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पहाड़ों की रानी मसूरी पर खतरे की घंटी, 15 फीसदी इलाका लैंडस्लाइड की जद में
Dehradun: उत्तराखंड की प्रसिद्ध पर्यटन नगरी मसूरी को लेकर एक महत्वपूर्ण अध्ययन में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, मसूरी का करीब 15 फीसदी क्षेत्र भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की दृष्टि से संवेदनशील है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अनियोजित निर्माण, लगातार बढ़ते शहरीकरण, सड़क कटिंग और भारी बारिश जैसे कारण इन इलाकों में भूस्खलन के खतरे को और बढ़ा रहे हैं।
अध्ययन में सामने आई चिंताजनक तस्वीर
अध्ययन के अनुसार, मसूरी के कई हिस्से ऐसे हैं जहां भू-संरचना पहले से ही कमजोर है। मानसून के दौरान लगातार होने वाली बारिश के कारण इन क्षेत्रों में मिट्टी और चट्टानों के खिसकने का खतरा बढ़ जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में जोखिम और अधिक बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जल निकासी की खराब व्यवस्था और ढलानों पर बढ़ते निर्माण कार्य भी भूस्खलन की घटनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं।
भारी बारिश से बढ़ जाता है खतरा
मसूरी में हर साल मानसून के दौरान तेज बारिश होती है, जिससे पहाड़ी ढलानों पर दबाव बढ़ जाता है। कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त होने, मलबा गिरने और यातायात बाधित होने जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि भी पहाड़ी क्षेत्रों के लिए नई चुनौती बन रही है।
अनियोजित निर्माण बना चिंता का कारण
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि तेजी से हो रहा शहरी विस्तार और अनियोजित निर्माण प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर रहा है। पहाड़ियों की कटाई, ढलानों पर भवन निर्माण और पर्याप्त सुरक्षा उपायों की कमी से भू-स्खलन की आशंका बढ़ रही है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप नियंत्रित किया जाए और पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की जरूरत
रिपोर्ट में संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी, आधुनिक तकनीक से भू-जोखिम का आकलन और समय पर चेतावनी प्रणाली विकसित करने की सिफारिश की गई है। साथ ही, वर्षा जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने और ढलानों के संरक्षण के उपाय अपनाने पर भी जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन, वैज्ञानिक संस्थानों और नागरिकों के साझा प्रयासों से ही भूस्खलन के खतरे को कम किया जा सकता है।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए सावधानी जरूरी
मसूरी में हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में बारिश के मौसम में प्रशासन की ओर से जारी मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करना, संवेदनशील इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचना और सुरक्षित मार्गों का उपयोग करना जरूरी है।
अध्ययन ने यह संकेत दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते जोखिम को देखते हुए हिमालयी क्षेत्रों में सतत विकास और वैज्ञानिक योजना को प्राथमिकता देना समय की मांग है।
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