उत्तराखंड

Nainital: खुदकुशी से मचा बवाल, पुलिस चौकी पर हंगामा, विधायक भी पहुंचे

Admindelhi1
28 Jun 2025 6:38 PM IST
Nainital: खुदकुशी से मचा बवाल, पुलिस चौकी पर हंगामा, विधायक भी पहुंचे
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नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के कालाढूंगी थाना क्षेत्र से एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां बीजेपी नेता विशन नागरकोटी के बेटे कमल नागरकोटी की संदिग्ध हालात में मौत ने पूरे इलाके को हिला दिया है। परिवार वालों का आरोप है कि कोटाबाग पुलिस चौकी में तैनात एक सिपाही ने चेकिंग के दौरान कमल को थप्पड़ मार दिया था, जिससे आहत होकर उसने खुदकुशी कर ली।

इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने कोटाबाग पुलिस चौकी के सामने जोरदार प्रदर्शन किया और दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत भी घटनास्थल पर पहुंचे और अधिकारियों से बातचीत की।

क्या है पूरा मामला?

घटना शुक्रवार 27 जून की देर शाम की बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार, कमल नागरकोटी बाइक से कहीं जा रहा था। उसी दौरान कोटाबाग पुलिस चौकी क्षेत्र में पुलिस द्वारा चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था।

जब पुलिस ने कमल को रोका, तो सिपाही से किसी बात पर उसका विवाद हो गया। परिजनों का आरोप है कि विवाद के दौरान एक सिपाही ने कमल को थप्पड़ मार दिया। यह अपमान उसे बर्दाश्त नहीं हुआ और वह घर लौटकर मानसिक रूप से टूट गया। कुछ ही देर बाद उसकी खुदकुशी की खबर सामने आई।

थप्पड़ के बाद खुदकुशी, क्या था कारण?

परिजनों ने बताया कि कमल बेहद संवेदनशील और आत्मसम्मानी युवक था। जब वह घर लौटा, तो काफी परेशान और भावुक था। उसने किसी से कोई बात नहीं की और सीधे अपने कमरे में चला गया। थोड़ी देर बाद जब वह बाहर नहीं आया, तो परिजन उसे देखने गए, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

सूत्रों के अनुसार, कमल ने फांसी लगाकर जान दी, हालांकि पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मौत की सूचना मिलते ही इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।

पुलिस चौकी के सामने बवाल

कमल की मौत की खबर फैलते ही कोटाबाग पुलिस चौकी के सामने परिजनों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जुट गई। सभी लोग दोषी सिपाही की गिरफ्तारी और मौत की न्यायिक जांच की मांग करने लगे। प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा।

परिजनों ने कहा, “हमारे बेटे की मौत का जिम्मेदार वह सिपाही है जिसने उसे थप्पड़ मारा। यदि पुलिस ने सम्मानपूर्वक व्यवहार किया होता, तो आज वह जिंदा होता।”

मौके पर पहुंचे विधायक बंशीधर भगत

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक बंशीधर भगत मौके पर पहुंचे और मृतक के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने जनता को शांत करते हुए कहा, “यह बहुत ही दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। मैं स्वयं इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराऊंगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

उन्होंने अधिकारियों से बातचीत कर सिपाही को तत्काल निलंबित करने और मजिस्ट्रेटी जांच शुरू कराने की मांग की।

पुलिस का पक्ष

नैनीताल पुलिस ने मामले में फिलहाल कोई सीधी टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, संबंधित सिपाही को लाइन हाजिर कर दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का कहना है कि, “मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों की तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

खुदकुशी या कुछ और? उठ रहे सवाल

कमल नागरकोटी की मौत को लेकर कई तरह के सवाल और अटकलें लगाई जा रही हैं। क्या यह केवल थप्पड़ की वजह से आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई और कारण भी छिपा है?

कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि युवक मानसिक रूप से पहले से परेशान था, जबकि अन्य लोगों का साफ कहना है कि पुलिस के अपमानजनक बर्ताव ने उसे तोड़ दिया।

इन सवालों का जवाब तभी मिलेगा जब पुलिस पारदर्शी और निष्पक्ष जांच करेगी।

कमल नागरकोटी कौन था?

कमल नागरकोटी एक युवा, पढ़ा-लिखा और मिलनसार युवक था। वह बीजेपी नेता विशन नागरकोटी का बेटा था और कई सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहता था। कमल को इलाके के लोग अच्छे व्यवहार और शालीनता के लिए जानते थे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कमल का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, और वह पूरी तरह से सामाजिक जीवन में सक्रिय था। ऐसे व्यक्ति का इस तरह अचानक चला जाना पूरे क्षेत्र के लिए एक भावनात्मक आघात है।

परिजनों की मांग

कमल के परिजनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्हें केवल सांत्वना नहीं, न्याय चाहिए। वे चाहते हैं कि आरोपी सिपाही को गिरफ्तार किया जाए, न कि सिर्फ लाइन हाजिर किया जाए।

इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच हो और भविष्य में पुलिस की कार्यशैली में सुधार लाया जाए।

निष्कर्ष

कमल नागरकोटी की मौत ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पुलिस व्यवस्था आम नागरिकों के प्रति संवेदनशील है? क्या एक थप्पड़ किसी की जान ले सकता है, या क्या हमारे सिस्टम में जवाबदेही की कमी है?

इस घटना का असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सत्ता, प्रशासन और समाज को यह सोचने पर मजबूर करेगा कि क्या वाकई हम एक सम्मानजनक और सुरक्षित समाज की ओर बढ़ रहे हैं।

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