उत्तराखंड

Garhwal केंद्रीय विश्वविद्यालय में नई पहल, स्वामी मन्मथन का जीवन अब पाठ्यक्रम का हिस्सा

Kavita2
19 Jun 2026 11:49 AM IST
Garhwal केंद्रीय विश्वविद्यालय में नई पहल, स्वामी मन्मथन का जीवन अब पाठ्यक्रम का हिस्सा
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Uttarakhand उत्तखण्ड : हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय अब उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और जनआंदोलनों को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को क्षेत्रीय इतिहास, सामाजिक आंदोलन और समाजसेवा से जुड़े व्यक्तित्वों के योगदान के बारे में अधिक गहराई से समझ देना है।

विश्वविद्यालय ने पहले चरण में समाज के प्रति समर्पित स्वामी मन्मथन के जीवन और उनके योगदान को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। यह बदलाव आगामी जुलाई से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा, जिसमें छात्रों को उनके विचारों, कार्यों और सामाजिक योगदान का अध्ययन कराया जाएगा।

इस पहल के तहत विद्यार्थियों को न केवल स्वामी मन्मथन के जीवन से जुड़ी घटनाओं की जानकारी दी जाएगी, बल्कि यह भी समझाया जाएगा कि उन्होंने समाज और सांस्कृतिक चेतना के क्षेत्र में किस तरह योगदान दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस तरह की पढ़ाई से छात्रों में सामाजिक जिम्मेदारी और क्षेत्रीय पहचान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

विश्वविद्यालय अधिकारियों के अनुसार, यह कदम नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप भी है, जिसमें स्थानीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को शिक्षा का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि छात्र अपनी जड़ों से जुड़े रहें और क्षेत्रीय विरासत को समझ सकें।

शैक्षणिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के पाठ्यक्रम छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन के उदाहरणों से जोड़ते हैं। इससे विद्यार्थियों में समाज के प्रति संवेदनशीलता और प्रेरणा दोनों बढ़ती है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले समय में उत्तराखंड के अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनआंदोलन नेताओं और सांस्कृतिक व्यक्तित्वों के जीवन को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।

छात्रों और शिक्षकों के बीच भी इस निर्णय को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोगों का मानना है कि इससे छात्रों को अपने राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को समझने में मदद मिलेगी।

स्वामी मन्मथन को समाज सेवा और आध्यात्मिक चेतना के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उनके जीवन और कार्यों को पाठ्यक्रम में शामिल करना विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल मानी जा रही है।

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन पाठ्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर रहा है, ताकि इसे नए सत्र से प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।

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