उत्तराखंड

नेत्रदान की मुहिम से कुमाऊं में रोशनी की उम्मीद

Kavita2
26 Aug 2026 2:21 PM IST
नेत्रदान की मुहिम से कुमाऊं में रोशनी की उम्मीद
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हल्द्वानी। कुछ लोग अपने पेशे को सिर्फ जिम्मेदारी मानकर निभाते हैं, जबकि कुछ लोग अपने काम को समाज के लिए मिशन बना लेते हैं। डॉ. जीएस तितियाल ने नेत्रदान को इसी तरह का संकल्प बना लिया। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के साथ उसकी आंखों की रोशनी भी खत्म नहीं होनी चाहिए। अगर मृत्यु के बाद वही आंखें किसी जरूरतमंद की जिंदगी में उजाला ला सकें तो इससे बड़ा सामाजिक योगदान शायद ही कुछ हो।

इसी सोच को डॉ. तितियाल ने केवल विचार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जमीन पर उतारने के लिए लगातार प्रयास किया। कुमाऊं क्षेत्र में लंबे समय तक आई बैंक की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में उन्होंने इस कमी को चुनौती के रूप में लिया और स्वयं आगे बढ़कर नेत्रदान की प्रक्रिया, कॉर्निया संरक्षण और आई बैंक संचालन से जुड़ा प्रशिक्षण हासिल किया। उनके प्रयासों का परिणाम वर्ष 2022 में सामने आया, जब हल्द्वानी स्थित डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय (एसटीएच) में कुमाऊं का पहला अर्जुन आई बैंक स्थापित किया गया।

नेत्रदान को लेकर बदली सोच

नेत्रदान को लेकर समाज में आज भी कई तरह की भ्रांतियां और झिझक देखने को मिलती है। कई परिवार मृत्यु के बाद आंखें दान करने के निर्णय को लेकर असहज महसूस करते हैं। ऐसे माहौल में डॉ. तितियाल का प्रयास लोगों को यह समझाने का रहा है कि मृत्यु के बाद अंगदान और नेत्रदान किसी व्यक्ति के जीवन का अंत नहीं, बल्कि किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में नई शुरुआत बन सकता है।

उनकी सोच का केंद्र यही है कि आंखों की रोशनी को मृत्यु के साथ समाप्त नहीं होना चाहिए। यदि किसी मृत व्यक्ति की आंखों से प्राप्त कॉर्निया किसी दृष्टिबाधित व्यक्ति को रोशनी दे सके तो यह उस परिवार के लिए भी गर्व की बात हो सकती है।

कुमाऊं में नहीं था आई बैंक

डॉ. तितियाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कुमाऊं में नेत्रदान से जुड़ी व्यवस्थित सुविधा उपलब्ध नहीं थी। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद नेत्रदान की प्रक्रिया को पूरा करने, कॉर्निया निकालने, उसे सुरक्षित रखने और जरूरतमंद मरीज तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित टीम तथा उचित चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता होती है।

आई बैंक की सुविधा के अभाव में नेत्रदान की इच्छा रखने वाले लोगों और उनके परिवारों को भी कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस कमी को दूर करने के लिए डॉ. तितियाल ने खुद पहल की।

उन्होंने संबंधित प्रशिक्षण हासिल किया और इसके बाद आई बैंक स्थापित करने की दिशा में काम शुरू किया। अस्पताल प्रशासन और अन्य संबंधित स्तरों पर प्रयासों के बाद वर्ष 2022 में एसटीएच में अर्जुन आई बैंक की स्थापना संभव हो सकी।

2022 में मिली बड़ी उपलब्धि

हल्द्वानी के एसटीएच में अर्जुन आई बैंक की स्थापना कुमाऊं के स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम माना गया। इससे क्षेत्र में नेत्रदान को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने और जरूरतमंद मरीजों को कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में रास्ता खुला।

आई बैंक केवल कॉर्निया एकत्र करने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पूरी चिकित्सा प्रक्रिया काम करती है। मृत्यु के बाद निर्धारित समय के भीतर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसके बाद प्राप्त कॉर्निया की चिकित्सकीय जांच, सुरक्षित संरक्षण और जरूरतमंद मरीज तक पहुंचाने की प्रक्रिया होती है।

ऐसी व्यवस्था के लिए प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम, तकनीकी संसाधन और जागरूकता—तीनों का होना जरूरी है। डॉ. तितियाल ने इसी पूरी व्यवस्था को विकसित करने पर जोर दिया।

मृत्यु के बाद भी किसी की दुनिया हो रोशन

डॉ. तितियाल के प्रयासों के पीछे एक भावनात्मक सोच भी है। उनका मानना है कि यदि किसी व्यक्ति की आंखें मृत्यु के बाद किसी दूसरे इंसान की जिंदगी में रोशनी ला सकती हैं तो यह मानवता की सबसे सुंदर मिसाल है।

किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खोना बेहद कठिन होता है। ऐसे समय में नेत्रदान का निर्णय लेना आसान नहीं होता। लेकिन यही फैसला किसी दृष्टिबाधित व्यक्ति के लिए जीवन बदलने वाला साबित हो सकता है।

इसी संदेश को समाज तक पहुंचाना डॉ. तितियाल के अभियान का अहम हिस्सा रहा है। वह लोगों को नेत्रदान के वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व के बारे में जागरूक करने की कोशिश करते रहे हैं।

जागरूकता बढ़ाना भी चुनौती

आई बैंक की स्थापना के साथ ही एक और बड़ी चुनौती सामने आती है—लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करना। केवल सुविधा उपलब्ध होने से नेत्रदान की संख्या नहीं बढ़ती। इसके लिए परिवारों को सही जानकारी देना और उनकी भ्रांतियों को दूर करना जरूरी है।

कई लोगों को यह आशंका रहती है कि नेत्रदान से मृत व्यक्ति के अंतिम संस्कार या धार्मिक परंपराओं में बाधा आएगी। जबकि चिकित्सकीय प्रक्रिया इस तरह से की जाती है कि सामान्य रूप से अंतिम संस्कार किया जा सके।

जागरूकता के जरिए लोगों को यह समझाने की जरूरत है कि नेत्रदान किसी की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ नहीं, बल्कि मानव सेवा का माध्यम है।

जरूरतमंदों के लिए उम्मीद

कॉर्निया संबंधी दृष्टिबाधित लोगों के लिए अर्जुन आई बैंक उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है। कॉर्निया की समस्या के कारण दृष्टि खो चुके मरीजों के लिए प्रत्यारोपण एक महत्वपूर्ण उपचार विकल्प हो सकता है।

कुमाऊं में इस तरह की सुविधा उपलब्ध होने से स्थानीय मरीजों को बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के लिए दूर के बड़े शहरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इससे क्षेत्र में नेत्रदान की संस्कृति को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

एक व्यक्ति की पहल से शुरू हुई मुहिम

डॉ. जीएस तितियाल की कहानी इस बात का उदाहरण है कि किसी व्यवस्था की कमी को लेकर केवल शिकायत करने के बजाय यदि कोई व्यक्ति पहल करे तो बदलाव की शुरुआत की जा सकती है।

कुमाऊं में आई बैंक नहीं था। उन्होंने इसे समस्या माना, लेकिन वहीं रुकने के बजाय समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया। प्रशिक्षण लिया, व्यवस्था खड़ी करने का प्रयास किया और आखिरकार वर्ष 2022 में एसटीएच में अर्जुन आई बैंक स्थापित हुआ।

आज उनका उद्देश्य केवल आई बैंक की स्थापना तक सीमित नहीं है। वह चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान के महत्व को समझें और मृत्यु के बाद भी अपनी आंखों की रोशनी किसी जरूरतमंद तक पहुंचाने का संकल्प लें।

डॉ. तितियाल की यह पहल बताती है कि चिकित्सा पेशा केवल इलाज तक सीमित नहीं होता। सही सोच और निरंतर प्रयास के साथ यह समाज में ऐसी रोशनी भी फैला सकता है, जो किसी व्यक्ति की जिंदगी खत्म होने के बाद भी किसी दूसरे की दुनिया को उजाला देती रहे।

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