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वाहन फिटनेस को लेकर बड़ा अपडेट
देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के वाहन मालिकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने राज्य के चार पर्वतीय जिलों में वाहनों की मैन्युअल फिटनेस जांच की सुविधा को जून 2027 तक जारी रखने की अनुमति दे दी है। इससे हजारों व्यावसायिक वाहन संचालकों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अब तक फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए लंबी दूरी तय कर दूसरे जिलों का रुख करना पड़ रहा था। केंद्र के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के फैसले के बाद उत्तरकाशी, पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में परिवहन विभाग के माध्यम से वाहन फिटनेस परीक्षण की प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकेगी। इन जिलों में आरटीओ कार्यालयों के स्तर पर मैन्युअल फिटनेस जांच की व्यवस्था को 30 जून 2027 तक जारी रखने की अनुमति दी गई है।
वाहन मालिकों को मिली बड़ी राहत
पहाड़ी जिलों में परिवहन सुविधाओं और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए वाहन मालिक लंबे समय से फिटनेस जांच व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर बहाल करने की मांग कर रहे थे। स्वचालित परीक्षण केंद्र (Automated Testing Station) की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण कई वाहन संचालकों को अपने वाहनों को फिटनेस जांच के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर ले जाना पड़ता था। इससे समय और आर्थिक नुकसान दोनों उठाने पड़ रहे थे। अब सुविधा बहाल होने से ट्रक, बस, टैक्सी और अन्य व्यावसायिक वाहन संचालक अपने ही जिले में फिटनेस प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पूरी करा सकेंगे। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने ATS स्थापना पर दिया जोर
केंद्र सरकार ने राहत देने के साथ ही राज्य सरकार को निर्धारित समय सीमा के भीतर स्वचालित परीक्षण स्टेशन (ATS) स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। भविष्य में वाहनों की फिटनेस जांच को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए ATS व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।
परिवहन विभाग का उद्देश्य है कि वाहन फिटनेस प्रक्रिया में तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाए, जिससे जांच में पारदर्शिता आए और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सके।
परिवहन संगठनों ने फैसले का किया स्वागत
केंद्र सरकार के इस निर्णय का वाहन संचालकों और परिवहन संगठनों ने स्वागत किया है। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हुआ है। पर्वतीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में छोटे कारोबारी, टैक्सी चालक और ट्रांसपोर्टर अपने वाहनों पर निर्भर हैं। फिटनेस सुविधा बहाल होने से उन्हें आर्थिक बोझ और अनावश्यक यात्रा से राहत मिलेगी। परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उम्मीद जताई है कि जून 2027 तक ATS केंद्रों की स्थापना पूरी कर ली जाएगी, जिससे भविष्य में वाहन फिटनेस जांच की प्रक्रिया और आसान हो सकेगी।
सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी है फिटनेस जांच
वाहनों की फिटनेस जांच सड़क सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। खराब स्थिति वाले वाहनों की पहचान कर दुर्घटनाओं को कम करने में फिटनेस प्रमाणपत्र की अहम भूमिका होती है। सरकार लगातार वाहन जांच प्रक्रिया को मजबूत करने और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दे रही है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में जहां सड़कों की स्थिति और मौसम की चुनौतियां अलग होती हैं, वहां वाहनों की तकनीकी जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में चार जिलों में फिटनेस सुविधा बहाल होने से वाहन मालिकों के साथ-साथ यात्रियों को भी इसका लाभ मिलेगा।
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