उत्तराखंड

उत्तराखंड में SIR के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी

Ratna Netam
3 Oct 2026 3:19 PM IST
उत्तराखंड में SIR के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी
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देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शनिवार को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई। अंतिम सूची के मुताबिक राज्य में अब कुल 71,58,949 पंजीकृत मतदाता हैं। यह पुनरीक्षण 1 जुलाई 2026 को क्वालिफाइंग डेट मानकर किया गया था। चुनाव आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार उत्तराखंड में SIR की प्रक्रिया 8 जून 2026 से शुरू हुई और अंतिम मतदाता सूची 15 सितंबर को प्रकाशित की जानी थी।अंतिम सूची जारी होने के साथ ही मतदाता सूची के सत्यापन और दावों-आपत्तियों के निपटारे का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। हालांकि, अंतिम सूची के बाद भी पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की सामान्य प्रक्रिया जारी रहती है। चुनाव आयोग ने हाल में SIR के बाद छूट गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए हैं।
8 जून से शुरू हुई थी प्रक्रिया
उत्तराखंड में SIR अभियान 8 जून 2026 से शुरू हुआ था। चुनाव आयोग ने इसके लिए 1 जुलाई 2026 को क्वालिफाइंग डेट निर्धारित किया था। इसके तहत मतदाता सूची को घर-घर सत्यापन, दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अपडेट करने की प्रक्रिया अपनाई गई।आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। इसके बाद मतदाताओं को अपने नाम और विवरण की जांच करने तथा किसी प्रकार की त्रुटि होने पर दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया।
ड्राफ्ट सूची में थे 71,33,785 वोटर
14 जुलाई को जारी ड्राफ्ट सूची में उत्तराखंड में कुल 71,33,785 मतदाता दर्ज थे। इसके बाद दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चली। इस अवधि में उन लोगों को विशेष रूप से अवसर दिया गया, जिनका नाम सूची में नहीं था या जिनके मतदाता विवरण में किसी तरह की गलती थी।दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की गई। शनिवार को जारी फाइनल रोल में मतदाताओं की कुल संख्या 71,58,949 दर्ज की गई। यानी ड्राफ्ट सूची की तुलना में अंतिम सूची में **25,164 मतदाताओं की संख्या बढ़ी**।
शुरुआती सूची से संख्या में बड़ी कमी
SIR शुरू होने से पहले उत्तराखंड की मतदाता सूची में 79,60,762 पंजीकृत मतदाता बताए गए थे। अंतिम सूची में यह संख्या 71,58,949 रह गई है। यानी शुरुआती संख्या और अंतिम सूची के बीच कुल **8,01,813 मतदाताओं का अंतर** है।यहां आंकड़ों को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतर सामने आता है। उपलब्ध संख्याओं के आधार पर 79,60,762 से 71,58,949 घटाने पर 8,01,813 की कमी बनती है, जबकि दिए गए विवरण में 8,26,977 का आंकड़ा बताया गया है। इसलिए **8,26,977 को ‘फाइनल लिस्ट के बाद जुड़े वोटर’ के रूप में प्रस्तुत करना गणितीय रूप से सही नहीं बैठता**। आधिकारिक अंतिम सूची के संदर्भ में 8,01,813 का अंतर शुरुआती और अंतिम मतदाता संख्या के बीच बनता है।वहीं, ड्राफ्ट सूची से अंतिम सूची की तुलना करें तो 25,164 नामों की शुद्ध वृद्धि हुई है। इन आंकड़ों में अंतर को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि SIR के अलग-अलग चरणों में कितने नाम हटाए गए, कितने नए नाम जोड़े गए और कितने मामलों में रिकॉर्ड संशोधित किए गए।
दावे और आपत्तियों के लिए मिला था समय
SIR के दौरान 14 जुलाई से 13 अगस्त तक आम मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया गया था। इस अवधि में मतदाता सूची में अपना नाम जोड़ने, गलत नाम या विवरण पर आपत्ति दर्ज कराने और जरूरी सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता था।इसके बाद चुनाव अधिकारियों ने प्राप्त दावों और आपत्तियों की जांच की। चुनाव आयोग के कार्यक्रम में उत्तराखंड के लिए नोटिस चरण और दावों-आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया भी अलग से निर्धारित की गई थी।इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। SIR के दौरान पुराने रिकॉर्ड, वर्तमान निवास, मृत्यु, स्थानांतरण और डुप्लीकेट प्रविष्टियों जैसे मामलों की भी जांच की जाती है।
नाम हटने के बाद भी मिल सकता है मौका
SIR के बाद कई राज्यों में बड़ी संख्या में नाम अंतिम सूची में दिखाई नहीं देने को लेकर सवाल उठे हैं। इसी पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग ने 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ऐसे पात्र मतदाताओं की पहचान और पुनः नामांकन के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जो SIR के बाद सूची में नहीं मिल रहे हैं। आयोग के निर्देशों के तहत बूथ लेवल अधिकारी पुराने और नए रिकॉर्ड की तुलना करेंगे, जरूरत पड़ने पर घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे और पात्र लोगों को नामांकन में मदद करेंगे।इसका अर्थ है कि अंतिम सूची प्रकाशित हो जाने के बाद भी किसी पात्र व्यक्ति के लिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का रास्ता बंद नहीं होता। सामान्य निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत मतदाता नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
चुनावी तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण
उत्तराखंड में मतदाता सूची का अंतिम रूप से प्रकाशन चुनावी तैयारियों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। अंतिम सूची के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या और बूथ स्तर की व्यवस्थाओं को अपडेट किया जाता है। राजनीतिक दलों के लिए भी यह सूची जमीनी संगठन और मतदाता संपर्क से जुड़ी गतिविधियों का आधार बनती है।चुनाव आयोग का जोर इस बात पर रहता है कि पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल रहें और अपात्र, मृत, स्थानांतरित या दोहरी प्रविष्टियों को नियमों के तहत हटाया जाए। इसी कारण SIR जैसी प्रक्रिया में सत्यापन और दावों-आपत्तियों का चरण महत्वपूर्ण होता है।
अंतिम सूची के आंकड़ों पर नजर
उत्तराखंड की नई अंतिम मतदाता सूची में 71,58,949 मतदाता दर्ज हैं। 14 जुलाई की ड्राफ्ट सूची के 71,33,785 मतदाताओं के मुकाबले अंतिम सूची में 25,164 की वृद्धि हुई है। दूसरी ओर, SIR शुरू होने से पहले दर्ज 79,60,762 मतदाताओं की तुलना में अंतिम सूची 8,01,813 कम है।अब ध्यान उन मतदाताओं पर रहेगा, जिनके नाम अंतिम सूची में नहीं हैं और जो पात्र होने का दावा करते हैं। चुनाव आयोग के विशेष अभियान और निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के जरिए ऐसे लोगों को दोबारा नाम दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा।इस तरह उत्तराखंड में SIR का अंतिम चरण पूरा होने के बाद मतदाता सूची अब नए आंकड़ों के साथ सामने आ गई है। साथ ही, पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने की प्रक्रिया भी आगे जारी रहने वाली है।
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