उत्तराखंड

देहरादून में दिनदहाड़े हॉस्टल से 30 लाख का सामान गायब

Ashish verma
11 Oct 2026 4:12 PM IST
देहरादून में दिनदहाड़े हॉस्टल से 30 लाख का सामान गायब
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देहरादून: देहरादून के बिधौली इलाके में लंबे समय से बंद पड़े एक हॉस्टल से करीब 30 लाख रुपये का सामान चोरी होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि सामान ले जाने वाले लोग खुद को खरीदार बताकर वहां पहुंचे थे। उन्होंने आसपास के लोगों को बताया कि हॉस्टल मालिक ने उन्हें सारा सामान बेच दिया है। इस दावे के समर्थन में एक कथित जाली एग्रीमेंट भी दिखाया गया। इसके बाद लगातार चार दिनों तक गाड़ियों में सामान भरकर बाहर ले जाया जाता रहा।
मामले का खुलासा शनिवार को हुआ, जब हॉस्टल मालिक मौके पर पहुंचे। तब उन्हें वहां से सामान गायब होने का पता चला। बताया गया है कि इस घटना में करीब 30 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। चोरी का तरीका इसलिए भी हैरान करने वाला है, क्योंकि सामान आसपास के लोगों की मौजूदगी में निकाला गया। स्थानीय लोगों ने संदेह होने पर पूछताछ भी की थी, लेकिन आरोपियों ने सामान खरीदने का दावा करके उनकी आशंका दूर करने की कोशिश की।
जानकारी के अनुसार, बिधौली स्थित यह हॉस्टल काफी समय से बंद था। कथित चोर वहां खरीदार के रूप में पहुंचे और सामान गाड़ियों में लोड करने लगे। सामान निकाले जाने की गतिविधि देखकर आसपास रहने वाले लोगों को शक हुआ। उन्होंने वहां मौजूद व्यक्तियों से पूछा कि सामान क्यों ले जाया जा रहा है। इस पर जवाब मिला कि मालिक के साथ सौदा हो चुका है और उसी के तहत हॉस्टल का सामान उठाया जा रहा है।
आरोपियों ने केवल मौखिक दावा नहीं किया, बल्कि उसके समर्थन में एक एग्रीमेंट भी दिखाया। बताया जा रहा है कि यह दस्तावेज जाली था। उसे दिखाकर सामान ले जाने की प्रक्रिया को खरीद-बिक्री का हिस्सा बताया गया। इस तरह स्थानीय लोगों के सामने मालिक की अनुमति होने का दावा रखा गया। हालांकि, दस्तावेज किसके नाम पर तैयार किया गया था और उसमें क्या विवरण दर्ज था, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसके बाद सामान निकालने का सिलसिला चार दिनों तक चलता रहा। गाड़ियों में सामान भरकर
हॉस्टल
से बाहर ले जाया गया। आसपास के लोगों के सामने यह गतिविधि हुई, लेकिन कथित बिक्री के दावे के कारण उस समय चोरी का खुलासा नहीं हो सका। घटना के विवरण के मुताबिक, लोगों को बाद में पता चला कि जिसे सामान का सौदा बताया जा रहा था, वह वास्तव में हॉस्टल से सामान गायब करने का तरीका था।
शनिवार को मालिक के पहुंचने पर स्थिति सामने आई। लंबे समय से बंद हॉस्टल में पहुंचकर उन्हें सामान नहीं मिला और करीब 30 लाख रुपये के नुकसान का पता चला। मालिक के आने से पहले तक सामान ले जाने वाले लोग खुद को खरीदार बताते रहे थे। यही दावा इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरोप है कि मालिक के नाम का इस्तेमाल करके स्थानीय लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि सामान उनकी सहमति से ले जाया जा रहा है।
इस मामले में कथित एग्रीमेंट की भूमिका भी अहम है। स्थानीय लोगों की पूछताछ के दौरान उसे दिखाया गया था। दस्तावेज के जरिए आरोपियों ने अपने दावे को भरोसेमंद बनाने की कोशिश की। फिर भी किसी कागज का दिखाया जाना अपने आप किसी सौदे की पुष्टि नहीं करता। यहां दस्तावेज को जाली बताया गया है, जबकि उससे जुड़े विस्तृत तथ्य अभी सामने नहीं आए हैं। इसलिए उसके स्वरूप या उसमें किए गए कथित बदलावों को लेकर कोई निश्चित दावा नहीं किया जा सकता।
घटना में करीब 30 लाख रुपये का सामान गायब होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, कौन-कौन सी वस्तुएं ले जाई गईं और उनकी अलग-अलग कीमत कितनी थी, इसका विवरण उपलब्ध नहीं है। इसी तरह सामान ढोने के लिए इस्तेमाल की गई गाड़ियों की संख्या, उनके प्रकार और सामान पहुंचाए जाने की जगह के बारे में भी जानकारी नहीं दी गई है। फिलहाल सामने आए विवरण में नुकसान का कुल अनुमान और सामान निकालने का तरीका बताया गया है।
चोरी का यह अंदाज बॉलीवुड फिल्म ‘ओए लकी… लकी ओए’ के किरदार की याद दिलाता है। अभय देओल के किरदार से तुलना लोगों को भ्रम में रखकर चोरी करने के तरीके के संदर्भ में की जा रही है। बिधौली की घटना में भी आरोप यही है कि आसपास मौजूद लोगों को खरीद-बिक्री की कहानी सुनाकर सामान ले जाया गया। हालांकि, फिल्म से तुलना केवल घटनाक्रम को समझाने का संदर्भ है और इससे मामले में कोई अतिरिक्त तथ्य नहीं जुड़ता।
उपलब्ध जानकारी में आरोपियों की पहचान, उनकी संख्या या किसी गिरफ्तारी का उल्लेख नहीं है। इसलिए इस घटना को लेकर किसी गिरोह का नाम या उसकी दूसरी वारदातों से संबंध बताना उचित नहीं होगा। हॉस्टल कितने समय से बंद था और मालिक वहां आखिरी बार कब आए थे, यह भी स्पष्ट नहीं है। मामले का सामने आया घटनाक्रम खरीदार बनकर पहुंचने, मालिक के साथ सौदे का दावा करने और कथित जाली एग्रीमेंट दिखाने तक सीमित है।
बिधौली के इस हॉस्टल से चार दिनों तक सामान निकाले जाने के बाद शनिवार को नुकसान का खुलासा हुआ। स्थानीय लोगों की पूछताछ के बावजूद कथित खरीदार अपना दावा दोहराते रहे। अब सामने आई जानकारी के अनुसार, मालिक की अनुमति से सामान खरीदने की कहानी के पीछे करीब 30 लाख रुपये की चोरी का आरोप है। घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यही है कि सामान खुले तौर पर गाड़ियों में भरकर ले जाया गया और बिक्री का दावा करके लोगों को भ्रम में रखा गया।
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