उत्तराखंड

उत्तराखंड में फिर सक्रिय हुआ मॉनसून, 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

Kavita2
5 Aug 2026 9:34 AM IST
उत्तराखंड में फिर सक्रिय हुआ मॉनसून, 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
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देहरादून। उत्तराखंड में एक बार फिर मॉनसून ने रफ्तार पकड़ ली है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश का दौर शुरू हो गया है और मौसम विभाग ने बुधवार को देहरादून समेत 10 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। राजधानी देहरादून में सुबह से ही रुक-रुककर तेज बारिश हो रही है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। वहीं, बारिश के बीच जिला प्रशासन ने रिस्पना नदी के बाढ़ क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए बड़ा ऐलान करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि मॉनसून समाप्त होने के बाद अतिक्रमण हटाने का व्यापक अभियान शुरू किया जाएगा। इसके लिए अब तक घर खाली नहीं करने वालों को अंतिम चेतावनी नोटिस जारी कर दिया गया है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के कई जिलों में अगले कुछ समय तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में भारी वर्षा के कारण भूस्खलन, चट्टान गिरने और सड़कें बाधित होने का खतरा बना हुआ है, जबकि मैदानी इलाकों में जलभराव और नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

देहरादून में सुबह से हो रही बारिश के कारण कई निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति देखने को मिली। प्रमुख सड़कों पर यातायात भी प्रभावित हुआ। नगर निगम और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें जल निकासी की व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी प्रकार की बड़ी समस्या उत्पन्न न हो।

बारिश के बीच जिला प्रशासन ने रिस्पना नदी के बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों ने बताया कि नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों को हटाने के लिए मॉनसून समाप्त होते ही विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में जिन लोगों ने अब तक अपने मकान या निर्माण नहीं हटाए हैं, उन्हें अंतिम चेतावनी नोटिस जारी किया गया है।

प्रशासन का कहना है कि रिस्पना नदी के बाढ़ क्षेत्र में हुए अतिक्रमण के कारण बरसात के दौरान जल निकासी प्रभावित होती है और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा पर्यावरणीय संतुलन और नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए बाढ़ क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने की योजना बनाई गई है।

अधिकारियों के अनुसार, अंतिम नोटिस के बाद भी यदि लोग स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाते हैं, तो मॉनसून के बाद प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माणों को हटाया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक संसाधनों की भी व्यवस्था की जाएगी।

प्रशासन ने प्रभावित लोगों से अपील की है कि वे स्वेच्छा से निर्धारित समय के भीतर अपने निर्माण हटा लें, ताकि बाद में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। अधिकारियों का कहना है कि अभियान पूरी तरह कानून के दायरे में और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चलाया जाएगा।

उधर, भारी बारिश की आशंका को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन तंत्र को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील जिलों में राहत एवं बचाव दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्थानीय प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक इंतजाम करने को कहा गया है।

पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने और मौसम की ताजा जानकारी के आधार पर ही यात्रा करने की अपील की गई है। वहीं, नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को भी जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान नदियों के बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण गंभीर जोखिम पैदा करता है। प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित होने से अचानक जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में नदी तटों को अतिक्रमण मुक्त करना दीर्घकालिक दृष्टि से आवश्यक कदम माना जा रहा है।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बारिश के दौरान शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न विभागों की संयुक्त टीमें लगातार सक्रिय हैं। जल निकासी व्यवस्था की निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल उत्तराखंड में मॉनसून के दोबारा सक्रिय होने से लोगों को अगले कुछ दिनों तक मौसम की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। एक ओर प्रशासन भारी बारिश से संभावित जोखिमों से निपटने की तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर रिस्पना नदी के बाढ़ क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और शहर के संतुलित विकास को ध्यान में रखते हुए यह अभियान हर हाल में पूरा किया जाएगा।

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