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हरिद्वार में बनेगा पहला डॉग पाउंड, आक्रामक कुत्तों को मिलेगा जीवनभर का ठिकाना
Dehradun: उत्तराखंड में बढ़ते आवारा और आक्रामक कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए हरिद्वार में राज्य का पहला डॉग पाउंड स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य उन कुत्तों को सुरक्षित रूप से अलग रखना है, जिन्हें आक्रामक व्यवहार, बार-बार लोगों पर हमला करने या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना गया है। राज्य में इस तरह की यह पहली स्थायी सुविधा होगी।
नगर निकाय और संबंधित विभागों का मानना है कि इस पहल से एक ओर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी ओर आक्रामक कुत्तों के साथ मानवीय व्यवहार भी किया जा सकेगा। इन्हें बिना वजह नुकसान पहुंचाने के बजाय एक सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में रखा जाएगा।
क्यों पड़ी डॉग पाउंड की जरूरत?
पिछले कुछ वर्षों में हरिद्वार समेत उत्तराखंड के कई शहरों में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सुबह-शाम टहलने वाले लोगों पर हमले चिंता का विषय बने हुए हैं।
लगातार मिल रही शिकायतों और बढ़ते डॉग बाइट मामलों को देखते हुए प्रशासन ने ऐसे आक्रामक कुत्तों के लिए अलग व्यवस्था बनाने का निर्णय लिया है, ताकि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
प्रस्तावित डॉग पाउंड में उन कुत्तों को रखा जाएगा, जिन्हें विशेषज्ञों द्वारा अत्यधिक आक्रामक या बार-बार हमला करने वाला पाया जाएगा। ऐसे कुत्तों को दोबारा खुले में नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उनकी देखभाल, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था इसी केंद्र में की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य पशुओं के प्रति क्रूरता नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाना है।
आधुनिक सुविधाओं से होगा लैस
डॉग पाउंड में कुत्तों के रहने के लिए अलग-अलग बाड़े, नियमित भोजन, स्वच्छ पेयजल, पशु चिकित्सकीय देखभाल और निगरानी की व्यवस्था होगी। बीमार या घायल कुत्तों के इलाज के लिए भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके अलावा प्रशिक्षित पशु चिकित्सक और देखभाल करने वाला स्टाफ भी तैनात किया जाएगा, ताकि पशुओं की नियमित निगरानी की जा सके।
नसबंदी और टीकाकरण अभियान भी जारी रहेगा
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डॉग पाउंड केवल आक्रामक कुत्तों के लिए होगा। सामान्य आवारा कुत्तों के लिए नसबंदी (ABC कार्यक्रम) और एंटी-रेबीज टीकाकरण अभियान पहले की तरह जारी रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी, टीकाकरण और कचरा प्रबंधन जैसे उपाय लंबे समय में अधिक प्रभावी साबित होते हैं।
लोगों को मिलेगी राहत
स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉग पाउंड बनने से उन इलाकों में राहत मिलेगी, जहां आक्रामक कुत्तों के कारण लोगों में डर का माहौल रहता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा भी बेहतर होगी।
पशु कल्याण और सुरक्षा का संतुलन
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आक्रामक कुत्ते को स्थायी रूप से अलग रखने का निर्णय पशु चिकित्सकों और संबंधित अधिकारियों के मूल्यांकन के आधार पर होना चाहिए। साथ ही, पशु क्रूरता निवारण और पशु कल्याण से जुड़े नियमों का पालन भी आवश्यक होगा।
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