उत्तराखंड

उत्तराखंड की जोहार घाटी में दिखा ग्रैंडाला पक्षियों का बड़ा झुंड, वैज्ञानिक कर रहे अध्ययन

nidhi
27 July 2026 6:56 AM IST
उत्तराखंड की जोहार घाटी में दिखा ग्रैंडाला पक्षियों का बड़ा झुंड, वैज्ञानिक कर रहे अध्ययन
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जोहार घाटी बनी ग्रैंडाला पक्षियों का नया आकर्षण केंद्र

Uttarakhand : पिथौरागढ़ जिले की खूबसूरत जोहार घाटी में दुर्लभ 'ग्रैंडाला' (Grandala) पक्षियों का एक बड़ा झुंड दिखाई दिया है। लंबे समय बाद इतनी बड़ी संख्या में इन पक्षियों के नजर आने से पक्षी विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं में उत्सुकता बढ़ गई है। इस दुर्लभ दृश्य ने हिमालयी जैव विविधता को लेकर नई उम्मीदें जगाई हैं।

मुनस्यारी क्षेत्र में पक्षी प्रेमियों और शोधकर्ताओं ने ग्रैंडाला पक्षियों के बड़े समूह को देखा। आमतौर पर ये पक्षी ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते हैं और इनका दिखाई देना काफी दुर्लभ माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रैंडाला अपने आकर्षक रंग और ऊंचाई वाले इलाकों में रहने की आदत के कारण पक्षी प्रेमियों के बीच खास पहचान रखते हैं। इनका झुंड में दिखाई देना क्षेत्र के प्राकृतिक वातावरण के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
ग्रैंडाला पक्षियों की मौजूदगी ने शोधकर्ताओं का ध्यान खींचा है। विशेषज्ञ अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इतनी बड़ी संख्या में ये पक्षी जोहार घाटी में क्यों पहुंचे हैं।
शोध में इनके प्रवास, भोजन की उपलब्धता, मौसम में बदलाव और पर्यावरणीय परिस्थितियों का अध्ययन किया जाएगा। इससे हिमालयी क्षेत्रों में पक्षियों के व्यवहार और प्रवासन पैटर्न को समझने में मदद मिल सकती है।
हिमालय की जैव विविधता का प्रमाण
जोहार घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहां समय-समय पर कई दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी और वन्यजीव देखे जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी दुर्लभ पक्षी प्रजाति का बड़ी संख्या में दिखाई देना क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन का संकेत हो सकता है। साथ ही यह पक्षी पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकता है।
पक्षी प्रेमियों के लिए खास मौका
ग्रैंडाला पक्षियों के दिखने की खबर से मुनस्यारी आने वाले पक्षी प्रेमियों में उत्साह बढ़ गया है। कई लोग इस दुर्लभ पक्षी को देखने और इसकी तस्वीरें लेने के लिए क्षेत्र का रुख कर सकते हैं।
वन विभाग और स्थानीय विशेषज्ञों की नजर भी अब इस क्षेत्र पर है, ताकि पक्षियों की गतिविधियों और उनके संरक्षण को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

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