उत्तराखंड

Haridwar: शिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए उमड़े हजारों भक्त

Admindelhi1
15 Feb 2026 4:50 PM IST
Haridwar: शिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए उमड़े हजारों भक्त
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हरिद्वार: भीड़ के कारण बाजारों में रहा जाम, शिवमय हुई तीर्थनगरी महाशिवरात्रि पर्व पर तीर्थनगरी हरिद्वार में शिवालयों में श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। भीड़ के कारण बाजारों में भारी जाम की स्थिति बनी रही। कई स्थानों पर शिव बारात का आयोजन हुआ।

शिवालयों में पहुंचकर शिव भक्तों ने अपने आराध्य भगवान शिव का बहुविधि पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्धि की कामना की। शिवालयों में भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। शिवरात्रि पर्व पर आज तीर्थनगरी शिवमय नजर आयी। चारों ओर से हर-हर महादेव व बम-बम भोले के जयकार सुनायी देते रहे। भगवान शिव के जलाभिषेक व पूजन-अर्चन के लिए शिवालयों में सुबह से ही भक्तों का हुजुम उमड़ना शुरू हो गया था। दिन भर शिवालयों में बाहर श्रद्धालुओं की जलाभिषेक के लिए लम्बी-लम्बी कतारें लगी रहीं।

सबसे अधिक भीड़ भगवान शिव की ससुराल कनखल स्थित पौराणिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर में व मां पार्वती के तपस्थली विल्वकेश्वर महादेव मंदिर में रही। सुबह से भक्त मंदिर पहुंचकर लाईन में लगना आरम्भ हो गए थे। अल सुबह से आरम्भ हुआ जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक का सिलसिला दिन भर अनवरत जारी रहा।

मान्यता है कि आज के दिन ही भगवान शिव का विवाह हुआ था। इसके अलावा के तिलभांडेश्वर मंदिर, बिल्केश्वर मंदिर, नीलेश्वर महादेव, जनमासा, गौरीशंकर मंदिर समेत सभी शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ रही। मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गए थे।

श्री दक्षेश्वर महादेव मंदिर के संबंध में अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने बताया कि माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति का यहां साम्राज्य हुआ करता था। राजा दक्ष प्रजापति की इच्छा के विरुद्ध उनकी पुत्री सती का विवाह भगवान शिव के साथ हुआ था। राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन इस यज्ञ में भगवान शिव को छोड़कर समस्त देवी देवताओ को निमंत्रण दिया गया। माता सती इस यज्ञ के आयोजन में पहुंची तो उन्होंने देखा कि वहां भगवान शिव का उपहास उड़ाया जा रहा है।

पति का उपहास देख माता सती क्रोधित हो उठी और योगाग्नि से अपने प्राणों की आहुति दे दी। जिससे क्रोधित होकर भगवन शिव ने अपने गण से वीरभद्र का सृजन किया और उसे राजा दक्ष के यज्ञ का विध्वंस करने के लिए भेजा। क्रोध में आकर वीरभद्र ने राजा दक्ष का सिर काट दिया। उधर माता सती के वियोग में भगवान शिव ने सम्पूर्ण पृथ्वी पर तांडव मचा दिया और माता सती के मृत शरीर को लेकर इधर उधर भटकने लगे। तब देवी देवताओं के आह्वान पर भगवान विष्णु ने अपने चक्र से माता सती को मुक्ति दिलाई और भगवान शिव का क्रोध शांत हुआ। शांत होकर भगवान शिव ने बकरे का सिर लगाकर राजा दक्ष को पुनः जीवनदान दिया और शिवलिंग के रूप में यहां स्वंय विराजमान हो गए।

राजा दक्ष के आग्रह पर भगवान शिव ने सावन के महीने में कनखल स्थित अपनी ससुराल में रहने का वचन दिया। शिवरात्रि पर्व को देखते हुए मंदिर को फूलों और रंगीन लाइटों से सजाया गया था।

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