उत्तराखंड

नैनीताल हाईकोर्ट ने विधानसभा के बर्खास्त कर्मियों को दिया बड़ा झटका

Admin Delhi 1
24 Nov 2022 1:54 PM GMT
नैनीताल हाईकोर्ट ने विधानसभा के बर्खास्त कर्मियों को दिया बड़ा झटका
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देवभूमि नैनीताल न्यूज़: हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने विधानसभा से बर्खास्त किए गए कर्मचारियों को बहाल किए जाने वाले एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। युगलपीठ ने उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष द्वारा पारित आदेश को सही ठहराया है। विधानसभा सचिवालय से बर्खास्त कर्मचारियों को एकलपीठ द्वारा बहाल किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली विस सचिवालय द्वारा दायर विशेष अपीलों पर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में खंडपीठ ने गुरुवार को सुनवाई की। युगलपीठ ने कहा कि, बर्खास्तगी के आदेश को स्टे नहीं किया जा सकता है। सचिवालय की तरफ से कहा गया कि इन कर्मियों की नियुक्ति कामचलाऊ व्यवस्था के लिए की गई थी। शर्तों के मुताबिक बिना किसी कारण और नोटिस के इनकी सेवाएं कभी भी समाप्त की जा सकती हैं। इनकी नियुक्तियां विधानसभा सेवा नियमावली के विरुद्ध जाकर की गई हैं।

उधर, कर्मचारियों की ओर से कहा गया कि उनको बर्खास्त करते समय विस अध्यक्ष द्वारा संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन किया गया। विस अध्यक्ष द्वारा वर्ष 2016 से वर्ष 2021 तक के कर्मियों को ही बर्खास्त किया गया जबकि ऐसी ही नियुक्तियां सचिवालय में वर्ष 2000 से वर्ष 2015 के बीच में भी हुईं, जिन्हें नियमित भी किया जा चुका है। यह नियम तो सभी पर एकसमान लागू होना था, उन्हीं को बर्खास्त क्यों किया गया। उमा देवी बनाम कर्नाटक राज्य का निर्णय उन पर लागू नहीं होता क्योंकि यह वहां लागू होता है, जहां पद खाली नहीं हों और बैकडोर नियुक्तियां की गईं हों। यहां पद खाली थे, तभी नियुक्तियां हुईं।

याचिका में यह कहा: याचिका में अपनी बर्खास्तगी के आदेश को बबीता भंडारी, भूपेंद्र सिंह बिष्ट व कुलदीप सिंह सहित 102 अन्य ने चुनौती देते कहा था कि विस अध्यक्ष द्वारा लोकहित को देखते हुए उनकी सेवाएं 27, 28 व 29 सितंबर 2022 को समाप्त कर दी गईं। उन्हें किस आधार पर, किस कारण से हटाया गया, बर्खास्तगी आदेश में कहीं इसका उल्लेख नहीं किया गया और न ही उन्हें सुना गया जबकि उनके द्वारा सचिवालय में नियमित कर्मचारियों की भांति कार्य किया गया। यह आदेश विधि विरुद्ध है। विस सचिवालय में 396 पदों पर बैकडोर नियुक्तियां वर्ष 2002 से वर्ष 2015 के बीच में भी हुईं, जो नियमित हो चुकी हैं, परंतु उन्हें किस आधार पर बर्खास्त किया गया।

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