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Haridwar हरिद्वार। कांवड़ यात्रा-2026 को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तराखंड प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। इस वर्ष यात्रा के दौरान करीब 10 हजार पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा, केंद्रीय अर्धसैनिक बल (सीपीएमएफ), एसडीआरएफ, एटीएस, पीएसी, जल पुलिस, डॉग स्क्वॉड, बम निरोधक दस्ता और होमगार्ड की टीमें भी विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर तैनात रहेंगी। अधिकारियों का कहना है कि इस बार ड्रोन और अत्याधुनिक सीसीटीवी नेटवर्क के माध्यम से पूरे कांवड़ मेले की निगरानी की जाएगी।
आईजी नीलेश आनंद भरणे ने कहा कि कांवड़ यात्रा से पहले सभी अधिकारियों और जवानों की विस्तृत ब्रीफिंग की गई है। यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित बलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि हर कांवड़ यात्री हरिद्वार से जल लेकर सुरक्षित रूप से अपने-अपने शिवालयों तक पहुंच सके। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार भी कांवड़ियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए पूरे रेंज में करीब 10 हजार पुलिस अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए हैं। हरिद्वार के अलावा देहरादून, ऋषिकेश, पौड़ी के नीलकंठ महादेव और टिहरी में भी विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। आईजी ने आगे बताया कि मानसून के मद्देनजर जल पुलिस, एसडीआरएफ और प्रशिक्षित गोताखोरों को सभी प्रमुख घाटों पर तैनात किया गया है। उनके उपकरणों की जांच और आवश्यक प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
एडीजी उत्तराखंड वी मुरुगेसन ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न कराना है, साथ ही स्थानीय लोगों को भी किसी प्रकार की असुविधा न हो। सभी अधिकारियों और जवानों को विस्तृत ब्रीफिंग दी गई है और आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त पुलिस बल, पैरा मिलिट्री फोर्स, पीएसी और एसडीआरएफ की तैनाती की गई है। उन्होंने कांवड़ यात्रियों से अपील की कि वे यात्रा के दौरान शांति और अनुशासन बनाए रखें और किसी प्रकार का उपद्रव न करें। उन्होंने कहा कि बैट, बॉल, त्रिशूल जैसे संभावित खतरनाक सामान की जांच की जाएगी और ऐसे सामान को यात्रा में ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा डीजे की ध्वनि सीमा को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा और निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि स्तर की अनुमति नहीं होगी।
एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि कांवड़ यात्रा के लिए करीब 10 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, जिसमें उत्तराखंड पुलिस के अलावा सीपीएमएफ, एसडीआरएफ, एटीएस और होमगार्ड के जवान शामिल हैं। प्रशासन की प्राथमिकता कांवड़ियों की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और पूरे मेला प्रबंधन को बेहतर तरीके से संचालित करना है। इस बार कंट्रोल रूम को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया गया है, जहां से ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे मेले की लगातार निगरानी की जाएगी। साथ ही, दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे पर कांवड़ यात्रा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी और इस प्रतिबंध का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि पूर्व में हुई कुछ घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत की गई है। एटीएस, डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ता संवेदनशील स्थानों पर तैनात रहेगा। प्रशासन ने पूरे कांवड़ मेले को 18 सुपर जोन, 40 जोन और लगभग 160 सेक्टरों में विभाजित किया है। सभी जोनल पुलिस अधिकारियों और सेक्टर मजिस्ट्रेटों के साथ समन्वय बैठकें पूरी हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ भी कई दौर की बैठकें हुई हैं और दोनों राज्यों की पुलिस कई स्थानों पर संयुक्त रूप से तैनात रहेगी। कंट्रोल रूम में भी दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच समन्वय रहेगा। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी कांवड़ियों की संख्या चार करोड़ से अधिक पहुंच सकती है।
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