उत्तराखंड

नीट-यूजी रिजल्ट: 141 नंबर बढ़े तो बदली रैंक, देहरादून की आशी ने दूसरे अटेम्प्ट में किया कमाल

nidhi
18 July 2026 8:39 AM IST
नीट-यूजी रिजल्ट: 141 नंबर बढ़े तो बदली रैंक, देहरादून की आशी ने दूसरे अटेम्प्ट में किया कमाल
x
देहरादून की आशी की सफलता उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

Uttarakhand: प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत, सही रणनीति और आत्मविश्वास से भी मिलती है। इसका ताजा उदाहरण उत्तराखंड के देहरादून की छात्रा आशी हैं, जिन्होंने NEET-UG के दूसरे प्रयास में अपने अंक 141 तक बढ़ाकर शानदार रैंक हासिल की। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल परिवार और शिक्षकों को गर्व का अवसर दिया, बल्कि हजारों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई।

आशी की कहानी यह साबित करती है कि यदि पहली कोशिश में मनचाहा परिणाम नहीं मिले, तो सही दिशा में की गई मेहनत अगली बार सफलता की नई इबारत लिख सकती है।
पहले प्रयास से मिली सीख, दूसरे प्रयास में मिली सफलता
आशी ने पहले प्रयास में परीक्षा तो दी, लेकिन उन्हें अपनी अपेक्षा के अनुरूप अंक और रैंक नहीं मिली। उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी का गहराई से विश्लेषण किया।
उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि—
किन विषयों में अंक कम आए।
कौन-सी गलतियां बार-बार हो रही थीं।
समय प्रबंधन में क्या सुधार जरूरी था।
किन टॉपिक्स पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता थी।
इसी आत्मविश्लेषण ने उनकी दूसरी तैयारी की मजबूत नींव रखी।
141 अंकों की बढ़त ने बदल दी तस्वीर
दूसरे प्रयास में आशी ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी। नियमित अभ्यास, मॉक टेस्ट और कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान देने का परिणाम यह रहा कि उनके 141 अंक बढ़ गए।
इतने बड़े सुधार का सीधा असर उनकी ऑल इंडिया रैंक पर पड़ा और उन्हें पहले की तुलना में कहीं बेहतर स्थान प्राप्त हुआ। यह बदलाव दर्शाता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में छोटे-छोटे सुधार भी बड़े परिणाम ला सकते हैं।
सफलता के पीछे रही सुनियोजित रणनीति
आशी ने अपनी तैयारी को कई चरणों में विभाजित किया।
1. एनसीईआरटी पर मजबूत पकड़
उन्होंने जीवविज्ञान, रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान की NCERT पुस्तकों को कई बार पढ़ा और हर महत्वपूर्ण अवधारणा को अच्छी तरह समझा।
2. नियमित मॉक टेस्ट
उन्होंने निर्धारित समय में नियमित मॉक टेस्ट दिए, जिससे परीक्षा का माहौल समझने और समय प्रबंधन सुधारने में मदद मिली।
3. गलतियों का विश्लेषण
हर टेस्ट के बाद केवल अंक देखने के बजाय उन्होंने अपनी गलतियों की सूची बनाई और उन्हें दोहराने से बचने का प्रयास किया।
4. सीमित लेकिन गुणवत्तापूर्ण अध्ययन
उन्होंने बहुत अधिक पुस्तकों के बजाय चुनिंदा और विश्वसनीय अध्ययन सामग्री पर ध्यान केंद्रित किया।
समय प्रबंधन बना सफलता की कुंजी
NEET जैसी परीक्षा में समय का सही उपयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है। आशी ने अपनी दैनिक दिनचर्या को अनुशासित बनाया।
उनकी तैयारी में शामिल था—
तय समय पर पढ़ाई।
नियमित रिवीजन।
विषयवार अभ्यास।
पर्याप्त नींद।
मानसिक तनाव को नियंत्रित रखना।
इस संतुलित दिनचर्या ने उनकी तैयारी को अधिक प्रभावी बनाया।
परिवार और शिक्षकों का मिला पूरा सहयोग
आशी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को भी दिया। परिवार ने उन्हें लगातार प्रोत्साहित किया, जबकि शिक्षकों ने कठिन विषयों को समझने और रणनीति बनाने में मदद की।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सकारात्मक माहौल और भावनात्मक सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पहली असफलता अंत नहीं होती
आशी की सफलता यह संदेश देती है कि पहली बार मनचाहा परिणाम न मिलने का अर्थ यह नहीं कि लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
कई सफल डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी दूसरे या तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त कर चुके हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि हर प्रयास से सीख लेकर अगले प्रयास को बेहतर बनाया जाए।
NEET अभ्यर्थियों के लिए आशी की सीख
आशी की तैयारी से कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं—
अपनी कमजोरियों को पहचानें।
नियमित अभ्यास करें।
मॉक टेस्ट को गंभीरता से लें।
NCERT को प्राथमिकता दें।
सोशल मीडिया और अनावश्यक ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूरी रखें।
आत्मविश्वास बनाए रखें।
हार न मानें।
प्रतियोगी परीक्षाओं में धैर्य का महत्व
NEET जैसी परीक्षाओं में लाखों छात्र शामिल होते हैं, जबकि मेडिकल सीटों की संख्या सीमित होती है। ऐसे में सफलता के लिए धैर्य, अनुशासन और निरंतर प्रयास बेहद आवश्यक हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की तैयारी केवल ज्ञान का नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का भी परीक्षण होती है।
शिक्षा विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई छात्र पहले प्रयास में सफल नहीं होता है, तो उसे अपनी तैयारी का निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाहिए। सही मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास के साथ अगले प्रयास में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।

Next Story