उत्तराखंड

बेटे को जिताने के लिए मां ने लिया एमए में दाखिला, खुद दिया वोट, अध्यक्ष पद पर बड़ी जीत

Kavita2
30 Sept 2026 9:33 AM IST
बेटे को जिताने के लिए मां ने लिया एमए में दाखिला, खुद दिया वोट, अध्यक्ष पद पर बड़ी जीत
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नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल स्थित डीएसबी परिसर के छात्रसंघ चुनाव में एक अनोखा और दिलचस्प मामला सामने आया है। यहां एक मां ने अपने बेटे के चुनाव प्रचार में साथ देने के लिए न केवल एमए में दाखिला लिया, बल्कि छात्र मतदाता के रूप में अपने बेटे को वोट भी दिया। चुनाव परिणाम आने के बाद बेटे ने अध्यक्ष पद पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इस घटना की चर्चा अब कॉलेज परिसर के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में हो रही है।

डीएसबी परिसर में छात्रसंघ चुनाव को लेकर पिछले कई दिनों से माहौल गर्म था। अलग-अलग पदों पर प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार में जुटे हुए थे। इसी बीच अध्यक्ष पद के एक उम्मीदवार की मां भी लगातार चर्चा में बनी रहीं। बेटे को चुनाव में समर्थन देने के लिए उन्होंने कॉलेज में एमए में प्रवेश लिया और छात्र के रूप में नाम दर्ज कराया।

मां का यह फैसला सामान्य छात्रसंघ चुनाव से अलग इसलिए भी रहा क्योंकि उन्होंने केवल बेटे के चुनाव प्रचार में बाहर से समर्थन नहीं दिया, बल्कि खुद कॉलेज की छात्रा बनकर चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा बनीं। प्रवेश लेने के बाद उन्हें छात्र मतदाता के रूप में मतदान का अधिकार मिला और चुनाव के दिन उन्होंने अपने बेटे के पक्ष में वोट किया।

छात्रसंघ चुनाव में उम्मीदवार के परिवार के लोग आमतौर पर प्रचार, संपर्क और समर्थन जुटाने में भूमिका निभाते हैं, लेकिन किसी मां का खुद कॉलेज में दाखिला लेकर मतदाता बन जाना बेहद अलग मामला माना जा रहा है। यही वजह है कि मतदान से लेकर नतीजे घोषित होने तक इस घटनाक्रम को लेकर छात्रों के बीच काफी चर्चा रही।

बेटे के चुनाव प्रचार के दौरान मां ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। कॉलेज परिसर में छात्रों से संपर्क करने और बेटे के पक्ष में समर्थन जुटाने में उनका योगदान रहा। उनकी मौजूदगी ने छात्र चुनाव में पारिवारिक समर्थन की एक अलग तस्वीर पेश की। छात्र भी इस बात को लेकर उत्सुक रहे कि एक मां अपने बेटे के लिए किस तरह चुनावी प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल हो गई।

मतदान के दिन मां ने अन्य छात्रों की तरह अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। उन्होंने अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ रहे अपने बेटे को वोट दिया। इसके बाद मतगणना शुरू हुई और परिणाम सामने आने पर बेटे ने बड़े अंतर से अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। जीत के बाद समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।

इस जीत के साथ ही मां के एमए में प्रवेश लेने और बेटे को वोट देने की कहानी पूरे परिसर में चर्चा का विषय बन गई। छात्रों के बीच इसे छात्रसंघ चुनाव के सबसे दिलचस्प प्रसंगों में से एक माना जा रहा है। चुनाव में जहां प्रत्याशी अपनी रणनीति, प्रचार और छात्र समर्थन के भरोसे मैदान में उतरते हैं, वहीं इस मामले में पारिवारिक सहयोग ने अलग ही उदाहरण पेश किया।

डीएसबी परिसर के छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद की जीत इसलिए भी खास बन गई क्योंकि इसके पीछे मां-बेटे की यह कहानी जुड़ गई। मां ने बेटे की राजनीतिक शुरुआत या छात्र नेतृत्व के सफर में केवल भावनात्मक समर्थन तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि छात्रा के रूप में चुनाव का हिस्सा बनकर उसे अपना वोट भी दिया।

कॉलेज में एमए में दाखिला लेना अपने आप में मां के लिए शिक्षा से जुड़ने का अवसर भी बन गया। एक तरफ उन्होंने उच्च शिक्षा में प्रवेश लिया, वहीं दूसरी ओर बेटे के छात्रसंघ चुनाव में प्रत्यक्ष तौर पर भागीदारी भी की। इस वजह से यह मामला शिक्षा और पारिवारिक समर्थन दोनों दृष्टि से चर्चा में रहा।

छात्रसंघ चुनाव कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्र नेतृत्व विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम माने जाते हैं। इनमें छात्र अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं और विभिन्न समस्याओं तथा मांगों को उठाने के लिए नेतृत्व चुनते हैं। डीएसबी परिसर में हुए चुनाव में भी छात्रों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और अपने पसंदीदा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया।

अध्यक्ष पद पर बड़े अंतर से जीत दर्ज करने वाले छात्र के लिए यह चुनाव राजनीतिक और छात्र जीवन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जीत के बाद अब उनके सामने कॉलेज के छात्रों की समस्याओं को उठाने और छात्रसंघ की जिम्मेदारियां निभाने की चुनौती होगी। वहीं उनकी मां का यह कदम चुनाव से जुड़ी यादगार घटनाओं में शामिल हो गया है।

कॉलेज परिसर में परिणाम आने के बाद समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया। इस दौरान मां की भूमिका को लेकर भी चर्चा होती रही। कई छात्रों ने इस पूरे घटनाक्रम को असामान्य लेकिन दिलचस्प बताया। बेटे के प्रचार में मां की सक्रिय भागीदारी ने चुनावी माहौल में एक अलग रंग भर दिया था।

इस घटना ने यह भी दिखाया कि छात्रसंघ चुनावों में परिवार का समर्थन किस हद तक महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि यहां मामला सामान्य समर्थन से आगे बढ़ गया, क्योंकि मां ने खुद विद्यार्थी बनकर चुनाव में मतदान किया। इससे चुनाव के दौरान उनकी भूमिका केवल समर्थक की नहीं, बल्कि मतदाता की भी रही।

नैनीताल के डीएसबी परिसर का यह छात्रसंघ चुनाव अब केवल अध्यक्ष पद पर हुई जीत की वजह से नहीं, बल्कि मां के इस अनूठे कदम के कारण भी याद रखा जाएगा। बेटे के लिए एमए में दाखिला लेने, चुनाव प्रचार में साथ देने और फिर वोट डालने की यह कहानी छात्रसंघ चुनाव की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो गई है।

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