उत्तराखंड

थारू समाज के सात परिवारों के 50 लोगों ने की सनातन धर्म में वापसी

Kavita2
24 July 2026 10:50 AM IST
थारू समाज के सात परिवारों के 50 लोगों ने की सनातन धर्म में वापसी
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नदन्ना : ग्राम नदन्ना में थारू जनजाति समाज से जुड़े सात परिवारों के करीब 50 लोगों ने ईसाई धर्म छोड़कर सनातन धर्म में वापसी की है। इस अवसर पर शुद्धिकरण हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसके बाद सभी लोगों को सनातन परंपराओं के अनुसार धार्मिक संस्कार कराए गए।

कार्यक्रम के दौरान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-यज्ञ कराया। इसके बाद लोगों को कलावा बांधा गया और जनेऊ धारण कराई गई। इस प्रक्रिया के बाद इन परिवारों ने दोबारा सनातन धर्म की परंपराओं को अपनाने की घोषणा की।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले आठ दिनों में ईसाई धर्म अपना चुके 203 लोगों ने सनातन धर्म में वापसी की है। इसको लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। हालांकि, इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

ग्राम प्रधान माया जोशी ने बताया कि नदन्ना गांव के इन सातों परिवारों ने कुछ समय पहले कुछ लोगों के संपर्क में आने के बाद ईसाई धर्म अपनाया था। उनके अनुसार, इसके बाद ये परिवार नियमित रूप से प्रार्थना सभाओं में शामिल होने लगे थे और ईसाई धर्म से जुड़ी पुस्तकों का अध्ययन करने लगे थे।

ग्राम प्रधान ने दावा किया कि इन परिवारों के सदस्यों ने ईसाई धर्म से जुड़े प्रतीक के रूप में गले में क्रॉस भी धारण करना शुरू कर दिया था। अब इन लोगों ने अपनी इच्छा से सनातन धर्म में लौटने का निर्णय लिया है।

धर्म वापसी कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। आयोजन के दौरान धार्मिक अनुष्ठान किए गए और लोगों ने सनातन परंपराओं के अनुसार जीवन आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

थारू जनजाति क्षेत्र में धर्म और संस्कृति से जुड़े मुद्दे समय-समय पर चर्चा में आते रहे हैं। स्थानीय समुदाय के लोग अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को लेकर सक्रिय रहते हैं। इसी क्रम में धर्म परिवर्तन कर चुके कुछ लोगों के वापस लौटने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।

कार्यक्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि जिन परिवारों ने वापसी की है, उन्होंने अपनी इच्छा से यह निर्णय लिया। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था व्यक्तिगत विषय है और लोगों को अपनी मान्यताओं के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है।

वहीं, सामाजिक जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में लोगों की स्वतंत्र इच्छा और कानूनी प्रक्रिया का ध्यान रखना आवश्यक है। भारत के संविधान में प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के धर्म को मानने और उसका पालन करने की स्वतंत्रता दी गई है।

गांव में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर लोग मौजूद रहे। आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने की बात कही जा रही है।

बताया जा रहा है कि धर्म वापसी करने वाले परिवारों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अपने सामाजिक जीवन में लौटने की इच्छा जताई है। हवन-पूजन और अन्य धार्मिक संस्कारों के माध्यम से उन्हें समुदाय की परंपराओं से दोबारा जोड़ा गया।

इस घटना के बाद क्षेत्र में धर्म परिवर्तन और धर्म वापसी को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोग इसे सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय बता रहे हैं, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों को संवेदनशीलता और कानून के दायरे में समझना जरूरी है।

फिलहाल नदन्ना गांव में हुई इस धर्म वापसी को लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है। सात परिवारों के करीब 50 लोगों के सनातन धर्म में लौटने की घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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