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देहरादून: उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया है। मंत्री द्वारा पति के खिलाफ गंभीर आरोपों में मामला दर्ज कराने के बाद साहू ने वीडियो जारी कर जवाब दिया है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को झूठा बताते हुए रेखा आर्या पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जांच कराने की मांग की। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रेखा आर्या ने गुरुवार को देहरादून के कैंट थाने में शिकायत देकर पति पर उत्पीड़न, मारपीट, जातिसूचक अपमान और जान से मारने की साजिश जैसे आरोप लगाए थे। शिकायत में कथित जालसाजी का मामला भी उठाया गया है। उन्होंने एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। मामला दर्ज होने का अर्थ आरोप सिद्ध होना नहीं है; इनकी सत्यता जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।
इसके अगले दिन शुक्रवार को गिरधारी लाल साहू ने अपना वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि पत्नी की शिकायत में लगाए गए आरोप निराधार हैं। साहू ने दावा किया कि रेखा आर्या के राजनीतिक सफर में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने चुनाव प्रचार, लोगों से समर्थन मांगने और लंबे समय तक साथ देने का उल्लेख किया। इसी दौरान उन्होंने पत्नी की पहले की परिस्थितियों को लेकर अपमानजनक टिप्पणी भी की और उनकी वर्तमान राजनीतिक स्थिति को अपने सहयोग का परिणाम बताया।
साहू ने रेखा आर्या की ओर से सामने रखी गई कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग को एआई से तैयार बताया। उनका आरोप है कि इसका इस्तेमाल उन्हें गलत तरीके से फंसाने और परिवार में विवाद पैदा करने के लिए किया गया है। हालांकि, ऑडियो के कृत्रिम रूप से बनाए जाने की पुष्टि किसी उपलब्ध फोरेंसिक रिपोर्ट से नहीं हुई है। इसलिए रिकॉर्डिंग को वास्तविक या फर्जी बताने वाले दोनों दावों का परीक्षण जरूरी है। केवल किसी पक्ष के बयान से उसकी प्रामाणिकता तय नहीं की जा सकती।
वीडियो में साहू ने मंत्री से अपनी शिकायत और बयान वापस लेने की अपील की। उन्होंने धार्मिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि आरोप वापस नहीं लेने पर ईश्वर उनसे जवाबदेही तय करेंगे। उन्होंने पत्नी से अपने आरोपों पर दोबारा विचार करने को भी कहा। शिकायत वापस लेने की मांग के बावजूद दर्ज मामले की स्थिति और उसमें आगे होने वाली कार्रवाई संबंधित प्रक्रिया से तय होगी। फिलहाल शिकायत वापस लिए जाने की कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़ा है। साहू ने आरोप लगाया कि रेखा आर्या ने अवैध रूप से लगभग 210 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई है। उन्होंने दावा किया कि इस विषय में पहले भी मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। साहू ने किसी एजेंसी से जांच कराने का अनुरोध किया और आगे विस्तृत जानकारी सामने रखने की बात कही। उपलब्ध रिपोर्ट में उनके इस वित्तीय आरोप की पुष्टि करने वाला जांच निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं है।
मंत्री के खिलाफ संपत्ति संबंधी आरोप और पति के खिलाफ दर्ज आपराधिक शिकायत अलग-अलग विषय हैं। एक पक्ष के प्रत्यारोप से दूसरे पक्ष की शिकायत अपने आप गलत साबित नहीं होती। उसी तरह मामला दर्ज होने से आरोपी का दोष तय नहीं हो जाता। दोनों पक्षों के कथनों को संबंधित दस्तावेजों, रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों के साथ परखा जाना आवश्यक होगा। सार्वजनिक बयानबाजी के बीच यही अंतर खबर को आरोपों तक सीमित रखने और किसी को समय से पहले दोषी बताने से बचाता है।
मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस ने आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कथित ऑडियो की फोरेंसिक जांच कराने का मुद्दा भी उठाया गया है, ताकि रिकॉर्डिंग की वास्तविकता स्पष्ट हो सके। मंत्री के पति की ओर से लगाए गए संपत्ति संबंधी आरोपों ने विवाद को पारिवारिक दायरे से आगे राजनीतिक चर्चा में पहुंचा दिया है।
फिलहाल प्रमुख घटनाक्रम रेखा आर्या की शिकायत पर मामला दर्ज होना और उसके बाद साहू का वीडियो जवाब है। पति के नए आरोपों पर मंत्री का विस्तृत प्रत्युत्तर उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है। आगे जांच से स्पष्ट होगा कि शिकायत में उठाए गए आरोपों, ऑडियो रिकॉर्डिंग और संपत्ति संबंधी दावों में क्या तथ्य हैं। तब तक दोनों पक्षों के आरोपों को उनके नाम के साथ प्रस्तुत करना जरूरी है।
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