
देहरादून। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में नया मोड़ आया है। अदालत का आधिकारिक फैसला आने से पहले ही आदेश अपने पक्ष में होने का दावा करना मंत्री को भारी पड़ गया है।
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने पहले से सुरक्षित रखे गए निर्णय को जारी करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले को अब दूसरी पीठ को रेफर करने का आदेश दिया है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आठ सितंबर 2026 को मामले में दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा गया था, लेकिन अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण अब उस निर्णय को जारी करना उचित नहीं होगा।
निर्णय सुरक्षित होने के बाद आया नया घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, आय से अधिक संपत्ति मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी थी। आठ सितंबर 2026 को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इसके बाद मामले में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया, जब मंत्री गणेश जोशी की ओर से अदालत के अंतिम आदेश से पहले ही फैसला अपने पक्ष में होने का दावा किया गया।
अदालत ने इस स्थिति को देखते हुए सुरक्षित निर्णय जारी करने के बजाय मामले को दूसरी पीठ के समक्ष भेजने का फैसला लिया।
कोर्ट ने बताई अपरिहार्य परिस्थितियां
न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि बहस पूरी होने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा गया था, लेकिन कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण फैसला सुनाना उचित नहीं होगा।
इसके बाद अदालत ने मामले को दूसरी पीठ को रेफर करने का आदेश जारी किया।
अब इस मामले की आगे सुनवाई दूसरी पीठ के समक्ष होगी और वही इस पर निर्णय देगी।
आय से अधिक संपत्ति मामले में चल रही है सुनवाई
यह मामला कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़ा है।
मामले में याचिका दाखिल होने के बाद अदालत में लंबे समय से सुनवाई चल रही थी। दोनों पक्षों की ओर से अपनी-अपनी दलीलें पेश की गईं।
अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
हालांकि, अब निर्णय जारी होने से पहले ही मामले को दूसरी पीठ में भेज दिया गया है।
राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आया मामला
गणेश जोशी उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके खिलाफ चल रहे इस मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा होती रही है।
विपक्ष की ओर से समय-समय पर इस मामले को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं, जबकि मंत्री पक्ष अपना पक्ष रखता रहा है।
हालांकि, अदालत में किसी भी मामले का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आता है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा आगे फैसला
अदालत के आदेश के बाद अब मामले की सुनवाई दूसरी पीठ में होगी। वहां दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी।
अदालत का अंतिम फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे क्या स्थिति बनती है।
फिलहाल सुरक्षित रखा गया निर्णय जारी नहीं किया गया है।
फैसले से पहले दावा करने पर उठा विवाद
अदालत के अंतिम आदेश से पहले ही किसी पक्ष की ओर से फैसले को लेकर दावा किए जाने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया।
न्यायिक प्रक्रिया में फैसला तभी आधिकारिक माना जाता है, जब अदालत उसे सार्वजनिक रूप से जारी करती है।
इस मामले में भी अदालत ने अंतिम आदेश जारी करने के बजाय प्रक्रिया के अनुसार केस को दूसरी पीठ को सौंप दिया है।
अब दूसरी पीठ करेगी सुनवाई
मामले के दूसरी पीठ को रेफर होने के बाद अब आगे की सुनवाई नए सिरे से होगी।
नई पीठ मामले के रिकॉर्ड, दोनों पक्षों की दलीलों और कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।
इसके बाद ही आय से अधिक संपत्ति मामले में अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल गणेश जोशी से जुड़े इस मामले में अदालत का अंतिम फैसला अभी बाकी है और सभी की नजर अब दूसरी पीठ की सुनवाई पर टिकी है।





