उत्तराखंड

चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस में खींचतान

Kavita2
6 Oct 2026 9:41 AM IST
चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस में खींचतान
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देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस के भीतर एक बार फिर गुटबाजी और नेतृत्व के सवाल पर हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा की ओर से यात्रा रोकने के आग्रह के बावजूद अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ सोमवार को जारी रखी। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी हाईकमान भी सक्रिय हो गया है और रावत से संगठनात्मक समन्वय बनाए रखने को कहा गया है।

कुमारी सैलजा ने 1 अक्टूबर को हरीश रावत को पत्र लिखकर उनकी प्रस्तावित यात्रा को आगे नहीं बढ़ाने की सलाह दी थी। पार्टी नेतृत्व का तर्क था कि विधानसभा चुनाव से पहले सभी नेताओं को व्यक्तिगत अभियानों के बजाय सामूहिक कार्यक्रमों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि कार्यकर्ताओं और जनता के बीच एकजुटता का संदेश जाए। इसके बावजूद रावत ने जसपुर से हल्द्वानी तक अपनी यात्रा का कार्यक्रम जारी रखा।

हरीश रावत की यात्रा सोमवार को रामनगर पहुंची, जहां उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। रावत की इस सक्रियता को उनके समर्थक जनता से संवाद और कांग्रेस संगठन को सक्रिय करने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि पार्टी के कुछ नेताओं को आशंका है कि अलग-अलग कार्यक्रमों से चुनाव के पहले संगठन में समानांतर नेतृत्व का संदेश जा सकता है।

विवाद बढ़ने के बाद हरीश रावत ने पार्टी हाईकमान के सामने अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा है। वह यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि उनकी यात्रा पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि कांग्रेस के पक्ष में जनसमर्थन जुटाने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा है कि यात्रा का मकसद उत्तराखंड कांग्रेस को चुनाव से पहले सक्रिय करना है और वह पार्टी के अन्य अभियानों में भी शामिल होने को तैयार हैं।

रावत यात्रा नहीं रोकने के पीछे दो प्रमुख तर्क दे रहे हैं। पहला, उनके अनुसार यात्रा को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले से कार्यक्रम तय हो चुके थे और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तथा समर्थक उससे जुड़ गए थे। दूसरा, उनका मानना है कि जनसंवाद के जरिए चुनाव से पहले कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का अवसर मिल रहा है। हालांकि पार्टी नेतृत्व का जोर इस बात पर है कि ऐसे सभी कार्यक्रम संगठन के साथ समन्वय में होने चाहिए।

कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल ने भी हरीश रावत से बातचीत की है। पार्टी की ओर से उन्हें स्पष्ट संदेश दिया गया है कि उत्तराखंड में व्यक्तिगत राजनीतिक अभियान के बजाय सामूहिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाए। पार्टी नेतृत्व की चिंता है कि अलग-अलग नेताओं की समानांतर यात्राएं या अभियान चुनाव से पहले अंदरूनी मतभेदों को ज्यादा उभार सकते हैं।

उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने भी कहा है कि हरीश रावत अपनी बात पार्टी के सामने रखना चाहते हैं। उनके मुताबिक वह 7 या 8 अक्टूबर को रावत से बातचीत करेंगी। इस संभावित बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि आगे रावत की यात्रा किस रूप में जारी रहेगी और पार्टी सामूहिक चुनावी कार्यक्रमों को लेकर क्या रणनीति अपनाती है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी उत्तराखंड में चुनाव से पहले संगठन की स्थिति को लेकर गंभीर हैं। पार्टी हाईकमान नहीं चाहता कि चुनाव के दौरान व्यक्तिगत नेतृत्व को लेकर कोई ऐसी स्थिति बने जिससे भाजपा को कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर हमला करने का मौका मिले। इसलिए संगठन सभी वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाने और साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ने पर जोर दे रहा है।

हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। वह प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। उत्तराखंड में उनकी अपनी राजनीतिक पकड़ और समर्थक आधार है। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व उन्हें नजरअंदाज भी नहीं कर सकता, लेकिन साथ ही चुनाव से पहले किसी तरह की समानांतर रणनीति से बचना चाहता है।

रावत के समर्थकों का तर्क है कि उनकी यात्रा पार्टी को नुकसान पहुंचाने के बजाय कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भर रही है। उनका कहना है कि वरिष्ठ नेता के मैदान में उतरने से कांग्रेस को जनता के बीच संपर्क बढ़ाने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर संगठनात्मक अनुशासन की बात करने वाले नेताओं का मानना है कि चुनाव के पहले सभी कार्यक्रम प्रदेश नेतृत्व और प्रभारी के साथ मिलकर तय होने चाहिए।

उत्तराखंड कांग्रेस पहले भी कई बार गुटबाजी से जूझ चुकी है। विधानसभा चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री चेहरे, टिकट वितरण और संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर अलग-अलग नेताओं के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले पार्टी हाईकमान इस तरह की परिस्थितियों को दोहराने से बचना चाहता है।

कांग्रेस के सामने राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा को चुनौती देने की बड़ी जिम्मेदारी है। भाजपा पहले ही संगठनात्मक तैयारी तेज कर चुकी है और उम्मीदवारों तथा सीटों के स्तर पर रणनीति बनाने में जुटी है। ऐसे में कांग्रेस के लिए अंदरूनी मतभेदों को जल्द सुलझाना जरूरी माना जा रहा है।

अब सभी की नजर हरीश रावत और कुमारी सैलजा के बीच प्रस्तावित बातचीत पर है। यदि दोनों पक्ष किसी साझा रणनीति पर सहमत होते हैं तो विवाद को जल्द शांत किया जा सकता है। वहीं अगर यात्रा और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर मतभेद बने रहते हैं तो चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने नई मुश्किल खड़ी हो सकती है।

फिलहाल हरीश रावत अपनी जनसंवाद यात्रा के जरिए मैदान में सक्रिय हैं और पार्टी हाईकमान संगठनात्मक एकता पर जोर दे रहा है। आने वाले कुछ दिनों में होने वाली बातचीत से यह तय होगा कि उत्तराखंड कांग्रेस चुनावी तैयारी में एकजुट होकर आगे बढ़ती है या आंतरिक खींचतान अभी कुछ और समय तक जारी रहती है।

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