उत्तराखंड

Kanha टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से बाघों की मौत के बाद देशभर में सतर्कता बढ़ी

Kavita2
24 May 2026 12:25 PM IST
Kanha टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से बाघों की मौत के बाद देशभर में सतर्कता बढ़ी
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Uttarakhand उत्तराखंड : मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के खतरे ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इस गंभीर स्थिति के बाद देश के अन्य टाइगर रिजर्व भी सतर्क हो गए हैं और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

कान्हा टाइगर रिजर्व में हाल ही में एक बाघिन और उसके शावकों सहित कुल छह बाघों की मौत हुई थी। वन विभाग के शुरुआती आकलन के अनुसार, इन मौतों के पीछे कैनाइन डिस्टेंपर वायरस को संभावित कारण माना जा रहा है। इस घटना के बाद वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने इसे गंभीर चेतावनी के रूप में देखा है।

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस मुख्य रूप से आवारा और जंगली कुत्तों में फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है। यह वायरस अब बाघों और तेंदुओं जैसे बड़े मांसाहारी वन्यजीवों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित कुत्तों के संपर्क या उनके शिकार को खाने से यह वायरस वन्यजीवों में फैल सकता है।

इस खतरे को देखते हुए कार्बेट टाइगर रिजर्व ने भी अपने क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है। रिजर्व प्रशासन ने निगरानी टीमों को अलर्ट पर रखा है और वन्यजीवों की स्वास्थ्य स्थिति पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रण और टीकाकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही आसपास के गांवों में भी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी टाइगर रिजर्व को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में वन्यजीवों की नियमित स्वास्थ्य जांच और निगरानी को और सख्त करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इस वायरस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह बाघों की आबादी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इसलिए वन्यजीव संरक्षण एजेंसियां अब संयुक्त रूप से रोकथाम और वैक्सिनेशन कार्यक्रम पर काम कर रही हैं।

फिलहाल, कान्हा और अन्य टाइगर रिजर्व में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी नए संक्रमण के मामले को रोकने के लिए आपात कदम उठाए जा रहे हैं।

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