उत्तराखंड

उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम, मसूरी मार्ग के संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों का ULMC करेगा सर्वे

nidhi
22 July 2026 7:35 AM IST
उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम, मसूरी मार्ग के संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों का ULMC करेगा सर्वे
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बारिश से पहले एक्शन मोड में सरकार, मसूरी हाईवे के संवेदनशील इलाकों का होगा विस्तृत सर्वे

UTTARAKHAND: मसूरी राजमार्ग पर लगातार बढ़ रही भूस्खलन की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर (ULMC) को पानीवाला बैंड सहित पांच संवेदनशील क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इस सर्वे का उद्देश्य भूस्खलन के वास्तविक कारणों की पहचान करना और दीर्घकालिक समाधान तैयार करना है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, मसूरी मार्ग पर कई स्थान ऐसे हैं जहां मानसून के दौरान बार-बार भूस्खलन होने से यातायात प्रभावित होता है और यात्रियों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराता है। विशेष रूप से पानीवाला बैंड को अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, जहां हर वर्ष सड़क धंसने और पहाड़ी से मलबा गिरने की घटनाएं सामने आती हैं।
ULMC की विशेषज्ञ टीम भूगर्भीय संरचना, पहाड़ियों की स्थिरता, जल निकासी व्यवस्था, मिट्टी की गुणवत्ता और वर्षा के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन करेगी। आधुनिक तकनीकों, ड्रोन मैपिंग, जियो-टेक्निकल जांच और वैज्ञानिक विश्लेषण के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किन कारणों से इन क्षेत्रों में बार-बार भूस्खलन हो रहा है और इसे स्थायी रूप से कैसे रोका जा सकता है।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर सरकार संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा उपायों को मजबूत करेगी। इनमें ढलानों का स्थिरीकरण, रिटेनिंग वॉल का निर्माण, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम, रॉक बोल्टिंग, वायर मेश और अन्य इंजीनियरिंग उपाय शामिल किए जा सकते हैं। उद्देश्य यह है कि भविष्य में सड़क बंद होने की घटनाओं को कम किया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
मसूरी राजमार्ग राज्य के सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन मार्गों में से एक है। हर वर्ष लाखों पर्यटक और स्थानीय लोग इस मार्ग से यात्रा करते हैं। ऐसे में बार-बार होने वाले भूस्खलन से न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर स्थायी समाधान अपनाने से भूस्खलन की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सरकार का यह कदम सड़क सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मानसून के दौरान पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करते समय मौसम और यातायात संबंधी आधिकारिक सलाह का पालन करें तथा संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सावधानी बरतें।

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