
देहरादून। महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। खाने-पीने की जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ने से गृहणियों से लेकर मध्यम वर्ग तक की चिंता बढ़ गई है। सबसे अधिक असर चीनी और आटे के बढ़ते दामों का देखने को मिल रहा है। इसके अलावा सरसों तेल, रिफाइंड और विभिन्न दालों की कीमतों में भी तेजी आने से रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च बढ़ गया है। बाजार में लगातार बढ़ रही कीमतों के कारण आम उपभोक्ता अब जरूरी सामान खरीदने से पहले कई बार सोचने को मजबूर है।
महंगाई की सबसे बड़ी मार इस समय चीनी की कीमतों पर दिखाई दे रही है। महज 12 दिन के भीतर फुटकर बाजार में चीनी के दाम में बड़ा उछाल आया है। करीब 12 दिन पहले तक फुटकर दुकानों पर चीनी 48 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव में उपलब्ध थी। इसके बाद इसकी कीमत बढ़कर 55 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। अब कई दुकानों पर ग्राहकों को चीनी के लिए करीब 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक चुकाने पड़ रहे हैं। कम समय में कीमतों में हुए इस बदलाव ने उपभोक्ताओं को हैरान कर दिया है।
48 से सीधे 70 रुपये तक पहुंचा भाव
चीनी की कीमत में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने घरेलू बजट पर सीधा असर डाला है। पहले जहां परिवार महीने भर की जरूरत के लिए आसानी से चीनी खरीद लेते थे, वहीं अब इसकी कीमत बढ़ने के कारण खर्च का हिसाब बदलना पड़ रहा है। चाय, दूध, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी का इस्तेमाल होने के कारण इसकी कीमत बढ़ने का असर कई दूसरी चीजों पर भी पड़ता है।
खरीदारों का कहना है कि कुछ दिन पहले तक जिस चीनी के लिए 48 रुपये प्रति किलोग्राम खर्च करने पड़ रहे थे, उसके लिए अब 70 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि कीमतों में इतनी तेजी से बदलाव आम परिवार के लिए चिंता का विषय है। खासकर सीमित आय वाले परिवारों को बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ रहा है।
आटे के दाम बढ़ने से भी परेशानी
चीनी के साथ आटे की कीमत में तेजी ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आटा प्रत्येक परिवार की रोजमर्रा की जरूरत है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर मासिक घरेलू खर्च पर पड़ता है। रोटी आम भारतीय परिवार के भोजन का प्रमुख हिस्सा है और इसलिए आटे के दाम बढ़ने से बचत की गुंजाइश और कम हो जाती है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि खाद्य वस्तुओं के दाम एक साथ बढ़ने से रसोई का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है। पहले ही बिजली, गैस, परिवहन और अन्य जरूरी खर्चों का बोझ परिवारों पर है। अब खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
तेल और दालों के दाम भी बढ़े
रसोई में इस्तेमाल होने वाले सरसों तेल और रिफाइंड की कीमतों में भी बढ़ोतरी की बात सामने आ रही है। तेल की कीमत बढ़ने का असर लगभग हर घर के भोजन पर पड़ता है। सब्जी बनाने से लेकर पकौड़े और अन्य व्यंजन तैयार करने तक तेल जरूरी है। ऐसे में तेल महंगा होने पर परिवारों का मासिक खाद्य खर्च बढ़ना स्वाभाविक है।
इसी तरह दालों की कीमतों में भी बढ़ोतरी से लोगों की परेशानी बढ़ी है। दाल आम परिवार के भोजन में प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है। इसकी कीमत बढ़ने पर लोग या तो खरीदारी की मात्रा कम करते हैं या फिर कम कीमत वाली दूसरी दालों का विकल्प तलाशते हैं। हालांकि, इससे भोजन की गुणवत्ता और पसंद दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
गृहणियों की बढ़ी चिंता
रसोई का बजट संभालने वाली गृहणियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमित आय में जरूरी सामान उपलब्ध कराना है। एक ओर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर घरेलू आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ती। ऐसे में परिवारों को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ती है।
गृहणियों का कहना है कि पहले महीने की शुरुआत में खरीदे जाने वाले सामान की कीमत और अब की कीमत में काफी अंतर महसूस हो रहा है। चीनी, आटा, तेल और दाल जैसी बुनियादी वस्तुओं के दाम बढ़ने से बचत प्रभावित हो रही है। कई परिवार अब जरूरत के हिसाब से ही सामान खरीद रहे हैं।
छोटे दुकानदार भी परेशान
खुदरा दुकानदारों के लिए भी कीमतों में तेजी चुनौती बन रही है। थोक बाजार से सामान महंगा मिलने के कारण उन्हें खुदरा कीमतों में बदलाव करना पड़ता है। वहीं, ग्राहक अचानक बढ़ी कीमतों को लेकर दुकानदारों से सवाल करते हैं। दुकानदारों का कहना है कि बाजार भाव में बदलाव होने पर उन्हें भी उसी के अनुसार बिक्री मूल्य तय करना पड़ता है।
व्यापारियों के मुताबिक खाद्य वस्तुओं के दाम में लगातार उतार-चढ़ाव से ग्राहकों की खरीदारी पर भी असर पड़ता है। लोग पहले की तुलना में कीमतों की जानकारी लेने के बाद ही सामान खरीद रहे हैं और कई बार महंगी वस्तुओं की मात्रा कम कर देते हैं।
आने वाले दिनों पर टिकी नजर
चीनी समेत अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से अब उपभोक्ताओं की नजर बाजार के अगले रुख पर है। आमजन को उम्मीद है कि कीमतों में जल्द स्थिरता आएगी और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं उचित दाम पर उपलब्ध होंगी।
फिलहाल चीनी के दाम में 48 रुपये से बढ़कर 55 और फिर करीब 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने से महंगाई की चिंता और गहरी हो गई है। आटा, तेल और दालों के बढ़ते दामों के बीच आम परिवार के लिए रसोई का खर्च संभालना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। यदि कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में घरेलू बजट पर इसका असर और अधिक दिखाई दे सकता है।





