उत्तराखंड

पहाड़ की छिरबी का दुनिया में डंका, ब्राजील में लद्दाख की याक चीज ने जीता गोल्ड

Kavita2
29 Oct 2026 5:26 PM IST
पहाड़ की छिरबी का दुनिया में डंका, ब्राजील में लद्दाख की याक चीज ने जीता गोल्ड
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पिथौरागढ़। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र धारचूला की पहचान अब तक मुख्य रूप से आदि कैलाश और ओम पर्वत जैसे प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों से जुड़ी रही है। लेकिन इस क्षेत्र की एक और पारंपरिक पहचान दोबारा उभर सकती है। यह पहचान है पहाड़ों में तैयार की जाने वाली उच्च प्रोटीन वाली पारंपरिक चीज ‘छिरबी’ की। कभी धारचूला के कई घरों में बनाई जाने वाली छिरबी अब लगभग विलुप्त होने की स्थिति में पहुंच गई है। इसी बीच लद्दाख में तैयार की गई याक छिरबी को ब्राजील में अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलने से इस पारंपरिक खाद्य उत्पाद के संरक्षण और पुनर्जीवन की उम्मीद बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार, इसी वर्ष अप्रैल में ब्राजील के साओ पाउलो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चीज प्रतियोगिता में लद्दाख की याक छिरबी ने स्वर्ण पदक हासिल किया। प्रतियोगिता में 30 देशों से लगभग 2,700 प्रकार की चीज शामिल होने की जानकारी दी गई है। लद्दाख के लेह जिले के दुर्बुक निवासी थेनले नुर्बू ने अपने नोर्डिक फार्म पर यह छिरबी तैयार की थी। उनकी इस उपलब्धि ने हिमालयी क्षेत्रों में बनने वाले पारंपरिक दुग्ध उत्पादों की संभावनाओं को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

कभी धारचूला के घरों में बनती थी छिरबी

धारचूला और आसपास के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पारंपरिक खानपान का विशेष महत्व रहा है। यहां के लोगों का जीवन लंबे समय से पर्वतीय परिस्थितियों, पशुपालन और स्थानीय संसाधनों से जुड़ा रहा है।

छिरबी भी इसी खाद्य परंपरा का हिस्सा रही है। इसे स्थानीय स्तर पर दूध से तैयार होने वाले पारंपरिक चीज उत्पाद के रूप में जाना जाता है।

बताया जाता है कि एक समय यह कई परिवारों के दैनिक जीवन और खानपान का हिस्सा थी। लेकिन समय के साथ इसका उत्पादन कम होता गया।

अब स्थिति यह है कि कभी घर-घर में बनने वाली छिरबी लगभग समाप्त होने की कगार पर पहुंच गई है।

ब्राजील में लद्दाख की छिरबी ने रचा इतिहास

लद्दाख में तैयार याक छिरबी को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक मिलने की खबर ने इस पारंपरिक उत्पाद की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

अप्रैल 2026 में ब्राजील के साओ पाउलो में आयोजित चीज प्रतियोगिता में विभिन्न देशों के उत्पाद शामिल हुए थे।

दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रतियोगिता में 30 देशों की लगभग 2,700 चीज प्रस्तुत की गई थीं।

इनके बीच लद्दाख की याक छिरबी ने गोल्ड मेडल हासिल किया।

यह उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि हिमालयी क्षेत्रों में तैयार पारंपरिक खाद्य उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना सकते हैं।

हालांकि, प्रतियोगिता के आधिकारिक परिणाम और श्रेणी का स्वतंत्र सत्यापन अभी आवश्यक है।

थेनले नुर्बू ने तैयार की थी विजेता छिरबी

इस उपलब्धि के केंद्र में लद्दाख के लेह जिले के दुर्बुक निवासी थेनले नुर्बू हैं।

उन्होंने अपने नोर्डिक फार्म पर याक के दूध से छिरबी तैयार की थी।

याक हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाया जाने वाला महत्वपूर्ण पशु है। कई पर्वतीय समुदायों में इसके दूध का उपयोग पारंपरिक खाद्य पदार्थ तैयार करने में किया जाता है।

नुर्बू की उपलब्धि से यह संदेश सामने आया है कि स्थानीय ज्ञान और पारंपरिक उत्पादन पद्धतियों को उचित पहचान मिलने पर वे बड़े बाजारों तक पहुंच सकती हैं।

धारचूला के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?

लद्दाख की छिरबी को अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलने से धारचूला में इस पारंपरिक खाद्य उत्पाद को पुनर्जीवित करने की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है।

धारचूला पहले से ही आदि कैलाश और ओम पर्वत के कारण धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

यदि यहां की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को भी संरक्षण मिले, तो पर्यटकों को स्थानीय जीवनशैली और खानपान से परिचित कराने का अवसर बढ़ सकता है।

छिरबी जैसे उत्पाद क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं।

हालांकि, धारचूला में इसके व्यावसायिक उत्पादन को लेकर किसी नई सरकारी योजना की पुष्टि नहीं हुई है।

उच्च प्रोटीन वाला पारंपरिक खाद्य उत्पाद

छिरबी को उच्च प्रोटीन वाले पारंपरिक दुग्ध उत्पाद के रूप में जाना जाता है।

पनीर और अन्य चीज उत्पादों की तरह इसमें भी दूध से प्राप्त पोषक तत्व मौजूद हो सकते हैं।

हालांकि, छिरबी में प्रोटीन की वास्तविक मात्रा दूध के प्रकार, निर्माण विधि और नमी के स्तर के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

इसलिए बिना प्रयोगशाला परीक्षण के किसी विशेष उत्पाद की पोषण मात्रा बताना उचित नहीं होगा।

पारंपरिक खाद्य पदार्थों का वैज्ञानिक परीक्षण उनकी गुणवत्ता और पोषण संबंधी विशेषताओं को प्रमाणित करने में सहायक हो सकता है।

पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने की जरूरत

छिरबी का उत्पादन घटने के साथ इसे बनाने की पारंपरिक विधियों के लुप्त होने की आशंका भी बढ़ सकती है।

ऐसे खाद्य उत्पाद केवल भोजन का हिस्सा नहीं होते, बल्कि उनसे स्थानीय समुदायों की जीवनशैली और पीढ़ियों से चला आ रहा अनुभव भी जुड़ा होता है।

यदि पुराने उत्पादकों और स्थानीय परिवारों से निर्माण विधियों का दस्तावेजीकरण किया जाए, तो इस विरासत को संरक्षित करने में मदद मिल सकती है।

इसके लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।

पर्यटन के साथ स्थानीय उत्पादों को मिल सकता है बढ़ावा

धारचूला में धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के साथ स्थानीय खाद्य उत्पादों को जोड़ने की संभावनाएं मौजूद हैं।

पर्यटक अक्सर किसी क्षेत्र की पारंपरिक संस्कृति, हस्तशिल्प और खानपान के बारे में जानने में रुचि रखते हैं।

ऐसे में छिरबी जैसे उत्पाद स्थानीय पहचान का हिस्सा बन सकते हैं।

हालांकि, व्यावसायिक बिक्री शुरू करने से पहले खाद्य सुरक्षा मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था आवश्यक होगी।

विशेष रूप से दुग्ध उत्पादों में स्वच्छता और निर्धारित खाद्य मानकों का पालन महत्वपूर्ण है।

स्थानीय लोगों के लिए आजीविका की संभावना

यदि छिरबी का उत्पादन दोबारा शुरू होता है और इसके लिए स्थायी बाजार विकसित किया जाता है, तो इससे स्थानीय पशुपालकों और छोटे उत्पादकों को अवसर मिल सकते हैं।

पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन भी संभव है।

हालांकि, उत्पादन लागत, दूध की उपलब्धता और बाजार में मांग का अध्ययन किए बिना इसकी व्यावसायिक सफलता का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

लद्दाख की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि धारचूला के लिए प्रेरणा जरूर बन सकती है, लेकिन दोनों क्षेत्रों की परिस्थितियों और उत्पादन पद्धतियों का अलग-अलग मूल्यांकन जरूरी होगा।

छिरबी की वापसी से मजबूत होगी पहाड़ की पहचान

ब्राजील में लद्दाख की याक छिरबी को मिले सम्मान ने हिमालयी खाद्य परंपराओं की संभावनाओं को उजागर किया है।

यह उपलब्धि धारचूला के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश लेकर आई है, जहां छिरबी कभी स्थानीय खानपान का परिचित हिस्सा हुआ करती थी।

यदि इस पारंपरिक उत्पाद के संरक्षण, गुणवत्ता परीक्षण और स्थानीय उत्पादन पर ध्यान दिया जाए, तो धारचूला की पहचान धार्मिक पर्यटन से आगे भी मजबूत हो सकती है।

आदि कैलाश और ओम पर्वत के साथ छिरबी भविष्य में इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और खाद्य विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन सकती है।

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