उत्तराखंड

उत्तराखंड हाई कोर्ट स्थानांतरण विवाद में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

Saba Naaz
15 July 2026 6:31 PM IST
उत्तराखंड हाई कोर्ट स्थानांतरण विवाद में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
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नई दिल्ली। उत्तराखंड हाई कोर्ट को नैनीताल से स्थानांतरित करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें स्थानांतरण को लेकर जनमत संग्रह कराने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह का आदेश देना अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि अदालतों का काम प्रशासनिक फैसलों पर जनमत संग्रह कराना नहीं है। पीठ ने हाई कोर्ट के चार मई 2024 के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जे बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की संयुक्त पीठ ने कहा कि किसी भी संस्था के स्थानांतरण या प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े फैसले सरकार और संबंधित प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। अदालत का कार्य कानून की व्याख्या करना और न्यायिक मामलों का निपटारा करना है, न कि जनता की राय लेकर प्रशासनिक निर्णय लेना।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के रुख पर असहमति जताई। पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट द्वारा जनमत संग्रह कराने का निर्देश देना उचित नहीं था और ऐसा आदेश न्यायिक अधिकारों की सीमा से बाहर है।

दरअसल, उत्तराखंड हाई कोर्ट को नैनीताल से किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग लंबे समय से चर्चा में रही है। इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी राय रही है। कुछ लोग बेहतर सुविधाओं और पहुंच के आधार पर स्थानांतरण की मांग करते रहे हैं, जबकि कई लोग नैनीताल में ही हाई कोर्ट बनाए रखने के पक्ष में हैं।

इसी विवाद के बीच उत्तराखंड हाई कोर्ट ने चार मई 2024 को एक आदेश जारी करते हुए स्थानांतरण के मुद्दे पर जनमत संग्रह कराने की बात कही थी। इस आदेश को चुनौती दी गई और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि न्यायपालिका को अपनी संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहकर काम करना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट या किसी अन्य न्यायालय के पास प्रशासनिक फैसलों के लिए जनमत संग्रह कराने का अधिकार नहीं है।

पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट के स्थानांतरण जैसे विषयों पर फैसला सरकार और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं को लेना होता है। न्यायालय केवल यह देख सकता है कि कोई निर्णय कानून के अनुरूप है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद उत्तराखंड हाई कोर्ट शिफ्टिंग मामले में अब गेंद सरकार और संबंधित प्रशासनिक संस्थाओं के पाले में चली गई है। शीर्ष अदालत के आदेश से यह साफ हो गया है कि हाई कोर्ट के स्थानांतरण को लेकर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बजाय प्रशासनिक स्तर पर लिया जाएगा।

इस फैसले को न्यायपालिका और प्रशासनिक अधिकारों के बीच संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से यह संदेश गया है कि अदालतें संवैधानिक सीमाओं के तहत काम करती हैं और नीतिगत या प्रशासनिक फैसलों में उनकी भूमिका सीमित होती है।

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