उत्तराखंड

उत्तराखंड में NHM कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत

Kavita2
7 Oct 2026 9:23 AM IST
उत्तराखंड में NHM कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत
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देहरादून। उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी एनएचएम के तहत लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आ सकती है। पुष्कर सिंह धामी सरकार उपनल कर्मचारियों के बाद अब एनएचएम में वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों की सेवा को स्थायी करने की दिशा में भी विचार कर रही है। सरकार के स्तर पर इस मुद्दे को गंभीरता से देखा जा रहा है और एनएचएम निदेशालय ने राज्य में दस साल या उससे अधिक समय से काम कर रहे कर्मचारियों का ब्योरा भी मांग लिया है।

एनएचएम के तहत राज्य के विभिन्न जिलों और स्वास्थ्य संस्थानों में बड़ी संख्या में कर्मचारी लंबे समय से सेवा दे रहे हैं। इनमें कई ऐसे कर्मचारी हैं, जो वर्षों से संविदा या अन्य अस्थायी व्यवस्थाओं के तहत काम कर रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से नौकरी की सुरक्षा और नियमितीकरण की मांग उठाई जाती रही है। अब सरकार की सक्रियता से इन कर्मचारियों में उम्मीद बढ़ी है।

बताया जा रहा है कि एनएचएम निदेशालय ने ऐसे कर्मचारियों का विस्तृत विवरण मांगा है, जो दस वर्षों से लगातार सेवा में हैं। इस सूची के आधार पर सरकार आगे की नीति तैयार कर सकती है। कर्मचारियों के पद, सेवा अवधि, नियुक्ति का स्वरूप, कार्यस्थल और अन्य जरूरी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि पूरे मामले पर स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

राज्य सरकार इससे पहले उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति को लेकर भी मंथन कर चुकी है। इसी क्रम में अब स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एनएचएम कर्मचारियों की सेवा शर्तों और भविष्य को लेकर चर्चा तेज हुई है। सरकार यह देख रही है कि लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे रहे कर्मचारियों को किस तरह स्थायित्व दिया जा सकता है।

एनएचएम उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम, अस्पताल प्रबंधन और विभिन्न जनस्वास्थ्य योजनाओं के संचालन में एनएचएम कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में भी ये कर्मचारी लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने में योगदान दे रहे हैं।

ऐसे में यदि सरकार लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थायी सेवा या नियमितीकरण जैसी व्यवस्था पर फैसला लेती है, तो इसका असर स्वास्थ्य तंत्र पर भी पड़ सकता है। कर्मचारियों का मानना है कि नौकरी की अनिश्चितता समाप्त होने से वे अधिक स्थिरता के साथ अपनी सेवाएं दे सकेंगे। इसके साथ ही भविष्य की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा भी मजबूत होगी।

हालांकि नियमितीकरण का फैसला कई प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं से जुड़ा होता है। कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया, स्वीकृत पद, वित्तीय भार, सेवा नियम और केंद्र तथा राज्य सरकार की नीतियों को भी ध्यान में रखना होगा। यही वजह है कि सरकार पहले आंकड़े जुटाकर सभी पक्षों का अध्ययन करना चाहती है।

एनएचएम निदेशालय की ओर से दस साल से कार्यरत कर्मचारियों की जानकारी मांगना इस दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे यह पता चल सकेगा कि राज्य में कितने कर्मचारी लंबे समय से लगातार सेवाएं दे रहे हैं और उनकी वर्तमान नियुक्ति स्थिति क्या है। विभाग इसी आधार पर आगे प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज सकता है।

एनएचएम कर्मचारियों की मांग केवल नियमितीकरण तक सीमित नहीं रही है। समय-समय पर वे समान कार्य के लिए समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा, सेवा विस्तार, वेतन वृद्धि और भविष्य निधि जैसी सुविधाओं की मांग भी उठाते रहे हैं। लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन उनके अनुभव और सेवाओं पर निर्भर है।

उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आसान नहीं है। कई दुर्गम और पर्वतीय इलाकों में एनएचएम से जुड़े कर्मचारी ही योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सरकार का जोर अनुभवी कर्मचारियों को व्यवस्था से जोड़े रखने पर भी हो सकता है।

फिलहाल सरकार की ओर से अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की गई है। कर्मचारियों का ब्योरा जुटाए जाने के बाद संबंधित विभागों के स्तर पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। इसके बाद वित्त और कार्मिक विभाग की राय भी ली जा सकती है। यदि सभी स्तरों पर सहमति बनती है तो सरकार किसी नीति या विशेष व्यवस्था के तहत लंबे समय से कार्यरत एनएचएम कर्मचारियों को राहत दे सकती है।

सरकार की इस पहल पर अब हजारों कर्मचारियों की निगाहें टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि वर्षों की सेवा को देखते हुए नौकरी की सुरक्षा को लेकर सकारात्मक फैसला लिया जाएगा। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से इस संबंध में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

यदि नियमितीकरण या स्थायी सेवा को लेकर कोई ठोस फैसला होता है तो इसे उत्तराखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र में लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के लिए बड़ा कदम माना जाएगा। फिलहाल दस साल से सेवा दे रहे कर्मचारियों का विवरण मांगे जाने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

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