उत्तराखंड

Kedarnath यात्रा ने 13 साल बाद फिर पकड़ी रफ्तार, श्रद्धालुओं की संख्या पहुंची 20 लाख के करीब

Kavita2
16 Jun 2026 5:31 PM IST
Kedarnath यात्रा ने 13 साल बाद फिर पकड़ी रफ्तार, श्रद्धालुओं की संख्या पहुंची 20 लाख के करीब
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Uttarakhand उत्तराखंड : 16-17 जून 2013 की विनाशकारी केदारनाथ आपदा आज भी लोगों के मन में ताजा है, जब चौराबाड़ी ताल के टूटने से आए सैलाब ने केदारपुरी को पूरी तरह तबाह कर दिया था। उस समय यह कल्पना करना भी कठिन था कि केदारनाथ यात्रा एक बार फिर अपने पुराने स्वरूप में लौट पाएगी। लेकिन 13 वर्षों बाद स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और केदारनाथ धाम ने न केवल खुद को पुनः स्थापित किया है, बल्कि आस्था और बेहतर प्रबंधन के चलते नई ऊंचाइयों को भी छुआ है।

आपदा से पहले जहां हर वर्ष लगभग चार से पांच लाख श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 20 लाख के आसपास पहुंच रही है। इस बदलाव को श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था के साथ-साथ पुनर्निर्माण कार्यों और बेहतर व्यवस्थाओं का परिणाम माना जा रहा है।

इस वर्ष यात्रा शुरू होने के मात्र डेढ़ महीने के भीतर ही 12 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है और यात्रा के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

आपदा के बाद केदारनाथ क्षेत्र में व्यापक पुनर्निर्माण कार्य किए गए, जिनमें मंदिर परिसर, पैदल मार्ग, आवासीय सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था शामिल हैं। इन प्रयासों ने यात्रा को पहले की तुलना में अधिक सुगम और सुरक्षित बनाया है।

प्रशासन द्वारा भीड़ प्रबंधन, ऑनलाइन पंजीकरण और मौसम की निगरानी जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल रहा है। इसके अलावा, आपातकालीन सेवाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सुधार किया गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, केदारनाथ यात्रा में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या ने क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति दी है। होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केदारनाथ धाम की बढ़ती लोकप्रियता न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि आपदा के बाद किए गए पुनर्निर्माण कार्य सफल साबित हुए हैं।

आज केदारनाथ यात्रा एक बार फिर देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बन चुकी है।

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