Haridwar: शक्तिपीठों से घर-घर पहुंचे आचार्यश्री का संदेश : डॉ. चिन्मय पण्ड्या

हरिद्वार: शांतिकुंज में तीन दिवसीय ट्रस्ट मंडल कार्यशाला का आज समापन हुआ। इस शिविरि में उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ एवं बिहार के विभिन्न जिलों से आए ट्रस्टियों एवं कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया।
समापन से पूर्व अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कार्यकर्ताओं को संगठन विस्तार का मंत्र देते हुए कहा कि अब केवल शांतिकुंज के भरोसे मिशन का विस्तार संभव नहीं है। प्रत्येक शक्तिपीठ को अपने क्षेत्र में ‘मिनी शांतिकुंज’ बनकर मिशन का दायित्व संभालना होगा।
जन्मशताब्दी समारोह के दलनायक डॉ. पण्ड्या ने कहा कि शक्तिपीठ जनजागरण, संस्कार, सेवा, साधना और युग निर्माण की गतिविधियों के सक्रिय केंद्र बनें। प्रत्येक शक्तिपीठ अपने क्षेत्र की जिम्मेदारी उठाएगा, तभी पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के विचार घर-घर और जन-जन तक पहुंच सकेंगे। उन्होंने जन्मशताब्दी वर्ष को व्यापक जनजागरण और विचार विस्तार का अभियान बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हम जितना सोचते और चाहते हैं, गुरुदेव उससे कहीं अधिक बढ़कर देते हैं।
आवश्यकता केवल निर्मल भावना, प्रबल संकल्प और समर्पित पुरुषार्थ की है। जनवरी में आयोजित जन्मशताब्दी समारोह की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का प्रयास नहीं, बल्कि देशभर से आए हजारों कार्यकर्ताओं की सेवा भावना, अनुशासन और सामूहिक पुरुषार्थ का परिणाम है। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि जन्मशताब्दी गुरुदेव के विचारों को व्यापक समाज तक पहुंचाने और युग निर्माण के संकल्प को नई गति देने का अवसर है।
कार्यशाला के समन्वयक ने बताया कि तीन दिनों तक चली कार्यशाला में जन्मशताब्दी के अनुयाज, संगठन विस्तार, सेवा-साधना तथा स्थानीय स्तर पर मिशन की गतिविधियों को गति देने जैसे विषयों पर मंथन हुआ। कार्यशाला के समापन पर ट्रस्टियों एवं कार्यकर्ताओं ने सेवा, साधना और संगठन विस्तार के संकल्प को लेकर अपने-अपने क्षेत्रों की ओर प्रस्थान किया।





