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ड्राइविंग लाइसेंस नियमों में बदलाव स्कूटी के लिए अलग श्रेणी जरूरी
देहरादून: उत्तराखंड में दोपहिया वाहन चलाने वालों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ा अहम बदलाव सामने आया है। अब केवल गियर वाली मोटरसाइकिल की श्रेणी वाले लाइसेंस के आधार पर बिना गियर वाला दोपहिया वाहन यानी स्कूटी चलाना मान्य नहीं होगा। स्कूटी चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस में संबंधित वाहन श्रेणी का उल्लेख होना जरूरी होगा। नियम का उल्लंघन करते पकड़े जाने पर वाहन चालक के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है।
नई व्यवस्था के अनुसार जिन वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस में केवल गियर वाली मोटरसाइकिल की श्रेणी दर्ज है, उन्हें बिना गियर वाले दोपहिया वाहन की श्रेणी भी जुड़वानी होगी। यानी लाइसेंस में वाहन की सही श्रेणी दर्ज होना जरूरी होगा। ड्राइविंग लाइसेंस किसी भी वाहन को चलाने की सामान्य अनुमति नहीं है, बल्कि इसमें अधिकृत वाहन वर्ग दर्ज होते हैं। आमतौर पर MCWG का अर्थ Motorcycle With Gear और MCWOG का अर्थ Motorcycle Without Gear होता है। बिना गियर वाली मोटरसाइकिल या स्कूटर के लिए MCWOG श्रेणी का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में उत्तराखंड में वाहन चालकों को अपने लाइसेंस पर दर्ज श्रेणी की जांच करना जरूरी हो गया है। यह बदलाव जन विश्वास से जुड़े कानूनी संशोधनों के लागू होने के बाद सामने आया है। नए प्रावधानों में मोटर वाहन कानून के तहत कुछ दंडात्मक व्यवस्थाओं को सरल करने के साथ आर्थिक दंड में बदलाव किया गया है। लाइसेंस के मामले में वाहन की प्रत्येक संबंधित श्रेणी का स्पष्ट उल्लेख महत्वपूर्ण हो गया है। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ सकता है जहां घर में बाइक और स्कूटी दोनों हैं, लेकिन वाहन चालक के लाइसेंस में केवल एक श्रेणी दर्ज है। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति के लाइसेंस पर केवल गियर वाली मोटरसाइकिल की अनुमति है और वह बिना गियर वाली स्कूटी चलाता है, तो उसे अपने ड्राइविंग लाइसेंस में आवश्यक श्रेणी जुड़वानी होगी।
पूरे उत्तराखंड में कहीं से बनवा सकेंगे लाइसेंस
नए बदलाव में वाहन चालकों को एक सुविधा भी मिली है। अब उत्तराखंड का निवासी प्रदेश के किसी भी आरटीओ कार्यालय से ड्राइविंग लाइसेंस बनवा सकेगा। इसके लिए उसी जिले या संभाग के आरटीओ तक सीमित रहने की जरूरत नहीं होगी। इसी तरह वाहन पंजीकरण को लेकर भी क्षेत्रीय सीमा में बदलाव किया गया है। पहले सामान्य तौर पर वाहन का पंजीकरण उस संभाग या उपसंभाग में कराया जाता था जहां वाहन मालिक रहता था। नए प्रावधान के तहत प्रदेश के भीतर दूसरे स्थान से भी वाहन पंजीकरण कराने का रास्ता खुल गया है। इससे खासकर नौकरी या पढ़ाई के कारण अपने गृह जिले से अलग शहर में रहने वाले लोगों को सुविधा मिल सकती है।
एक्सपायर लाइसेंस को लेकर भी अहम नियम
ड्राइविंग लाइसेंस की समय सीमा समाप्त होने से जुड़े नियम में भी राहत का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक लाइसेंस की वैधता समाप्त होने के बाद 30 दिन की अवधि महत्वपूर्ण होगी और लाइसेंस धारक को इसी दौरान नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
बिना बीमा वाहन चलाना पड़ेगा महंगा
वाहन बीमा को लेकर भी आर्थिक दंड सख्त किया गया है। बिना वैध बीमा के वाहन चलाते हुए पहली बार पकड़े जाने पर बेस इंश्योरेंस प्रीमियम का तीन गुना या 5,000 रुपये, इनमें जो अधिक होगा, वह वसूला जा सकता है। अगर कोई वाहन चालक दूसरी बार बिना बीमा वाले वाहन के साथ पकड़ा जाता है तो आर्थिक दंड और बढ़ जाएगा। ऐसे मामले में बेस इंश्योरेंस प्रीमियम का पांच गुना या 10,000 रुपये, जो भी अधिक हो, वसूले जाने का प्रावधान बताया गया है। वहीं बिना बीमा वाहन चलाने पर जेल की सजा वाले प्रावधान को हटाया गया है।
इन बदलावों के बाद उत्तराखंड में बाइक और स्कूटी चलाने वालों के लिए अपने ड्राइविंग लाइसेंस की वाहन श्रेणी जांचना महत्वपूर्ण हो गया है। खासकर जिन लोगों के पास केवल गियर वाली मोटरसाइकिल का लाइसेंस है और वे नियमित रूप से स्कूटी भी चलाते हैं, उन्हें लाइसेंस में उचित श्रेणी जुड़वाने की जरूरत पड़ सकती है। किसी कार्रवाई से बचने के लिए वाहन चालकों को लाइसेंस पर दर्ज वाहन वर्ग, बीमा की वैधता, आरसी और अन्य जरूरी दस्तावेज अपडेट रखने चाहिए। ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी सेवाओं और आवेदन की जानकारी केंद्र सरकार के Parivahan Sewa पोर्टल पर भी उपलब्ध है।
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