उत्तराखंड

केदारनाथ मार्ग पर गिरे पत्थर महिला यात्री की मौत

Kavita2
7 Sept 2026 9:23 AM IST
केदारनाथ मार्ग पर गिरे पत्थर महिला यात्री की मौत
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रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड में मॉनसून के कारण पैदा हो रही मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लगातार बारिश के बीच रविवार को केदारनाथ पैदल मार्ग पर चीरबासा के पास पहाड़ी से पत्थर गिरने की घटना में एक महिला यात्री की मौत हो गई। घटना के बाद यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने केदारनाथ यात्रा को दिनभर के लिए रोक दिया। यात्रा रोके जाने से सैकड़ों श्रद्धालु अलग-अलग पड़ावों पर फंस गए। मौसम और मार्ग की स्थिति सुरक्षित होने के बाद यात्रियों की आवाजाही दोबारा शुरू कराने की बात कही गई है।

जानकारी के अनुसार रविवार को केदारनाथ धाम की ओर जाने वाले पैदल मार्ग पर चीरबासा के पास अचानक पहाड़ी से पत्थर गिरने लगे। इसी दौरान मार्ग से गुजर रही एक महिला यात्री इसकी चपेट में आ गई। घटना में महिला की मौत हो गई। पहाड़ी से पत्थर गिरने की सूचना मिलते ही संबंधित टीमें सतर्क हो गईं और मार्ग पर आगे बढ़ रहे श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया गया।

बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा बढ़ गया है। केदारनाथ पैदल मार्ग के कई हिस्से पहाड़ियों के बेहद करीब से होकर गुजरते हैं। ऐसे में भारी बारिश के दौरान ऊपर से पत्थर और मलबा गिरने का जोखिम बना रहता है। रविवार की घटना के बाद पुलिस ने किसी अन्य अप्रिय घटना से बचने के लिए एहतियातन यात्रियों की आवाजाही रोक दी।

केदारनाथ यात्रा रोके जाने के कारण सैकड़ों श्रद्धालुओं को अलग-अलग स्थानों पर इंतजार करना पड़ा। जो यात्री केदारनाथ धाम की ओर जा रहे थे, उन्हें सुरक्षित पड़ावों पर रोक दिया गया। वहीं मार्ग की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा बनी हुई है।

बारिश के मौसम में केदारनाथ यात्रा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदलता है। कई बार कुछ ही समय की तेज बारिश के कारण रास्तों पर मलबा आ जाता है और पहाड़ियों से पत्थर गिरने लगते हैं। ऐसे हालात में पैदल यात्रियों को आगे बढ़ने की अनुमति देना जोखिम भरा हो सकता है। यही वजह है कि रविवार को खतरे को देखते हुए यात्रा को रोकने का फैसला किया गया।

चीरबासा के आसपास की स्थिति का आकलन किए जाने के बाद ही मार्ग पर यात्रियों की आवाजाही शुरू की जाएगी। प्रशासन की कोशिश है कि रास्ता सुरक्षित होने पर जल्द से जल्द श्रद्धालुओं को आगे भेजा जाए। हालांकि इसके लिए मौसम की स्थिति और पहाड़ी से पत्थर गिरने के खतरे को ध्यान में रखा जाएगा।

केदारनाथ धाम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लंबा पहाड़ी पैदल मार्ग तय करना पड़ता है। यात्रा मार्ग पर गौरीकुंड से आगे कई महत्वपूर्ण पड़ाव आते हैं, जहां यात्रियों के ठहरने और आगे बढ़ने की व्यवस्था रहती है। मॉनसून के दौरान इस मार्ग पर अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता होती है क्योंकि बारिश के चलते कई स्थानों पर रास्ते संवेदनशील हो जाते हैं।

रविवार की घटना ने एक बार फिर पहाड़ी यात्राओं के दौरान मौसम संबंधी जोखिमों को सामने ला दिया है। बारिश के समय पहाड़ों से पत्थर गिरना, भूस्खलन होना और रास्तों पर मलबा आना यात्रियों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे में यात्रियों को भी स्थानीय प्रशासन और पुलिस की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

केदारनाथ यात्रा में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई यात्री पहले से यात्रा की योजना बनाकर आते हैं। ऐसे में अचानक मार्ग बंद होने पर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। रविवार को भी यात्रा रोके जाने से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को अपने निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा। हालांकि सुरक्षा को देखते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोका गया।

मॉनसून के दौरान उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश लगातार परेशानी बढ़ा रही है। बारिश के कारण सड़कों और पैदल मार्गों पर भूस्खलन तथा मलबा आने का खतरा बना हुआ है। विशेष रूप से चारधाम यात्रा मार्गों पर मौसम की स्थिति प्रशासन के लिए चिंता का विषय रहती है। यात्रियों की बड़ी संख्या को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी जरूरी हो जाती है।

चीरबासा की घटना के बाद पुलिस और संबंधित विभाग मार्ग की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर मौसम और रास्ते में सुधार का इंतजार किया जा रहा है। खतरा कम होने और मार्ग को यात्रियों के लिए सुरक्षित पाए जाने के बाद ही आवाजाही बहाल किए जाने की तैयारी है।

इस बीच यात्रियों से मौसम की स्थिति को देखते हुए यात्रा करने और जल्दबाजी में संवेदनशील मार्गों पर आगे नहीं बढ़ने की अपील की जा सकती है। पहाड़ी इलाकों में बारिश के दौरान स्थिति कुछ ही मिनटों में बदल सकती है, इसलिए स्थानीय स्तर पर जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन महत्वपूर्ण है।

रविवार को हुई घटना में महिला यात्री की मौत ने केदारनाथ यात्रा के दौरान मॉनसून से जुड़े खतरों को फिर सामने ला दिया है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता मार्ग पर मौजूद सैकड़ों यात्रियों को सुरक्षित रखना और परिस्थितियां अनुकूल होते ही उनकी आवाजाही शुरू कराना है। मौसम और मार्ग की स्थिति सामान्य होने के बाद केदारनाथ यात्रा को दोबारा सुचारू किए जाने की उम्मीद है।

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