उत्तराखंड

हरीश रावत ने फिर मांगी सार्वजनिक माफी

Kavita2
15 Sept 2026 9:27 AM IST
हरीश रावत ने फिर मांगी सार्वजनिक माफी
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देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने पूर्व विशेष कार्याधिकारी यानी ओएसडी चंदन सिंह जीना के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार से अपने मुख्यमंत्रित्व काल की जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रहते उनसे एक चूक हुई थी। हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखकर कहा कि वह इस चूक के लिए पहले भी माफी मांग चुके हैं और एक बार फिर माफी मांग रहे हैं।

यह मामला वर्ष 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी यानी वीपीडीओ भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ा बताया जा रहा है। उस समय उत्तराखंड में हरीश रावत मुख्यमंत्री थे और चंदन सिंह जीना उनके ओएसडी के रूप में कार्यरत थे। जीना के ठिकाने पर ईडी की छापेमारी के बाद तत्कालीन सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की।

हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में सरकार को उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल की जांच कराने की चुनौती दी। उनका कहना है कि यदि तत्कालीन शासन या मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर पर किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई थी तो उसकी जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने जांच से पीछे हटने के बजाय अपने कार्यकाल को जांच के लिए प्रस्तुत करने की बात कही। हालांकि, उपलब्ध बयान में उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि जांच किस एजेंसी से और किन बिंदुओं पर कराने की मांग की है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में एक “चूक” होने का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रहते उनसे यह चूक हुई थी और वह इसके लिए पहले भी माफी मांग चुके हैं। उन्होंने दोबारा माफी मांगते हुए इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने जैसा संदेश दिया। हालांकि, उन्होंने जिस चूक का उल्लेख किया, उसका पूरा विवरण उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है। यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि उनका संकेत जीना की नियुक्ति, उन पर भरोसा करने या परीक्षा प्रकरण से जुड़े किसी अन्य निर्णय की ओर था।

ईडी ने चंदन सिंह जीना के आवास पर कथित रूप से वर्ष 2016 की यूकेएसएसएससी वीपीडीओ परीक्षा में हुए घोटाले से जुड़े मामले को लेकर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान लाखों रुपये की नकदी, सोने के सिक्के और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है। बरामद नकदी की सटीक राशि, सोने के सिक्कों की संख्या तथा दस्तावेजों की प्रकृति का पूरा आधिकारिक विवरण उपलब्ध सूचना में नहीं दिया गया है।

इन वस्तुओं की बरामदगी अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं मानी जा सकती। ईडी की आगे की जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कथित रूप से मिली नकदी और अन्य संपत्ति का स्रोत क्या था और दस्तावेजों का परीक्षा मामले से कोई संबंध है या नहीं। चंदन सिंह जीना की ओर से इन आरोपों या कथित बरामदगी पर क्या स्पष्टीकरण दिया गया है, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है।

ईडी की कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों और राजनीतिक विरोधियों की ओर से हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल पर सवाल उठाए जाने की संभावना बढ़ी है। चूंकि संबंधित परीक्षा उनके कार्यकाल में आयोजित हुई थी और कार्रवाई की जद में आया व्यक्ति उनका पूर्व ओएसडी रहा है, इसलिए राजनीतिक स्तर पर उनकी जवाबदेही को लेकर चर्चा शुरू हो गई। रावत ने इसी चर्चा के बीच जांच की मांग करते हुए अपना पक्ष सामने रखा है।

हरीश रावत की सोशल मीडिया पोस्ट में भावनात्मक अंदाज भी दिखाई दिया। उन्होंने अपनी कथित चूक के लिए माफी मांगते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि वह मामले में किसी जांच से बचना नहीं चाहते। साथ ही, उन्होंने सरकार से सीधे उनके मुख्यमंत्रित्व काल की जांच कराने को कहा। उनकी प्रतिक्रिया को अपने राजनीतिक विरोधियों के सवालों का जवाब देने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

वर्ष 2016 की वीपीडीओ परीक्षा से जुड़े कथित घोटाले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई पहले से चर्चा में रही है। इस प्रकरण में भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा संचालन और चयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध समाचार विवरण में दर्ज प्राथमिकी, आरोपपत्र, नामजद व्यक्तियों और जांच की मौजूदा स्थिति का उल्लेख नहीं है। इसलिए मामले से संबंधित प्रत्येक दावे को आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही प्रकाशित किया जाना चाहिए।

पूर्व ओएसडी के ठिकाने से कथित बरामदगी के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ईडी को मिले दस्तावेजों में क्या जानकारी दर्ज है। यदि इनका संबंध भर्ती परीक्षा या किसी वित्तीय लेनदेन से मिलता है तो जांच का दायरा आगे बढ़ सकता है। यदि इनका मामले से सीधा संबंध स्थापित नहीं होता तो बरामदगी को परीक्षा घोटाले का प्रमाण बताना भ्रामक होगा। ईडी की आधिकारिक जानकारी और आगे की कानूनी प्रक्रिया से स्थिति स्पष्ट होगी।

हरीश रावत ने जांच की मांग कर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर बहस को नया मोड़ दिया है। उनकी मांग के बाद अब यह देखना होगा कि प्रदेश सरकार या जांच एजेंसी की ओर से उनके बयान पर कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल की अलग से जांच कराने के लिए कोई औपचारिक पत्र दिया गया है या फिलहाल यह मांग केवल सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से की गई है।

चंदन सिंह जीना को मामले में गिरफ्तार किया गया है या केवल उनके घर पर तलाशी ली गई, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं है। इसलिए खबर में “ईडी ने गिरफ्तार किया” जैसा दावा नहीं लिखा जाना चाहिए। इसी तरह, उन्हें भर्ती घोटाले का दोषी बताने के बजाय उनके ठिकाने पर कार्रवाई और कथित बरामदगी तक ही तथ्य सीमित रखना जरूरी है।

फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने पूर्व ओएसडी के खिलाफ ईडी की कार्रवाई के बाद सरकार से अपने पूरे मुख्यमंत्रित्व काल की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुई कथित चूक के लिए दोबारा माफी भी मांगी है। अब इस मामले में ईडी की आधिकारिक रिपोर्ट, चंदन सिंह जीना का पक्ष और सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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