
जनता से रिश्ता वेबडेस्क : उत्तराखंड के सुविधा संपन्न शहरों में 4.5 प्रतिशत नवजात मृत्यु दर बढ़ी है। पिछले पांच सालों के दौरान शहरी क्षेत्र में 36.2 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 30.6 प्रतिशत नवजात की मौत हुई। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (एनएफएचएस-5) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। हालांकि राहत की खबर यह है कि शिशु मृत्यु दर में 0.6 प्रतिशत की कमी भी आई है।जच्चा-बच्चा सुरक्षित रहें, इसको लेकर सरकार प्रदेश में तमाम योजनाएं चला रही है। प्रसव से पहले घर से लाने व घर तक छोडऩे के लिए 108 व खुशियों की सवारी जैसी सेवाएं हैं।
इसके बावजूद नवजात मृत्यु दर के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। हैरानी की बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नवजात मृत्यु दर कम है।शहरी क्षेत्र में यह आंकड़ा बड़ा है। सवाल यह उठता है कि शहरी क्षेत्र में तरह-तरह की सुविधाएं होने के बाद नवजात की मौत का आखिर जिम्मेदार कौन है? बात अगर पहाड़ की करें तो वहां की महिलाएं प्रसव के लिए डोली में बैठकर कई किलोमीटर पैदल चलकर सुरक्षित प्रसव करा रही हैं।





