उनसे बीज प्राप्त किए जा सकें।

हालांकि, इस विशेष मूली से कितनी मात्रा में बीज उत्पादन होगा, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

मूली बीज उत्पादन की तैयारियों की समीक्षा

निरीक्षण के दौरान मूली बीज उत्पादन के लिए जड़ उत्पादन की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने उद्यान में इस कार्य की प्रगति और उपलब्ध संसाधनों का जायजा लिया।

बीज उत्पादन की प्रक्रिया में गुणवत्तापूर्ण जड़ों का चयन और उनका उचित रखरखाव महत्वपूर्ण होता है। बेहतर बीज तैयार होने से भविष्य में किसानों और उद्यानिकी से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है।

डॉ. नरेंद्र कुमार ने इस प्रक्रिया की शुरुआत कराते हुए उद्यान में चल रहे उत्पादन कार्यों की समीक्षा की। उद्यान में विभिन्न किस्मों के पौधों और बीजों के उत्पादन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

प्याज के पौध उत्पादन का भी लिया जायजा

निरीक्षण के दौरान प्याज के पौध उत्पादन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। प्याज की खेती के लिए गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करना महत्वपूर्ण चरण होता है।

समय पर स्वस्थ पौध उपलब्ध होने से किसानों को खेती की तैयारी करने में सुविधा मिलती है। नर्सरी में पौधों की देखभाल, उनकी वृद्धि और उत्पादन की व्यवस्था का निरीक्षण किया गया।

अधिकारियों ने उद्यान में चल रही इस गतिविधि की प्रगति को देखा और उत्पादन व्यवस्था का जायजा लिया।

फलदार पौधों की स्थिति की जांच

राजकीय उद्यान में फलदार पौध उत्पादन और पहले रोपित किए गए पौधों की स्थिति भी निरीक्षण का प्रमुख हिस्सा रही।

डॉ. नरेंद्र कुमार ने पूर्व में लगाए गए फलदार पौधों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। पौधों की वृद्धि और उनकी देखभाल से संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।

इसके साथ ही आगामी वर्ष में किए जाने वाले फलदार पौध रोपण की तैयारियों पर भी चर्चा की गई।

फलदार पौधों का उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में बागवानी को बढ़ावा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे किसानों को पारंपरिक खेती के साथ फल उत्पादन को भी आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में अपनाने का अवसर मिल सकता है।

जल संरक्षण तकनीकों पर विशेष जोर

निरीक्षण के दौरान उद्यान में जल संरक्षण की तकनीकों का भी जायजा लिया गया। पौधों की बेहतर वृद्धि और उत्पादन के लिए पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है।

विशेष रूप से उद्यानों और नर्सरी में जल का उचित प्रबंधन जरूरी है, ताकि उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जा सके।

अधिकारियों ने उद्यान में अपनाई जा रही जल संरक्षण व्यवस्था और तकनीकों की स्थिति देखी। इसका उद्देश्य पानी की बचत के साथ पौधों को आवश्यकतानुसार सिंचाई उपलब्ध कराने की व्यवस्था का आकलन करना था।

जल संरक्षण की प्रभावी तकनीकों से नर्सरी प्रबंधन और औद्यानिक विकास को मजबूती मिल सकती है।

सुरक्षात्मक घेरबाड़ और आउटलेट व्यवस्था का निरीक्षण

डॉ. नरेंद्र कुमार ने उद्यान की सुरक्षात्मक घेरबाड़ और आउटलेट व्यवस्था का भी जायजा लिया।

उद्यान में पौधों और नर्सरी की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ महत्वपूर्ण होती है। इससे बाहरी हस्तक्षेप और अन्य संभावित नुकसान से पौधों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

वहीं आउटलेट व्यवस्था का निरीक्षण भी किया गया, ताकि उद्यान में पानी के निकास और संबंधित व्यवस्थाओं की स्थिति का आकलन किया जा सके।

इन सभी पहलुओं को उद्यान के समग्र विकास और बेहतर प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

औद्यानिक विकास को गति देने की पहल

राजकीय उद्यान दूनागिरि में किए गए निरीक्षण का उद्देश्य विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था। मूली बीज उत्पादन से लेकर प्याज पौध और फलदार पौधों की नर्सरी तक सभी गतिविधियों की समीक्षा की गई।

इसके अलावा आगामी वर्ष के पौध रोपण, जल संरक्षण, सुरक्षात्मक घेरबाड़ और आउटलेट व्यवस्था पर भी ध्यान दिया गया।

उद्यान में 5.5 किलोग्राम वजन वाली मूली का मिलना और उसकी जड़ से बीज उत्पादन की प्रक्रिया शुरू होना निरीक्षण का खास आकर्षण रहा।

अब आगे इस प्रक्रिया से बीज उत्पादन किस स्तर तक पहुंचता है और उद्यान की अन्य योजनाओं में कितनी प्रगति होती है, इस पर नजर रहेगी।

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