उत्तराखंड

जोंक से इलाज कितना असरदार जानें लीच थेरेपी के फायदे और सावधानियां

nidhi
19 Aug 2026 12:22 PM IST
जोंक से इलाज कितना असरदार जानें लीच थेरेपी के फायदे और सावधानियां
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जोंक की उल्टी नहीं बल्कि लार में छिपा है इलाज का राज जानें लीच थेरेपी

नई दिल्ली: पुराने समय से चली आ रही लीच थेरेपी (Leech Therapy) यानी जोंक चिकित्सा एक बार फिर चर्चा में है। आयुर्वेद में इसे जलौका चिकित्सा के नाम से जाना जाता है। दावा किया जाता है कि जोंक की लार में मौजूद कुछ तत्व रक्त प्रवाह को बेहतर करने और सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल खासतौर पर वैरिकोज वेन्स, घाव भरने और कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में सहायक उपचार के रूप में किया जाता है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लीच थेरेपी को हर बीमारी का पक्का इलाज नहीं माना जा सकता। इसे किसी भी गंभीर बीमारी में डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं अपनाना चाहिए।
क्या होती है लीच थेरेपी?
लीच थेरेपी में औषधीय जोंक (Medicinal Leech) को शरीर के प्रभावित हिस्से पर लगाया जाता है। जोंक त्वचा से थोड़ी मात्रा में खून चूसती है और उसकी लार में मौजूद कुछ जैव सक्रिय तत्व रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।
जोंक की लार में हिरुडिन (Hirudin) नामक तत्व पाया जाता है, जो खून को जमने से रोकने वाला प्राकृतिक पदार्थ है। इसके अलावा इसमें सूजन कम करने और रक्त प्रवाह को प्रभावित करने वाले कई अन्य तत्व भी पाए जाते हैं।
वैरिकोज वेन्स में कैसे मदद करती है?
वैरिकोज वेन्स में पैरों की नसें फूल जाती हैं और उनमें रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। लीच थेरेपी से प्रभावित क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर करने और सूजन कम करने में कुछ मरीजों को राहत मिल सकती है। हालांकि यह नसों की मूल समस्या को हमेशा खत्म नहीं करती। वैरिकोज वेन्स के स्थायी इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह और आधुनिक उपचार विकल्पों की जरूरत पड़ सकती है।
चर्म रोगों में इस्तेमाल
कुछ जगहों पर लीच थेरेपी का उपयोग त्वचा संबंधी समस्याओं, पुराने घाव और न भरने वाले अल्सर में सहायक उपचार के तौर पर किया जाता है। माना जाता है कि जोंक की लार में मौजूद तत्व सूजन कम करने और घाव भरने की प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं।
लेकिन हर तरह के चर्म रोग में यह प्रभावी हो, ऐसा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है।
यूरिक एसिड और गठिया में क्या असर?
कुछ लोग दावा करते हैं कि लीच थेरेपी यूरिक एसिड और गठिया की समस्या में राहत देती है। हालांकि इसके लिए पर्याप्त मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं कि जोंक चिकित्सा यूरिक एसिड को सामान्य कर देती है।
यूरिक एसिड बढ़ने पर खान-पान, दवाएं और डॉक्टर की सलाह सबसे महत्वपूर्ण होती है।
कैसे की जाती है लीच थेरेपी?
लीच थेरेपी आमतौर पर प्रशिक्षित विशेषज्ञ द्वारा की जाती है:
सबसे पहले प्रभावित हिस्से को साफ किया जाता है।
औषधीय जोंक को उस स्थान पर लगाया जाता है।
जोंक कुछ समय तक खून चूसती है।
पेट भरने के बाद वह खुद अलग हो जाती है।
बाद में घाव की सफाई और ड्रेसिंग की जाती है।
एक जोंक आमतौर पर कुछ मिलीलीटर खून ले सकती है और उपचार का समय मरीज की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।
लीच थेरेपी के नुकसान भी हैं
लीच थेरेपी हमेशा सुरक्षित हो, ऐसा नहीं है। इसके कुछ जोखिम हो सकते हैं:
ज्यादा देर तक खून बहना
संक्रमण का खतरा
एलर्जी या खुजली
त्वचा पर निशान
गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर परेशानी
इसलिए जोंक चिकित्सा केवल प्रशिक्षित और स्वच्छ प्रक्रिया के तहत ही करानी चाहिए।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
इन लोगों को लीच थेरेपी से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए:
जिनको खून पतला करने वाली दवाएं चल रही हों
जिनको ब्लीडिंग डिसऑर्डर हो
एनीमिया की समस्या हो
कमजोर इम्युनिटी वाले मरीज हों
लीच थेरेपी को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ रही है, लेकिन इसे किसी भी बीमारी का चमत्कारी इलाज समझना सही नहीं है। यह कुछ स्थितियों में सहायक उपचार हो सकती है, लेकिन सही बीमारी के लिए सही चिकित्सा जरूरी है।
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