उत्तराखंड

दूषित पानी से बीमारी फैलने पर बड़ी कार्रवाई छह इंजीनियर निलंबित

Kavita2
22 Sept 2026 9:27 AM IST
दूषित पानी से बीमारी फैलने पर बड़ी कार्रवाई छह इंजीनियर निलंबित
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नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति और इसके बाद लोगों के बीमार पड़ने के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। पेयजल व्यवस्था में कथित लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जल संस्थान और जल निगम के अधीक्षण अभियंता समेत छह इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को चेतावनी जारी की गई है। एक साथ छह इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई के बाद पेयजल विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

ज्योलीकोट क्षेत्र में पिछले दिनों दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायत सामने आई थी। स्थानीय लोगों का आरोप था कि नलों से आने वाले पानी की गुणवत्ता खराब थी और इसका सेवन करने के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया। स्थानीय स्तर पर शिकायतें बढ़ने के साथ पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था और उसकी निगरानी पर सवाल उठने लगे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों ने स्थिति की जांच शुरू की। पेयजल के नमूने लेने के साथ आपूर्ति व्यवस्था, स्रोत, पाइपलाइन और पानी की गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की गई। प्रारंभिक स्तर पर विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की गई। इसके बाद जिम्मेदारी तय करते हुए जल संस्थान और जल निगम से जुड़े छह इंजीनियरों के निलंबन का निर्णय लिया गया।

कार्रवाई की जद में अधीक्षण अभियंता स्तर के अधिकारी भी आए हैं। इससे स्पष्ट है कि मामले को केवल निचले स्तर की तकनीकी खामी मानकर नहीं छोड़ा गया, बल्कि पेयजल आपूर्ति की निगरानी से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। वहीं जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को चेतावनी देकर भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा सामने न आने देने के लिए व्यवस्थाओं की गंभीरता से निगरानी करने को कहा गया है।

दूषित पेयजल की शिकायत किसी भी क्षेत्र के लिए गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य का विषय होती है। पेयजल में हानिकारक बैक्टीरिया या अन्य प्रदूषक होने पर उल्टी-दस्त, पेट दर्द, बुखार और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ज्योलीकोट में लोगों के बीमार होने की घटनाओं के बाद स्वास्थ्य और पेयजल विभाग दोनों की सक्रियता बढ़ाई गई है।

स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता को लेकर है। पहाड़ी क्षेत्रों में बड़ी आबादी पेयजल योजनाओं और प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर रहती है। ऐसे में किसी जलस्रोत के दूषित होने या पाइपलाइन में गंदा पानी मिलने से एक साथ बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है। इसी कारण पेयजल स्रोतों की नियमित जांच, क्लोरीनेशन और पाइपलाइन की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जाता है।

ज्योलीकोट प्रकरण ने पेयजल आपूर्ति से जुड़ी निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। लोगों की शिकायतों का समय पर समाधान हुआ या नहीं, पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच किस स्तर पर की जा रही थी और दूषित पानी की आपूर्ति शुरू होने के बाद इसे रोकने में कितना समय लगा, जैसे बिंदु जांच के दायरे में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। विभागीय कार्रवाई के बाद अब आगे की जांच में जिम्मेदारी से जुड़े अन्य पहलुओं की स्थिति भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।

प्रशासनिक स्तर पर की गई कार्रवाई का उद्देश्य पेयजल व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। निलंबित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। जांच के दौरान अधिकारियों और इंजीनियरों की जिम्मेदारियों, उनके स्तर पर की गई निगरानी और किसी संभावित लापरवाही से जुड़े तथ्यों की समीक्षा की जाएगी।

वहीं प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना भी प्रशासन के सामने प्रमुख चुनौती है। दूषित पानी की आशंका वाले क्षेत्रों में लोगों को पानी उबालकर पीने, साफ पानी का इस्तेमाल करने और पानी की टंकियों एवं बर्तनों की नियमित सफाई करने जैसी सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। किसी व्यक्ति में उल्टी-दस्त, बुखार, पेट दर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराना जरूरी है।

पेयजल योजनाओं में तकनीकी खराबी या पाइपलाइन लीकेज भी पानी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। सीवर या नालियों के आसपास से गुजरने वाली पाइपलाइन में रिसाव होने की स्थिति में दूषित पानी पेयजल लाइन तक पहुंचने का खतरा रहता है। इसलिए ऐसी घटनाओं के बाद पाइपलाइन नेटवर्क की जांच और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत महत्वपूर्ण हो जाती है।

ज्योलीकोट में दूषित पेयजल से बीमारी फैलने के मामले में एक साथ छह इंजीनियरों का निलंबन बड़ी विभागीय कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को चेतावनी दिए जाने के बाद संबंधित विभागों पर पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने का दबाव भी बढ़ गया है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि जांच में दूषित पानी की आपूर्ति का वास्तविक कारण क्या सामने आता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विभाग किस तरह के सुधारात्मक कदम उठाता है।

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