उत्तराखंड

निजी कंपनी की दवाई लिखने के एवज में मिलता है कमीशन, नाम की रह गयी मेडिकल कॉलेज

Admin2
8 May 2022 6:29 PM IST
निजी कंपनी की दवाई लिखने के एवज में मिलता है कमीशन, नाम की रह गयी मेडिकल कॉलेज
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जन औषधि केंद्र भी खुला है, लेकिन वहां भी दवाइयों का टोटा है

जनता से रिश्ता वेबडेस्क : उत्तराखंड के अल्मोड़ा में मेडिकल कॉलेज खुल तो गया, लेकिन मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है. कुछ डॉक्टरों के आने से राहत तो है लेकिन दवाइयां अब भी निजी दुकानों से खरीदनी पड़ रही है. हॉस्पिटल परिसर में जन औषधि केंद्र भी खुला है, लेकिन वहां भी दवाइयों का टोटा है.मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा का कहना है कि अधिकांश दवाइयां अस्पताल में हैं. कुछ दवाइयां बाहर से लिखी जाती है. वह कहते हैं, '140 से अधिक दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध हैं. अगर कोई डॉक्टर अस्पताल में होने के बावजूद बाहर से दवाई लिखेगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी.

अस्पताल में इलाज करा रहे मरीज प्रमोद कुमार का कहना है कि डॉक्टर ने 4 दवाई लिखी है, जिसमें से 3 दवाई निजी दुकान की है, जबकि अस्पताल से एक ही दवाई मिली. मेरी ही नहीं अधिकांश मरीजों की दवाई निजी अस्पताल से लिखी जाती है, जो काफी महंगी होती है.निजी कंपनी की दवाई लिखने के एवज में कमीशन मिलता है
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