
नैनीताल। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में हुए बड़े बदलाव ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। नैनीताल जिले की छह विधानसभा सीटों पर पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले करीब 78 हजार मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। सबसे अधिक असर हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला है, जहां 30 हजार से ज्यादा मतदाता कम हुए हैं। मतदाताओं की संख्या में इस गिरावट ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस, दोनों के सामने नई चुनावी चुनौती खड़ी कर दी है।
जानकारी के अनुसार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद प्रकाशित आंकड़ों में जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर मतदाताओं की संख्या कम हुई है। अक्टूबर की शुरुआत में प्रकाशित सूची के अनुसार, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में नैनीताल जिले की छह सीटों पर कुल 7,75,899 मतदाता दर्ज थे, जबकि नई सूची में यह संख्या घटकर 6,97,535 रह गई है। इस आधार पर कुल 78,364 मतदाताओं की कमी सामने आती है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में हल्द्वानी सहित कुछ सीटों के आंकड़ों में मामूली अंतर भी दिखाई देता है।
हल्द्वानी में सबसे ज्यादा घटे मतदाता
नैनीताल जिले में मतदाता संख्या में सबसे बड़ी गिरावट हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र में सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यहां पिछले चुनाव की तुलना में लगभग 30 से 31 हजार मतदाता कम दर्ज हुए हैं।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में हल्द्वानी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार सुमित हृदयेश ने 7,814 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। वर्तमान मतदाता सूची में आई कमी पिछली जीत के अंतर से लगभग चार गुना है।
ऐसे में कांग्रेस के सामने अपने पुराने मतदाता आधार को बनाए रखने और नए मतदाताओं तक पहुंचने की चुनौती होगी। दूसरी ओर, भाजपा भी इस बदलाव के बीच अपनी चुनावी रणनीति को मजबूत करने का प्रयास कर सकती है।
नैनीताल सीट पर भी बदला चुनावी गणित
हल्द्वानी के अलावा नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में भी मतदाताओं की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यहां पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले करीब 17 हजार मतदाता कम हुए हैं।
वर्ष 2022 में नैनीताल विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार सरिता आर्य ने 7,881 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। नई मतदाता सूची में दर्ज कमी इस जीत के अंतर से दोगुने से भी ज्यादा है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कम अंतर से जीती गई सीटों पर मतदाता सूची में बदलाव को लेकर राजनीतिक दल विशेष सतर्कता बरतते हैं।
हालांकि, मतदाताओं की संख्या में कमी का यह अर्थ नहीं है कि किसी एक राजनीतिक दल के समर्थकों के नाम ही सूची से हटे हैं। इसका वास्तविक चुनावी प्रभाव मतदान के समय मतदाताओं की भागीदारी और राजनीतिक रुझान पर निर्भर करेगा।
2022 में भाजपा ने जीती थीं पांच सीटें
नैनीताल जिले की छह विधानसभा सीटों में से वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा ने पांच सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस को केवल हल्द्वानी सीट पर सफलता मिली थी।
लालकुआं से भाजपा के डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, भीमताल से राम सिंह कैड़ा, नैनीताल से सरिता आर्य, कालाढूंगी से बंशीधर भगत और रामनगर से दीवान सिंह बिष्ट विधायक चुने गए थे।
वहीं, हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के सुमित हृदयेश ने जीत दर्ज की थी।
अब वर्ष 2027 के चुनाव से पहले सभी छह सीटों पर मतदाताओं की संख्या में कमी के कारण दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों को अपनी चुनावी रणनीति की समीक्षा करनी पड़ सकती है।
भाजपा के लिए अपनी पांच सीटों को बरकरार रखना चुनौती होगी, जबकि कांग्रेस हल्द्वानी के साथ अन्य सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास करेगी।
लालकुआं, रामनगर और भीमताल में भी असर
मतदाता सूची में बदलाव केवल हल्द्वानी और नैनीताल तक सीमित नहीं है। जिले के लालकुआं, भीमताल, कालाढूंगी और रामनगर विधानसभा क्षेत्रों में भी मतदाताओं की संख्या कम हुई है।
लालकुआं में लगभग 12 हजार, रामनगर में करीब 10 हजार और कालाढूंगी में छह हजार से अधिक मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। भीमताल में भी मतदाताओं की संख्या घटी है।
रामनगर विधानसभा सीट पर वर्ष 2022 में भाजपा के दीवान सिंह बिष्ट ने 4,745 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। ऐसे में यहां मतदाता संख्या में आई कमी चुनावी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राजनीतिक दलों के लिए अब बूथ स्तर पर मतदाता सूची का अध्ययन करना और अपने समर्थकों के नाम दर्ज होने की पुष्टि करना आवश्यक होगा।
मतदाता सूची से नाम छूटने वालों को मिलेगा अवसर
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जिन पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने का अवसर उपलब्ध है।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ को ऐसे मतदाताओं की पहचान करने और आवश्यक प्रक्रिया में सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं।
पात्र नागरिक फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के सत्यापन के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार नाम सूची में शामिल किया जा सकता है।
मतदाता सूची में कमी के कई संभावित कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, मतदाता सूची में बदलाव के कई कारण हो सकते हैं। इनमें मतदाताओं का दूसरे स्थान पर स्थानांतरण, मृत्यु, दोहरी प्रविष्टियां और सत्यापन के दौरान सामने आई त्रुटियां शामिल हो सकती हैं।
इसके अलावा कुछ पात्र मतदाता आवश्यक दस्तावेज या जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाने के कारण भी सूची में शामिल होने से रह सकते हैं।
इसलिए मतदाता संख्या में आई पूरी कमी को सीधे अपात्र नामों की कटौती या राजनीतिक कारणों से हुई कार्रवाई मानना उचित नहीं होगा।
2027 के विधानसभा चुनाव पर रहेगी नजर
उत्तराखंड में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का यह बदलाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना, पात्र मतदाताओं के नाम सूची में सुनिश्चित कराना और नए मतदाताओं से संपर्क बढ़ाना चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा होगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मतदान से पहले पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में दर्ज हों और उन्हें अपने मताधिकार के इस्तेमाल में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
फिलहाल नैनीताल जिले की छह विधानसभा सीटों पर मतदाताओं की संख्या में आई कमी ने चुनावी गणित को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। अब यह देखना होगा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची का बदला स्वरूप भाजपा और कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं को किस तरह प्रभावित करता है।





