उत्तराखंड

बद्रीनाथ से लौटते वक्त काल बना हेलीकॉप्टर, 6 लोगों की मौत एम्स ऋषिकेश भेजे गए शव

Ratna Netam
1 Nov 2026 3:09 PM IST
बद्रीनाथ से लौटते वक्त काल बना हेलीकॉप्टर, 6 लोगों की मौत एम्स ऋषिकेश भेजे गए शव
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ऋषिकेश/चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ के पास हुए दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। रविवार, 1 नवंबर की सुबह सभी मृतकों के पार्थिव अवशेषों को हेलीकॉप्टर के जरिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश पहुंचाया गया। यहां पोस्टमार्टम और अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इस हादसे में जान गंवाने वालों में हेलीकॉप्टर के पायलट के अलावा पांच यात्री शामिल हैं। मृतकों में बेंगलुरु सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) के पुलिस इंस्पेक्टर अरुण सालुंके भी शामिल हैं। इस घटना से कर्नाटक सहित उत्तराखंड में शोक की लहर है।यह हादसा शुक्रवार, 30 अक्टूबर को उस समय हुआ था, जब निजी विमानन कंपनी ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर बद्रीनाथ धाम से यात्रियों को लेकर देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड की ओर लौट रहा था। इसी दौरान चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में चाई गांव के पास हेलीकॉप्टर पहाड़ी से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में पायलट समेत कुल छह लोग सवार थे। हादसे में किसी की जान नहीं बच सकी।
दो दिनों तक चला मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम पहाड़ी इलाके में फंसे मृतकों के शवों को बाहर निकालना था। दुर्घटनास्थल तक पहुंचने के लिए सामान्य सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं था। ऊंचे पहाड़, संकरे रास्ते, घना जंगल और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी।शुक्रवार को दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), उत्तराखंड पुलिस, जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीमें मौके पर पहुंचीं। बचावकर्मियों ने पैदल ही दुर्गम पहाड़ी रास्तों को पार कर घटनास्थल तक पहुंच बनाई। इसके बाद एक-एक करके सभी छह मृतकों के पार्थिव अवशेषों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।प्रशासन के मुताबिक, बचाव दल को शवों को पहाड़ी से नीचे सड़क तक पहुंचाने में काफी समय लगा। शुक्रवार से शुरू हुआ अभियान शनिवार और रविवार की सुबह तक जारी रहा। आखिरकार सभी शवों को पहले जोशीमठ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया गया। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रविवार सुबह इन्हें ऋषिकेश एम्स भेज दिया गया।
बेंगलुरु के पुलिस इंस्पेक्टर अरुण सालुंके की भी मौत
इस हादसे में जान गंवाने वालों में कर्नाटक के पांच यात्री और दिल्ली निवासी हेलीकॉप्टर पायलट शामिल हैं। मृतकों की पहचान कैप्टन हिमांशु सभरवाल (48), अरुण सालुंके (44), प्रतापा बीजी (41), वीबी शंकर गौड़ा (39), सुधीर के. (50) और एचएस नटराज (51) के रूप में हुई है।अरुण सालुंके बेंगलुरु पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। वह सीसीबी की इंटेलिजेंस और टेक्निकल विंग से जुड़े हुए थे। बताया गया है कि वह वर्ष 2007 बैच के पुलिस अधिकारी थे। इससे पहले उन्होंने इंदिरानगर और बनासवाड़ी पुलिस थानों में भी सेवाएं दी थीं। उनके निधन से बेंगलुरु पुलिस विभाग में शोक का माहौल है।बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने भी इस घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि अरुण सालुंके की मौत पुलिस विभाग के लिए बड़ी क्षति है। पुलिस अधिकारी के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि विभाग दुख की इस घड़ी में उनके परिजनों के साथ खड़ा है।अन्य मृतकों में कर्नाटक के तुमकुरु और बेंगलुरु से जुड़े कारोबारी, अधिवक्ता और अन्य यात्री शामिल थे। सभी पांच यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे।
डीएनए जांच और पोस्टमार्टम से होगी पहचान की पुष्टि
हादसे में हेलीकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, दुर्घटना और आग के कारण मृतकों के शवों की पहचान करना मुश्किल हो रहा था। इसी वजह से परिजनों को उत्तराखंड बुलाकर पहचान और डीएनए मिलान की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई थी।अब सभी मृतकों के पार्थिव अवशेष ऋषिकेश एम्स पहुंच चुके हैं। यहां पोस्टमार्टम के साथ आवश्यक पहचान संबंधी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे, ताकि उनका अंतिम संस्कार किया जा सके।इस पूरी प्रक्रिया पर कर्नाटक और उत्तराखंड के अधिकारी आपसी समन्वय से काम कर रहे हैं।
खराब मौसम को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर हादसे के समय क्षेत्र में मौसम खराब था। चमोली जिले के लिए मौसम विभाग ने 30 अक्टूबर को खराब मौसम को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। इसमें कुछ स्थानों पर गरज-चमक, आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई थी।रिपोर्टों के मुताबिक, बद्रीनाथ घाटी में खराब मौसम के कारण शुक्रवार सुबह कुछ समय के लिए हेलीकॉप्टर उड़ानें भी रोकनी पड़ी थीं। मौसम में सुधार के बाद उड़ान संचालन दोबारा शुरू किया गया था। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक, दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का था। इसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-HCX और मॉडल AS350B3 था। हेलीकॉप्टर ने शुक्रवार दोपहर 1 बजकर 14 मिनट के आसपास बद्रीनाथ हेलीपैड से उड़ान भरी थी। इसका गंतव्य देहरादून का सहस्त्रधारा हेलीपैड था।
मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश, विमानन सुरक्षा पर उठे सवाल
हादसे के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दुर्घटना के कारणों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की टीम ने भी मामले का प्रारंभिक आकलन शुरू किया है। इसके अलावा विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की ओर से भी जांच की जा रही है।जांच में खराब मौसम, कम दृश्यता, हेलीकॉप्टर की तकनीकी स्थिति, पायलट की उड़ान संबंधी जानकारी और विमानन सुरक्षा नियमों के पालन जैसे पहलुओं को देखा जाएगा।इस घटना के बाद उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्टों के अनुसार, डीजीसीए ने चार्टर हेलीकॉप्टर परिचालन में शेष सीजन के दौरान को-पायलट की मौजूदगी अनिवार्य करने का निर्णय भी लिया है।फिलहाल हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के शव एम्स ऋषिकेश पहुंचा दिए गए हैं। हादसे ने छह परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। विशेष रूप से बेंगलुरु पुलिस विभाग अपने एक अनुभवी अधिकारी को खोने से दुखी है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और मृतकों के पार्थिव अवशेष परिजनों को सौंपे जाने की प्रक्रिया पर टिकी हैं।
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