
उत्तराखंड: रामनगर स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में वनकर्मियों की बहादुरी का एक बड़ा उदाहरण सामने आया है। जंगल में गश्त के दौरान एक बाघ ने एक दैनिक श्रमिक वनकर्मी पर अचानक हमला कर दिया। बाघ ने उसे अपने जबड़े में दबोचने की कोशिश की, लेकिन साथ चल रहे वनकर्मियों ने हिम्मत दिखाते हुए हवाई फायरिंग की और जोर-जोर से शोर मचाकर बाघ को वहां से भगाने में सफलता हासिल की। इस त्वरित कार्रवाई से वनकर्मी की जान बच गई।
जानकारी के अनुसार, यह घटना कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की सर्पदुली रेंज में हुई। रामनगर के सुंदरखाल गांव निवासी पीतांबर सौनी (30) पुत्र मोहन राम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में दैनिक श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं। सोमवार शाम करीब चार बजे वह अन्य वनकर्मियों के साथ जंगल में गश्त करने के बाद सर्पदुली कैंपस की ओर लौट रहे थे।
गश्ती दल में वनकर्मी योगेंद्र रावत, नवीन, रामनाथ और मनोज कुमार शामिल थे। सभी वनकर्मी आगे चल रहे थे, जबकि पीतांबर कुछ दूरी पर पीछे चल रहे थे। वनकर्मियों के पास सुरक्षा के लिए बंदूक और लाठियां मौजूद थीं। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे एक बाघ ने अचानक पीतांबर पर हमला कर दिया।
बाघ के अचानक झपटने से पीतांबर जमीन पर गिर गए। इसके बाद बाघ ने उन्हें अपने जबड़े में पकड़ने का प्रयास किया। यह दृश्य देखकर आगे चल रहे वनकर्मियों ने बिना समय गंवाए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। एक वनकर्मी ने अपनी सरकारी बंदूक से कई राउंड हवाई फायरिंग की, जबकि अन्य साथियों ने जोर-जोर से शोर मचाया और जमीन पर लाठियां पटककर बाघ को डराने का प्रयास किया।
वनकर्मियों की बहादुरी और सामूहिक प्रयास के कारण बाघ पीतांबर को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सका और वहां से जंगल की ओर भाग गया। इसके बाद साथी वनकर्मियों ने घायल पीतांबर को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और तुरंत अधिकारियों को घटना की सूचना दी।
घायल वनकर्मी को विभागीय वाहन से अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के दौरान पाया कि बाघ के पंजों से पीतांबर के गले के पास चोटें आई हैं। बेहतर इलाज के लिए उन्हें काशीपुर के एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया। अधिकारियों के अनुसार, वनकर्मी की हालत खतरे से बाहर है और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। पार्क वार्डन बिंदर पाल और सर्पदुली रेंजर संजय पांडे ने घायल वनकर्मी का हाल जाना और घटना की जानकारी ली।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक साकेत बडोला ने बताया कि वनकर्मियों ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए अपने साथी को बाघ के हमले से बचाया। उन्होंने कहा कि घायल कर्मचारी की स्थिति स्थिर है और उसे बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
मानसून के दौरान जंगलों में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। घने जंगल और झाड़ियों के कारण वन्यजीवों को पहचानना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से कॉर्बेट प्रशासन ने मानसून गश्त के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों के अनुसार, जंगल में गश्त के दौरान वनकर्मियों को सुरक्षा उपकरणों के बिना जाने की अनुमति नहीं है। गश्ती दल में पांच से छह लोगों के साथ रहने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा गश्त पर जाने और वापस लौटने की जानकारी अधिकारियों को देना अनिवार्य किया गया है।
वन विभाग ने कर्मचारियों को बंदूक, स्मार्ट स्टिक और लाठी जैसे सुरक्षा उपकरण साथ रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि गश्त के दौरान सभी कर्मचारी एक-दूसरे से अधिक दूरी बनाकर न चलें। थकान होने पर भी जंगल में बैठते समय चारों तरफ नजर रखने की सलाह दी गई है, ताकि किसी भी वन्यजीव की मौजूदगी का तुरंत पता लगाया जा सके।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हुई इस घटना ने एक बार फिर जंगल में काम करने वाले वनकर्मियों की चुनौतियों को सामने ला दिया है। हालांकि, साथियों की बहादुरी और त्वरित निर्णय के कारण एक बड़ी अनहोनी टल गई। वन विभाग अब क्षेत्र में निगरानी बढ़ा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।





