Haridwar: पंतजलि विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ओजोन थेरेपी कार्यशाला

हरिद्वार: पंतजलि विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज द्वारा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी, पुणे के सहयोग से ओजोन थेरेपी पर एक कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यशाला पंतजलि फेज-2 स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित की गई।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों, इंटर्न्स एवं संकाय सदस्यों को नेचुरोपैथी एवं समेकित स्वास्थ्य सेवाओं में ओजोन थेरेपी के चिकित्सीय उपयोगों के बारे में जागरूक करना तथा उनके ज्ञान को समृद्ध करना था। कार्यक्रम में फैकल्टी ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज के चिकित्सकों, संकाय सदस्यों, इंटर्न्स व विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों का संचालन डॉ. प्रणव खवाले, मेडिकल ऑफिसर तथा डॉ. मार्श्लीन एंटनी, मेडिकल ऑफिसर, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी, पुणे द्वारा किया गया। उन्होंने ओजोन थेरेपी के वैज्ञानिक सिद्धांत, चिकित्सीय लाभ, क्लिनिकल उपयोग एवं सुरक्षा पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी तथा विभिन्न रोगों के प्रबंधन में इसकी बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला के दौरान प्रायोगिक प्रदर्शन एवं संवादात्मक चर्चा भी आयोजित की गई, जिससे प्रतिभागियों को ओजोन थेरेपी में प्रयुक्त उपकरणों, प्रक्रियाओं एवं क्लिनिकल प्रोटोकॉल की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई।
इस अवसर पर कई अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें स्वामी बजरंगदेव (सेवा प्रमुख, पतंजलि वेलनेस), साध्वी देव भूमि, डॉ. मयंक अग्रवाल (प्रति कुलपति), डॉ. दीपेश कुमार सक्सेना (रजिस्ट्रार), डॉ. ए.के. सिंह (डीन, फैकल्टी ऑफ साइंसेज एवं नियंत्रक परीक्षा), डॉ. रवि पंडित (सीईओ, पतंजलि वेलनेस), डॉ. तोरण सिंह (डीन, फैकल्टी ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज), डॉ. अनिल वर्मा तथा डॉ. कनक सोनी शामिल थे।
कार्यक्रम के दौरान स्वामी बजरंगदेव द्वारा संसाधन व्यक्तियों का सम्मान कर उनके योगदान के लिए अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संगीता सिंह (एसोसिएट प्रोफेसर) द्वारा किया गया, जबकि अंत में डॉ. कनक सोनी ने आभार व्यक्त करते हुए सभी अतिथियों, संसाधन व्यक्तियों, संकाय सदस्यों तथा प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यशाला में कई संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. नागराज होसामनी, डॉ. सुमनलता, डॉ. ललित कुमार, डॉ. नयन बिस्वास, डॉ. स्वाति, डॉ. तनु, डॉ. आयुषी कामदार, डॉ. लक्ष्मी नायक तथा डॉ. निधि पाठक शामिल थे।





