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MBBS मामले में SIT की जांच तेज
देहरादून: उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए MBBS में दाखिला लेने के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने जांच तेज कर दी है। शनिवार को एसआईटी ने धर्मवीर वर्मा के बेटे मनोज के बयान दर्ज किए। जांच टीम ने परिवार के अन्य सदस्य और प्रमाणपत्रों की जांच से जुड़े पटवारी से भी पूछताछ की है।
मामला NEET-UG 2025 के माध्यम से MBBS में हुए दाखिलों से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता सेनानी आश्रित श्रेणी का लाभ लेने के लिए संदिग्ध प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया। मामले में देहरादून के रायपुर और क्लेमेनटाउन थानों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने 18 सितंबर को मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। जांच में सामने आया कि तृप्ति, स्वाति, खुशी और परी के आवेदनों में धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह के नाम का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिचय पत्र इस्तेमाल किया गया था। जिला प्रशासन की संबंधित पंजिका की जांच में इस नाम का रिकॉर्ड नहीं मिलने के बाद प्रमाणपत्रों की वैधता पर सवाल खड़े हुए। प्रशासन ने चारों प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए और इसके आधार पर एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने संबंधित MBBS दाखिले भी रद्द कर दिए।
अब एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और उन्हें जारी कराने की पूरी प्रक्रिया कैसे हुई। जांच टीम यह भी देख रही है कि प्रमाणपत्रों के लिए जरूरी दस्तावेज किसने उपलब्ध कराए और विभिन्न स्तरों पर उनका सत्यापन किस तरह किया गया। राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
शनिवार को एसआईटी ने एसडीएम सदर कार्यालय में करीब तीन घंटे तक दस्तावेजों की पड़ताल की। प्रमाणपत्र जारी करने से संबंधित फाइलों और राजस्व अभिलेखों की जांच के साथ कई दस्तावेज कब्जे में लिए गए। तत्कालीन जांचकर्ता पटवारी के बयान भी दर्ज किए गए हैं। धर्मवीर वर्मा के परिवार से पूछताछ को जांच की अहम कड़ी माना जा रहा है। एसआईटी ने उनके पुत्र और पौत्र के बयान दर्ज कर यह जानने का प्रयास किया है कि आरोपित अभ्यर्थियों का उनके परिवार से कोई वास्तविक संबंध है या नहीं। इन बयानों का मिलान प्रमाणपत्रों में दी गई वंशावली और दूसरे दस्तावेजों से किया जाएगा।
इस मामले के बाद उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे सहित MBBS प्रवेश में इस्तेमाल किए गए अन्य प्रमाणपत्रों की जांच का दायरा भी बढ़ा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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