उत्तराखंड

होमगार्ड भर्ती में AI से बड़ा फर्जीवाड़ा, 10वीं-12वीं के नकली सर्टिफिकेट पकड़े गए

Kavita2
23 Oct 2026 9:34 AM IST
होमगार्ड भर्ती में AI से बड़ा फर्जीवाड़ा, 10वीं-12वीं के नकली सर्टिफिकेट पकड़े गए
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हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकारी नौकरी पाने के लिए कुछ अभ्यर्थियों ने एआई तकनीक की मदद से नकली प्रमाणपत्र बनाकर भर्ती प्रक्रिया में जमा कर दिए। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान 20 से अधिक संदिग्ध प्रमाणपत्र सामने आए, जिनकी जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई। हैरानी की बात यह है कि इनमें दसवीं और बारहवीं कक्षा के नकली शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी शामिल हैं। मामला सामने आने के बाद विभाग ने संबंधित अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त कर दिए हैं। साथ ही उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

227 पदों के लिए 11 हजार अभ्यर्थियों ने किया था आवेदन

हरिद्वार जिले में जुलाई 2026 में होमगार्ड के 227 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। सरकारी सेवा में शामिल होने की उम्मीद में जिले के करीब 11 हजार अभ्यर्थियों ने इन पदों के लिए आवेदन किया था।

भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच की गई। इसी दौरान अधिकारियों को कुछ प्रमाणपत्र संदिग्ध दिखाई दिए।

जब इन दस्तावेजों का विस्तृत सत्यापन किया गया, तो पता चला कि उन्हें वास्तविक प्रमाणपत्र जैसा दिखाने के लिए एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।

इस खुलासे ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एआई की मदद से बनाए दसवीं और बारहवीं के नकली प्रमाणपत्र

जांच में सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों ने केवल सामान्य प्रमाणपत्र ही नहीं, बल्कि अपनी शैक्षणिक योग्यता साबित करने के लिए दसवीं और बारहवीं के नकली प्रमाणपत्र भी तैयार किए थे।

इन दस्तावेजों को इस तरह बनाया गया था कि वे पहली नजर में असली प्रमाणपत्र जैसे दिखाई दें। हालांकि, जांच के दौरान दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने के बाद उनका फर्जी होना उजागर हो गया।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से दस्तावेजों के डिजाइन,文字 और अन्य विवरणों की नकल करना आसान हो सकता है। यही वजह है कि भर्ती प्रक्रिया में केवल दस्तावेजों को देखकर उनकी प्रामाणिकता तय करना पर्याप्त नहीं रह गया है।

इस मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जहां प्रशासनिक कार्यों को आसान बना सकता है, वहीं इसका गलत उपयोग भर्ती प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के लिए भी किया जा सकता है।

अतिरिक्त अंक पाने के लिए लगाया फर्जी दस्तावेज

सामने आई जानकारी के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में कुछ विशेष प्रमाणपत्रों के आधार पर अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अंक मिलने का प्रावधान था।

आरोप है कि इसी लाभ को हासिल करने के लिए कुछ उम्मीदवारों ने नकली प्रमाणपत्रों का सहारा लिया। विभागीय जांच में ऐसे दस्तावेज पकड़े जाने के बाद संबंधित अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई।

मामले में फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।

भर्ती अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मंडलीय कमांडेंट ने की फर्जीवाड़े की पुष्टि

हरिद्वार के मंडलीय कमांडेंट होमगार्ड गौतम कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि जांच में करीब 20 अभ्यर्थियों द्वारा एआई की मदद से तैयार किए गए प्रमाणपत्र जमा करने की बात सामने आई है।

इनमें शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी शामिल हैं। संबंधित सभी अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

विभाग की इस कार्रवाई को भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किसी बाहरी व्यक्ति या संगठित गिरोह की भूमिका थी या नहीं, इस संबंध में अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

दूसरे अभ्यर्थियों के अधिकारों पर भी पड़ सकता था असर

सरकारी भर्ती में फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल केवल नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि इससे पात्र और मेहनती अभ्यर्थियों के हित भी प्रभावित हो सकते हैं।

यदि कोई उम्मीदवार गलत जानकारी या नकली दस्तावेजों के आधार पर अतिरिक्त अंक प्राप्त करता है, तो इससे चयन सूची में दूसरे उम्मीदवारों की स्थिति प्रभावित होने की आशंका रहती है।

होमगार्ड जैसी सेवाओं में जिम्मेदारी और अनुशासन का विशेष महत्व होता है। ऐसे में भर्ती के शुरुआती चरण में ही फर्जी दस्तावेजों का मिलना गंभीर मामला है।

इस घटना के बाद अन्य अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी सामने आई है।

भर्ती प्रक्रियाओं में डिजिटल सत्यापन की बढ़ी जरूरत

एआई तकनीक के तेजी से विकसित होने के साथ फर्जी दस्तावेजों की पहचान करना नई चुनौती बनता जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, केवल प्रमाणपत्र पर लगी मुहर, हस्ताक्षर या उसकी बनावट देखकर दस्तावेज को असली मानना उचित नहीं है। इसके लिए संबंधित शैक्षणिक बोर्ड, संस्थान या प्रमाणपत्र जारी करने वाले विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलान करना जरूरी है।

डिजिटल सत्यापन, सुरक्षित प्रमाणपत्र पहचान संख्या और विभागों के बीच रिकॉर्ड का मिलान करने वाली व्यवस्था इस तरह की अनियमितताओं को रोकने में उपयोगी हो सकती है।

फर्जी प्रमाणपत्र लगाने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई

उत्तराखंड में होमगार्ड भर्ती के लिए जारी विभागीय दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि आवेदन के साथ जमा किए गए दस्तावेज फर्जी या कूटरचित पाए जाने पर संबंधित अभ्यर्थी के खिलाफ विधिक और प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।

विभाग ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने तथा प्रमाणपत्रों का सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।

हरिद्वार में सामने आए मामले में फिलहाल आवेदन निरस्त किए जाने और कानूनी कार्रवाई की तैयारी की पुष्टि हुई है। किसी अभ्यर्थी की गिरफ्तारी या मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

एआई के दुरुपयोग ने बढ़ाई विभाग की चिंता

हरिद्वार होमगार्ड भर्ती में पकड़े गए फर्जी प्रमाणपत्रों ने सरकारी नौकरी की चयन प्रक्रिया में तकनीक के गलत इस्तेमाल का नया उदाहरण सामने रखा है।

एक तरफ हजारों युवा मेहनत और अपनी योग्यता के आधार पर नौकरी पाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कुछ अभ्यर्थियों के कथित फर्जीवाड़े ने भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं।

अब विभाग के सामने चुनौती है कि भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में ऐसे मामलों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जाए। फिलहाल 20 से अधिक संदिग्ध प्रमाणपत्र मिलने और संबंधित आवेदन निरस्त किए जाने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजरें टिकी हुई हैं।

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