
गाजियाबाद। चार महीने पहले ही यतीश और शीतल ने अग्नि को साक्षी मानकर एक-दूसरे का जीवनभर साथ निभाने का वादा किया था। शादी के बाद दोनों की जिंदगी खुशियों से भरी थी। भविष्य को लेकर कई सपने थे और साथ में बिताए जाने वाले हर पल को यादगार बनाने की उम्मीद थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। नैनीताल घूमने निकले नवविवाहित दंपती का सफर उस समय दर्दनाक हादसे में बदल गया, जब सड़क दुर्घटना में यतीश की जान चली गई।
यतीश गाजियाबाद के रहने वाले थे और नेशनल स्तर पर बास्केटबॉल खेल चुके थे। खेल के मैदान में अपनी पहचान बनाने वाले यतीश शादी के बाद पत्नी शीतल के साथ जिंदगी के नए दौर का आनंद ले रहे थे। दोनों ने तय किया था कि नैनीताल की खूबसूरत वादियों में साथ समय बिताकर इस यात्रा को अपनी शादी के बाद की खास यादों में शामिल करेंगे। नई गाड़ी से शुरू हुआ यह सफर दोनों के लिए उत्साह से भरा था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद यही यात्रा शीतल के जीवन की सबसे दर्दनाक याद बन गई।
शादी के चार महीने बाद पहली पहाड़ी यात्रा
बताया गया कि यतीश और शीतल गुरुवार को नैनीताल घूमने के लिए निकले थे। शादी के बाद यह दोनों का पहाड़ों की ओर पहला सफर था। नई गाड़ी होने के कारण भी दोनों इस यात्रा को लेकर काफी उत्साहित थे। रास्ते भर दोनों भविष्य की योजनाओं और घूमने-फिरने को लेकर खुश थे।
यात्रा करते हुए दोनों देर रात रामनगर पहुंच गए। यहां तक पहुंचने के बाद नैनीताल की दूरी करीब 50 किलोमीटर से कुछ अधिक रह गई थी। मंजिल अब ज्यादा दूर नहीं थी। शीतल को जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस सफर को लेकर दोनों इतने उत्साहित हैं, वही उनके जीवनसाथी के साथ आखिरी सफर साबित होने वाला है।
कुछ ही किलोमीटर पहले बदल गई पूरी जिंदगी
रामनगर पहुंचने के बाद दोनों नैनीताल की ओर बढ़ रहे थे। रात का समय था और पहाड़ी क्षेत्र की ओर जाने वाला रास्ता सामने था। इसी दौरान सड़क पर हुए हादसे ने यतीश की जिंदगी छीन ली। हादसा इतना दर्दनाक था कि परिवार और परिचितों के लिए इस घटना पर विश्वास करना मुश्किल हो गया।
कुछ घंटे पहले तक यतीश और शीतल साथ यात्रा कर रहे थे। दोनों के सामने जिंदगी का लंबा सफर था। शादी को अभी सिर्फ चार महीने ही हुए थे और दांपत्य जीवन की शुरुआत ही हुई थी। ऐसे में यतीश की अचानक मौत ने शीतल को गहरे सदमे में डाल दिया।
खेल के मैदान में बनाई थी पहचान
यतीश की पहचान केवल एक पति और परिवार के सदस्य के रूप में ही नहीं थी, बल्कि वह बास्केटबॉल के अच्छे खिलाड़ी भी थे। नेशनल स्तर पर बास्केटबॉल खेल चुके यतीश ने खेल के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। खेल से जुड़े लोगों और उनके परिचितों के लिए भी यह खबर बेहद दुखद रही।
यतीश के निधन से उनके परिवार के साथ खेल जगत से जुड़े लोगों में भी शोक की लहर है। जिस युवा खिलाड़ी के सामने भविष्य की कई संभावनाएं थीं, उसकी जिंदगी अचानक सड़क हादसे के कारण खत्म हो गई।
शीतल के लिए जिंदगी भर का दर्द
शादी के बाद पति के साथ पहली पहाड़ी यात्रा पर निकली शीतल ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि कुछ ही घंटों में उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाएगी। चार महीने पहले जिस व्यक्ति के साथ उसने सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा किया था, वह अचानक उससे हमेशा के लिए दूर हो गया।
शीतल और यतीश की शादी को अभी ज्यादा समय नहीं हुआ था। दोनों ने साथ मिलकर भविष्य की नई शुरुआत की थी। शादी के बाद आने वाले दिनों को लेकर कई सपने थे। नैनीताल यात्रा भी उन्हीं सपनों और खुशियों का हिस्सा थी। लेकिन हादसे ने इन सभी उम्मीदों को एक झटके में खत्म कर दिया।
परिवार में पसरा मातम
हादसे की जानकारी मिलते ही यतीश के परिवार में कोहराम मच गया। जिस घर में कुछ महीने पहले शादी की खुशियां गूंजी थीं, वहां अचानक मातम छा गया। रिश्तेदार और परिचित इस दुखद खबर से स्तब्ध हैं। किसी को यकीन नहीं हो रहा कि यतीश अब उनके बीच नहीं रहे।
परिवार के लिए यह नुकसान इसलिए भी असहनीय है क्योंकि यतीश अभी जीवन के शुरुआती दौर में थे। शादी के बाद परिवार और पत्नी के साथ आगे की जिंदगी के लिए उन्होंने कई सपने देखे थे। लेकिन एक सड़क हादसे ने उन सभी सपनों को अधूरा छोड़ दिया।
खुशियों का सफर बन गया दर्दनाक याद
नैनीताल की वादियों में घूमने और साथ यादगार पल बिताने निकले यतीश और शीतल का सफर अब एक दर्दनाक कहानी बन चुका है। रामनगर पहुंचने के बाद मंजिल करीब थी, लेकिन उससे पहले ही हादसा हो गया। जिस नैनीताल यात्रा को दोनों अपनी शादी के बाद की खूबसूरत याद बनाना चाहते थे, वही यात्रा शीतल के लिए जीवनभर का दर्द बन गई।
यतीश की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सावधानी की अहमियत को सामने ला दिया है। खासकर रात के समय लंबी दूरी और पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करते समय अतिरिक्त सतर्कता जरूरी होती है। हालांकि इस हादसे की परिस्थितियों और जिम्मेदारी को लेकर आधिकारिक जांच के तथ्यों का इंतजार किया जाना जरूरी है।
चार महीने पहले जिस रिश्ते की शुरुआत सात फेरों और जीवनभर साथ निभाने के वादे से हुई थी, उसका एक अध्याय इतनी जल्दी खत्म हो गया। यतीश की यादें अब शीतल और उनके परिवार के साथ रहेंगी, जबकि नैनीताल का यह सफर उनके जीवन की सबसे भावुक और दर्दनाक याद बनकर रह गया।





