
देहरादून। पार्षद अमिता सिंह के घर हुई लूट के मामले में पुलिस ने नेपाली गैंग से जुड़े एक और आरोपित को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान दिल्ली निवासी दिनेश कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, लूट की घटना के बाद पार्षद के घर काम करने वाले नौकर भरत थापा समेत अन्य आरोपितों को मौके से सुरक्षित निकालने और आगे तक पहुंचाने में दिनेश की भूमिका सामने आई है।
पुलिस का कहना है कि दिनेश कुमार दिल्ली में टैक्सी चलाने का काम करता है, लेकिन टैक्सी चलाने की आड़ में वह नेपाली मूल के अपने अन्य साथियों के संपर्क में रहता था और आपराधिक घटनाओं में उनका सहयोग करता था। जांच में सामने आया कि पार्षद के घर लूट की वारदात के बाद नौकर भरत थापा और उसके साथियों ने दिनेश कुमार को 50 हजार रुपये दिए थे।
पुलिस के अनुसार, लूट की पूरी वारदात की जांच के दौरान अलग-अलग तकनीकी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर दिनेश कुमार का नाम सामने आया। उसके बारे में जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने उसकी गतिविधियों और संपर्कों की पड़ताल की। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की गई।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि पार्षद अमिता सिंह के घर लूट की घटना के बाद आरोपितों को शहर से बाहर निकलने में मदद की गई थी। पुलिस का आरोप है कि इस काम के लिए दिनेश ने अपनी टैक्सी का इस्तेमाल किया। उसने भरत थापा समेत अन्य आरोपितों को घटना के बाद टैक्सी में बैठाकर आगे पहुंचाया।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दिनेश ने आरोपितों को कहां तक छोड़ा था और वहां से वे किस दिशा में गए। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि उसने घटना से पहले भी आरोपितों के साथ किसी तरह की योजना या संपर्क बनाया था या नहीं।
मामले की जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि दिनेश कुमार का नेपाली मूल के कई लोगों से संपर्क था। पुलिस का आरोप है कि वह टैक्सी चालक के रूप में काम करते हुए अलग-अलग लोगों की आवाजाही में मदद करता था और इसी नेटवर्क का इस्तेमाल आपराधिक घटनाओं के बाद आरोपितों को इधर-उधर पहुंचाने के लिए भी किया जाता था।
अधिकारियों के मुताबिक लूट की वारदात के बाद फरार हुए आरोपितों ने दिनेश को 50 हजार रुपये दिए। पुलिस इस रकम के स्रोत और भुगतान के तरीके की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि रकम नकद दी गई थी या किसी अन्य माध्यम से।
पुलिस का कहना है कि पार्षद के घर काम करने वाला नौकर भरत थापा इस मामले में अहम कड़ी है। उसके अन्य साथियों और घटना में शामिल लोगों की तलाश भी जारी है। जांच टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और दिल्ली समेत अन्य स्थानों में भी संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।
वारदात के बाद पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, मोबाइल फोन की लोकेशन और वाहनों की आवाजाही से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले। इसी दौरान एक टैक्सी की भूमिका संदिग्ध मिली, जिसके बाद पुलिस दिनेश तक पहुंची।
पुलिस अब दिनेश से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि वह भरत थापा को कब से जानता था और दोनों के बीच पहले कितनी बार संपर्क हुआ। यह भी जांच का हिस्सा है कि क्या दिनेश को पहले से इस बात की जानकारी थी कि पार्षद के घर लूट की योजना बनाई जा रही है।
यदि जांच में यह सामने आता है कि उसे पहले से योजना की जानकारी थी, तो उसकी भूमिका और गंभीर मानी जा सकती है। हालांकि फिलहाल पुलिस की ओर से उसकी भूमिका लूट के बाद आरोपितों को टैक्सी से ले जाने और उन्हें सहयोग देने के रूप में बताई गई है।
जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि नेपाली गैंग ने इससे पहले किन-किन शहरों या इलाकों में इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है। टैक्सी चलाने की आड़ में दिनेश की गतिविधियों को देखते हुए पुलिस उसके पुराने रूट, यात्रियों और संपर्कों की जानकारी भी जुटा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अक्सर घरेलू कामगारों या परिचितों के जरिए घर की अंदरूनी जानकारी हासिल की जाती है। इसके बाद मौका देखकर वारदात को अंजाम दिया जाता है। हालांकि इस मामले में पूरी साजिश और प्रत्येक आरोपित की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
पार्षद अमिता सिंह के घर लूट के मामले ने पहले ही इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए थे। अब एक और आरोपित की गिरफ्तारी से पुलिस को नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
पुलिस दिनेश कुमार के मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना से पहले और बाद में वह किन-किन लोगों के संपर्क में था।
इसके अलावा उसके बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा सकती है। 50 हजार रुपये के कथित भुगतान की पुष्टि के लिए पुलिस सबूत जुटा रही है।
पुलिस ने दिनेश से पूछताछ के आधार पर अन्य संभावित आरोपितों के ठिकानों की जानकारी भी जुटाई है। जांच टीम का मानना है कि उससे मिली जानकारी के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
लूट की वारदात के बाद फरार आरोपितों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए प्राथमिकता बनी हुई है। खासकर भरत थापा और उसके करीबी साथियों की तलाश तेज की गई है।
पुलिस का कहना है कि गैंग के सदस्य अलग-अलग राज्यों में जाकर छिप सकते हैं। इसी कारण दिल्ली और उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों की पुलिस से भी जरूरत पड़ने पर संपर्क किया जा सकता है।
फिलहाल दिनेश कुमार की गिरफ्तारी को इस मामले में अहम सफलता माना जा रहा है। पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही है और उसकी भूमिका से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा रही है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए दबिश जारी रहेगी।
पार्षद अमिता सिंह के घर लूट की घटना के बाद सामने आया यह नया खुलासा बताता है कि वारदात के बाद आरोपितों को भागने में मदद देने के लिए भी अलग नेटवर्क सक्रिय था। अब पुलिस की कोशिश इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़कर सभी आरोपितों तक पहुंचने की है।





