
बागेश्वर। जिले में मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है। गरुड़ और कपकोट तहसील के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बारिश का दौर तेज हो गया है, जबकि जिला मुख्यालय सहित अन्य क्षेत्रों में रिमझिम बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने लगा है। मंगलवार सुबह से ही आसमान बादलों से घिरा रहा और अलग-अलग इलाकों में रुक-रुककर बारिश होती रही।
मौसम में अचानक आए इस बदलाव से सबसे अधिक चिंता किसानों की बढ़ी है। इस समय कई क्षेत्रों में धान की कटाई का काम चल रहा है, जबकि ग्रामीण परिवार सर्दियों के लिए घास जुटाने में भी लगे हुए हैं। बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसल और पहले से काटी गई धान की फसल दोनों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
किसानों का कहना है कि धान की कटाई के समय लगातार नमी बने रहने से फसल सूख नहीं पाती। यदि बारिश लंबे समय तक जारी रही तो खेतों में पड़ी बालियों पर भी असर पड़ सकता है। इससे किसानों की मेहनत और उत्पादन दोनों प्रभावित होने की आशंका है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन से जुड़े परिवारों के लिए भी यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इन दिनों लोग सर्दियों के लिए घास काटकर उसे सुखाते हैं और घरों के पास सुरक्षित रखते हैं। लेकिन बारिश के कारण पहले से काटी गई घास भीगने लगी है।
यदि घास ठीक से सूख नहीं पाई तो उसके खराब होने और पशुओं के चारे की समस्या पैदा होने का खतरा रहेगा। पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान हरी घास की उपलब्धता कम हो जाती है, इसलिए ग्रामीण परिवार इसी समय सूखी घास का भंडारण करते हैं।
मंगलवार को सुबह से मौसम का मिजाज बदला हुआ रहा। कई स्थानों पर हल्की बारिश हुई, जबकि उच्च हिमालयी इलाकों में बारिश का असर ज्यादा देखा गया।
गरुड़ और कपकोट तहसील के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तेज बारिश से तापमान में भी गिरावट महसूस की गई। लोगों को दिन के समय भी ठंडक का एहसास होने लगा।
जिला मुख्यालय में भी रुक-रुककर हुई बारिश के कारण बाजार और सड़कों पर लोगों की आवाजाही कम दिखाई दी। जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोग छाता और बरसाती लेकर निकले।
बारिश के कारण कुछ स्थानों पर सड़कें फिसलन भरी हो गईं, जिससे वाहन चालकों को भी सावधानी बरतनी पड़ी।
ग्रामीण इलाकों में खेतों तक पहुंचने वाले रास्तों पर कीचड़ बनने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कटाई के लिए खेतों तक पहुंचना और कटी हुई फसल को घर तक लाना भी कठिन हो रहा है।
धान की फसल इस समय किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता है। कई खेतों में धान पूरी तरह तैयार है और किसान मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।
जहां कटाई शुरू हो चुकी है, वहां किसान कटी हुई फसल को बारिश से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ किसान उसे ढककर सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन लगातार नमी के कारण परेशानी बनी हुई है।
पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलने के कारण किसानों को पहले से अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। सुबह मौसम साफ दिखाई देने के बाद भी कुछ समय में बादल घिर जाते हैं और बारिश शुरू हो जाती है।
ऐसे में कटाई और घास संग्रह जैसे काम प्रभावित हो जाते हैं।
बारिश का असर दैनिक मजदूरी और निर्माण कार्यों पर भी पड़ने लगा है। खुले में होने वाले काम कई जगह धीमे हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो कृषि कार्यों में और देरी हो सकती है।
कपकोट के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार बारिश से नदी-नालों के जलस्तर में भी बदलाव हो सकता है। हालांकि अभी किसी बड़ी परेशानी की जानकारी सामने नहीं आई है।
प्रशासन की ओर से लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी जाती रही है। खासकर पहाड़ी सड़कों पर सफर करने वालों को नियंत्रित गति से वाहन चलाने की जरूरत है।
बारिश के कारण भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में भी अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। पहाड़ी ढलानों से पत्थर गिरने या मलबा आने की आशंका बारिश के दौरान बढ़ जाती है।
किसानों के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ धान की फसल को बचाना है और दूसरी तरफ पशुओं के लिए घास का भंडारण करना है।
यदि आने वाले दिनों में मौसम साफ रहता है तो किसान तेजी से कटाई और घास सुखाने का काम पूरा कर सकेंगे। लेकिन बारिश का दौर लंबा खिंचा तो नुकसान बढ़ सकता है।
ग्रामीण इलाकों में लोग मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कई किसान दिनभर आसमान की ओर देखते हुए बारिश रुकने का इंतजार करते रहे।
जिले में इस मौसम परिवर्तन ने त्योहार और कृषि कार्यों के बीच लोगों की दिनचर्या को भी प्रभावित किया है।
फिलहाल गरुड़ और कपकोट के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बारिश का असर अधिक है, जबकि अन्य हिस्सों में रिमझिम बारिश जारी है।
मंगलवार को सुबह से बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने से साफ मौसम की उम्मीद कम रही।
कुल मिलाकर जिले में बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की कटाई और घास संग्रह के महत्वपूर्ण समय में हुई बारिश से फसल और चारे को नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।
अब किसानों की निगाह मौसम साफ होने पर टिकी है, ताकि वे समय रहते अपनी फसल और घास को सुरक्षित कर सकें।





