Gopeshwar: मानसून सत्र को लेकर गैरसैंण में सुरक्षा और व्यवस्थाएं दुरुस्त

गोपेश्वर: गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में विधानसभा के आगामी मानसून सत्र की तैयारियों ने उत्तराखंड की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। चमोली जिला प्रशासन द्वारा तैयारियां शुरू किए जाने के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार इस बार भी मानसून सत्र गैरसैंण में आयोजित कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह लगातार तीसरा अवसर होगा, जब धामी सरकार मानसून सत्र भराड़ीसैंण में आयोजित करेगी।
वर्ष 2026 में बजट सत्र पहले ही गैरसैंण में आयोजित हो चुका है। ऐसे में माना जा रहा था कि मानसून सत्र देहरादून में होगा, लेकिन जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में तैयारियों की समीक्षा बैठक होने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि सरकार एक बार फिर गैरसैंण कार्ड खेलने की तैयारी में है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गैरसैंण में दो-दो सत्र आयोजित करना भाजपा की पर्वतीय क्षेत्रों में अपनी प्रतिबद्धता का संदेश देने की रणनीति हो सकती है। गैरसैंण लंबे समय से स्थायी राजधानी की मांग का केंद्र रहा है और पहाड़ के लोगों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा माना जाता है।
धामी सरकार ने बदली परंपरा
उत्तराखंड में 2014 से गैरसैंण में विधानसभा सत्रों की शुरुआत हुई, लेकिन लंबे समय तक यहां मुख्य रूप से बजट या शीतकालीन सत्र ही आयोजित होते रहे। वर्ष 2024 में पहली बार धामी सरकार ने मानसून सत्र भी भराड़ीसैंण में आयोजित कर नई परंपरा शुरू की। इसके बाद 2025 में भी मानसून सत्र यहीं हुआ। यदि 2026 में भी ऐसा होता है तो लगातार तीसरी बार मानसून सत्र गैरसैंण में होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2021 में पदभार संभालने के बाद स्वतंत्रता दिवस, राज्य स्थापना दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे प्रमुख कार्यक्रम भी कई बार भराड़ीसैंण में आयोजित कराए हैं। इससे सरकार का गैरसैंण के प्रति राजनीतिक और प्रतीकात्मक जुड़ाव लगातार मजबूत होता दिखा है।
राजधानी आंदोलन से जुड़ा है गैरसैंण
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग वर्ष 1994 के राज्य आंदोलन से ही उठती रही है। वर्ष 2012 में यहां विधानसभा भवन निर्माण का निर्णय हुआ और 2014 में पहली बार तंबुओं में विधानसभा सत्र आयोजित किया गया। 2016 में भराड़ीसैंण के नए विधानसभा भवन में पहला सत्र हुआ, जबकि 4 मार्च 2020 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया।
हालांकि स्थायी राजधानी का मुद्दा अब भी अधूरा है, लेकिन लगातार बढ़ती सरकारी गतिविधियां और विधानसभा सत्रों का आयोजन इस बहस को समय-समय पर फिर जीवंत कर देता है।
सरकार की ओर से अभी नहीं हुई आधिकारिक घोषणा
हालांकि जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक मानसून सत्र के स्थान और तिथि को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। इसके बावजूद प्रशासनिक हलचल और तैयारियों को देखते हुए माना जा रहा है कि भराड़ीसैंण एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति का केंद्र बनने जा रहा है।





