उत्तराखंड

Haridwar: फिजिकल एआई को बढ़ावा देने की पहल, आईआईटी रुड़की में स्थापित होगी नई लैब

Admindelhi1
21 Aug 2026 5:52 PM IST
Haridwar: फिजिकल एआई को बढ़ावा देने की पहल, आईआईटी रुड़की में स्थापित होगी नई लैब
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आईआईटी रुड़की में फिजिकल एआई लैब की तैयारी, उद्योगों को मिलेगा नवाचार का मंच

हरिद्वार: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग में अवाथॉन फिजिकल एआई लैब (अवाथॉन पीएएल) स्थापित की जाएगी। लैब का उद्देश्य औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए फिजिकल एआई के विज्ञान को आगे बढ़ाना और अत्याधुनिक शोध को वास्तविक औद्योगिक परिचालनों से जोड़ना है।

आईआईटी रुड़की और अवाथॉन की साझेदारी के तहत औद्योगिक परिचालनों में स्वायत्तता के क्षेत्र में अवाथॉन की विशेषज्ञता को आईआईटी रुड़की की अनुकूलन, मशीन लर्निंग, ज्ञान प्रतिनिधित्व और मल्टी-एजेंट सिस्टम में शोध क्षमता के साथ जोड़ा जाएगा। दोनों संस्थान बड़े पैमाने पर आपूर्ति योजना, लॉजिस्टिक्स तथा ज्ञान-आधारित और निरंतर सीखने वाली स्वायत्त प्रणालियों से जुड़ी जटिल चुनौतियों पर शोध करेंगे।

अवाथॉन के सीईओ और आईआईटी रुड़की के पूर्व छात्र परविंदर जौहर ने कहा कि आईआईटी रुड़की ने उनके दुनिया को देखने के दृष्टिकोण को आकार दिया है। उन्होंने कहा कि संस्थान की प्रतिभा और औद्योगिक जगत की चुनौतियां इस साझेदारी के लिए उपयुक्त आधार हैं। फिजिकल एआई के माध्यम से औद्योगिक अर्थव्यवस्था में स्वायत्तता लाई जा सकती है।

अवाथॉन पीएएल बेंगलुरु स्थित कंपनी के नए एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के साथ मिलकर काम करेगी। लैब में विकसित शोध को खनन, ऊर्जा, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में वास्तविक परिचालनों में लागू किया जाएगा। बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भारत में कंपनी की शोध और इंजीनियरिंग गतिविधियों का केंद्र होगा।

लैब के प्रधान अन्वेषक प्रो. सुगाता गंगोपाध्याय ने कहा कि यह साझेदारी शोधकर्ताओं को अकादमिक स्वतंत्रता के साथ औद्योगिक प्रासंगिकता प्रदान करेगी। इसके तहत प्रायोजित डॉक्टरेट फेलोशिप, सहयोगात्मक शोध, छात्रों के लिए इंटर्नशिप और उद्योग अनुभव के अवसर तथा कार्यशालाएं और तकनीकी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

लैब की स्थापना इस दृष्टिकोण पर आधारित है कि एआई की अगली दिशा फैक्ट्री फ्लोर,आपूर्ति श्रृंखला और महत्वपूर्ण अवसंरचना जैसे भौतिक परिचालनों में स्वायत्तता बढ़ाने की होगी।

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